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प्रवेश, पढ़ाई, परीक्षा और परिणाम की समयबद्धता शिक्षा व्यवस्था की गुणवत्ता की मूल आवश्यकता : मंत्री श्री परमार

लेखक: Maroof Ahmed Khan अंतिम अपडेट: 15 सितंबर 2026 👁️ 1 बार पढ़ा गया
प्रकाशक: वॉयस ऑफ क्रांति
प्रवेश, पढ़ाई, परीक्षा और परिणाम की समयबद्धता शिक्षा व्यवस्था की गुणवत्ता की मूल आवश्यकता : मंत्री श्री परमार

मंत्री श्री परमार ने भोपाल स्थित एलएनसीटी विश्वविद्यालय में ‘भारतीय ज्ञान परंपरा में परीक्षा संचालन एवं मूल्यांकन : राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 के परिप्रेक्ष्य में’ विषय पर आयोजित दो दिवसीय राष्ट्रीय कार्यशाला का शुभारंभ किया। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 केवल शिक्षा व्यवस्था में परिवर्तन का दस्तावेज नहीं, बल्कि भारतीय ज्ञान, जीवन-मूल्यों और दृष्टिकोण के अनुरूप विद्यार्थी के सर्वांगीण विकास का राष्ट्रीय संकल्प है। इसी भावना के अनुरूप हमारी परीक्षा एवं मूल्यांकन व्यवस्था भी पारदर्शी, समयबद्ध, गुणवत्तापूर्ण, विद्यार्थी-केंद्रित और परिणामोन्मुख होनी चाहिए।

मंत्री श्री परमार ने कहा कि परीक्षा केवल विद्यार्थी के ज्ञान को मापने का माध्यम नहीं, बल्कि उसकी प्रतिभा, क्षमता, कौशल, चिंतन, सृजनशीलता और संभावनाओं को पहचानने का अवसर बननी चाहिए। भारतीय ज्ञान परंपरा शिक्षा को केवल पुस्तकीय ज्ञान तक सीमित नहीं रखती, बल्कि विद्यार्थी के समग्र व्यक्तित्व विकास पर बल देती है। इसके लिए शिक्षकों को विद्यार्थियों के प्रत्येक पहलू को समझना और उनके साथ निरंतर शिक्षक-विद्यार्थी संवाद स्थापित करना आवश्यक है।

मंत्री श्री परमार ने कहा कि उच्च शिक्षा विभाग, शिक्षा संस्कृति उत्थान न्यास, नई दिल्ली एवं एलएनसीटी विश्वविद्यालय के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित यह कार्यशाला भारतीय ज्ञान परंपरा और आधुनिक शिक्षा दृष्टि के समन्वय से परीक्षा एवं मूल्यांकन व्यवस्था में सकारात्मक, सार्थक एवं दूरगामी परिवर्तन की दिशा में महत्वपूर्ण पहल है। मध्यप्रदेश राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 के अनुरूप भारतीय ज्ञान परंपरा से समृद्ध ऐसी आदर्श परीक्षा एवं मूल्यांकन पद्धति विकसित करेगा, जो देश के लिए भी अनुकरणीय बने।

मंत्री श्री परमार ने कहा कि देशभर से आए कुलगुरुओं, कुलसचिवों, परीक्षा नियंत्रकों, शिक्षाविदों एवं विषय-विशेषज्ञों का सामूहिक मंथन ऐसी मूल्यांकन व्यवस्था के निर्माण में महत्वपूर्ण सिद्ध होगा, जिसमें विद्यार्थी के ज्ञान के साथ उसकी प्रतिभा, कौशल, चिंतन, सृजनशीलता और समग्र क्षमता का न्यायसंगत आकलन हो सके।

💡 पृष्ठभूमि (Background)

यह विषय ‘भारतीय ज्ञान परंपरा में परीक्षा संचालन एवं मूल्यांकन : राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 के परिप्रेक्ष्य में’ राष्ट्रीय शिक्षा नीति के तहत परीक्षा प्रणाली को भारतीय मूल्यों के अनुरूप ढालने पर केंद्रित है। यह खबर इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि यह शिक्षा में गुणवत्ता और समावेशिता को बढ़ाने के लिए एक नया दृष्टिकोण प्रस्तुत करती है, जिससे छात्रों के समग्र विकास पर जोर दिया जाता है। आम जनता पर इसका असर यह हो सकता है कि शिक्षण पद्धति में बदलाव से छात्रों को अधिक संतुलित और समग्र शिक्षा मिलेगी, जिससे उन

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Maroof Ahmed Khan

Maroof Ahmed Khan वॉयस ऑफ क्रांति के संस्थापक एवं प्रधान संपादक हैं। वे जनसरोकार, निष्पक्ष रिपोर्टिंग और जनता की आवाज़ को प्रमुखता देने के लिए प्रतिबद्ध हैं।