प्रतिकरात्मक वन रोपण निधि योजना क्रियान्वयन के लिए 2,050 करोड़ 3 लाख रूपये की स्वीकृति
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बैठक में हुए निर्णयों की जानकारी देते हुए कैबिनेट मंत्री चेतन्य कश्यप ने बताया कि मंत्रि-परिषद द्वारा प्रतिकरात्मक वन रोपण निधि (कैम्पा निधि) अंतर्गत वर्ष 2026-27 की वार्षिक कार्य योजना के क्रियान्वयन के लिए 2050 करोड़ 3 लाख रूपये के उपयोग की स्वीकृति दी गई है। प्रतिकरात्मक वन रोपण निधि का उपयोग विगत वर्षों के कार्यों के रख-रखाव, क्षतिपूर्ति पौधारोपण, लैण्डस्केप के आधार पर बिगड़े वनों का सुधार, नदियों के पुनर्जीवन के लिए जलग्रहण क्षेत्र के वनीकरण, मृदा एवं जल संरक्षण के कार्य, ग्रामीणों की आजीविका के लिए ग्रामों की सीमा से लगे वनक्षेत्रों में बॉस प्रजाति सहित वृक्षारोपण, वन्यप्राणी संरक्षित क्षेत्रों के गांवों से स्वैच्छिक विस्थापन, बफर क्षेत्र सहित संरक्षित क्षेत्रों में रहवास का विकास, नगर वनों की स्थापना, वन एवं वन्यप्राणी संबंधी अधोसंरचना सुदृढीकरण एवं ग्रामीणों की क्षमता विकास कार्य में किया जा सकता है।
उल्लेखनीय है कि वन (संरक्षण एवं संवर्धन) अधिनियम, 1980 के अंतर्गत विभिन्न विकास कार्यों के लिये वन भूमि व्यपवर्तन के प्रकरण स्वीकृत किये जाते हैं। वन भूमि व्यपवर्तन के प्रकरणों में स्वीकृति जारी करते समय भारत सरकार द्वारा विभिन्न शर्तें अधिरोपित की जाती हैं। इन शर्तों के अनुरूप आवेदक संस्थान से क्षतिपूर्ति वनरोपण, वन्यप्राणी प्रबंधन तथा नेट प्रजेन्ट वेल्यू (एन.पी.व्ही.) आदि की राशि जमा कराई जाती है। इन शर्तों का मुख्य उद्देश्य वन भूमि के व्यपवर्तन से होने वाली क्षति की पूर्ति करना है। आवेदक संस्थानों से इस प्रकार प्राप्त राशि को राज्य की प्रतिकरात्मक वन रोपण निधि (कैम्पा निधि) में रखा जाता है।