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प्रयागराज में महज 90 मिमी बारिश से 5000 घर डूबे:लोग बोले- क्या खाएं, कहां जाएं; महाकुंभ में स्मार्ट सिटी के लिए खर्च हुए थे 7500 करोड़

लेखक: JKS News Desk अंतिम अपडेट: 18 अगस्त 2026
प्रकाशक: वॉयस ऑफ क्रांति
प्रयागराज में महज 90 मिमी बारिश से 5000 घर डूबे:लोग बोले- क्या खाएं, कहां जाएं; महाकुंभ में स्मार्ट सिटी के लिए खर्च हुए थे 7500 करोड़

प्रयागराज में सोमवार को 90 मिमी की बारिश से 5 हजार से अधिक घरों में 4 फीट तक पानी भर गया। आधी रात से शुरू हुई बारिश सोमवार दोपहर तक जारी रही। घरों के निचले हिस्सों में रहने वालों को ऊपरी मंजिल या फिर छतों पर शिफ्ट होना पड़ा। घरों में फ्रिज, सोफा, बेड और अन्य सामान डूब गए। मुंडेरा में बच्चों ने हाथ में मोदी-योगी की तस्वीर लेकर इस परेशानी को दूर कराने की मांग की। शहर के करेली इलाके में खड़ी कारें, बाइक डूब गईं। कई क्षेत्रों में तो कारें तैरने लगीं। बाइक पानी के बहाव से पलट गईं। अकेले करेली इलाके में ही करीब 200 कारें पानी में डूबीं, जिन्हें शाम तक ठेलकर या टू चेन करके गैराज पहुंचाया गया। ऐसे ही एक हजार से अधिक बाइक और स्कूटी पानी में डूबकर चलने काबिल नहीं बचीं। दैनिक भास्कर ने मोहल्ले के लोगों से बात की। मुडेरा की उषा देवी ने बताया- घर में बच्चे हैं, पानी भरने से खाना-पीना तक मुश्किल हो गया है। क्या खाएं, कहां जाएं? कुछ समझ नहीं आ रहा। सुबह से दोपहर तक किसी ने चाय तक नहीं पी है। एक बच्चे ने कहा कि हम स्कूल नहीं जा पाए। वॉशरूम पानी में डूबे हैं। सीवर ओवरफ्लो कर रहा है। ऐसे ही हालात करेली के सोलह मार्केट, बी ब्लॉक, गौस नगर, शम्स नगर, जेके नगर, गड्‌ढा कॉलोनी, इस्लाम नगर, नैनी के चकदौदी, चक फैजुल्ला, चक फैजुल्ला, पंजाबी हाता, जमुनानगर, टैगोर टाउन, सिविल लाइंस आदि इलाकों के रहे। यहां बारिश के साथ ही बड़े नालों के गंदे पानी भी घरों तक पहुंच गए। ये हालात तब हुए, जब महाकुंभ में प्रयागराज को स्मार्ट सिटी बनाने के लिए 7500 करोड़ रुपए खर्च हो चुके हैं। बाढ़ के हालात की 5 तस्वीरें देखिए अब लोगों की बातचीत पढ़िए- राहुल यादव बोले- इलाके की ड्रेनेज लाइन को आगे मेन सीवर से जोड़ा ही नहीं मुडेरा के राहुल यादव ने कहा कि इलाके से गई ड्रेनेज लाइन को आगे मेन सीवर लाइन से जोड़ा ही नहीं गया। अगर समय रहते कनेक्शन कर दिया गया होता तो आज इतना गंभीर जलभराव नहीं होता। उन्होंने नगर निगम कर्मचारियों और सीवर काम करने वाले ठेकेदारों पर लापरवाही का आरोप लगाया। कहा कि करीब छह महीने पहले IGRS और स्पीड पोस्ट के जरिए पूर्व मंत्री सिद्धार्थ नाथ सिंह, मेयर गणेश केसरवानी और पार्षद शिव कुमार को समस्या बताई गई, लेकिन अब तक आश्वासन के अलावा जमीन पर कोई काम नहीं हुआ। बच्चा कुमार बोले- DM, मेयर को 6 महीने से लेटर लिखा जा रहा, कुछ नहीं हुआ मुडेरा के बच्चा कुमार ने कहा कि वार्ड नंबर 18 में करीब 1000 लोगों की बस्ती है, जो बारिश होते ही पानी में डूब जाती है। उन्होंने आरोप लगाया कि सीवर लाइन को ड्रेनेज से जोड़ने के बजाय 10 इंच की पाइप डालकर खानापूर्ति कर दी गई, जिससे बारिश का पानी और सीवर का पानी लोगों के घरों और किचन तक पहुंच रहा है। बच्चा कुमार ने बताया कि पिछले छह महीने से नगर आयुक्त, जिलाधिकारी, मेयर गणेश केसरवानी, क्षेत्रीय विधायक सिद्धार्थ नाथ सिंह और पार्षद को लेटर लिख रहें, मिलकर लोग समस्याएं बता रहें, लेकिन कोई समाधान नहीं हुआ। उन्होंने कहा कि पांच साल से सड़क और नाली निर्माण के टेंडर होने का आश्वासन दिया जा रहा है, जबकि जलभराव के कारण घरों में खाना तक नहीं बन पाता। खुर्शीद बोले- पार्षद अपनी जिम्मेदारी नहीं निभा रहे करेली के खुर्शीद ने कहा- इलाके में करीब छह फीट तक पानी भर गया, जो लोगों के घरों में घुस गया। इससे फ्रिज, टीवी और घर का अन्य सामान खराब हो गए। मोहल्ले के लोगों ने किसी तरह खुद ही पानी निकालने का इंतजाम किया, लेकिन कोई जिम्मेदार अधिकारी मौके पर नहीं पहुंचा। नाले में कूड़ा फंसा होने से पानी की निकासी बाधित है। नगर निगम के अधिकारी हर गली की समस्या नहीं जानते, ऐसे में पार्षद की जिम्मेदारी है कि वह अधिकारियों को समस्या बताए और उसका समाधान कराए। स्थानीय पार्षद पर भी ध्यान नहीं दिए। विनोद बोले- आखिर इस समस्या को ठीक कब कराया जाएगा जार्ज टाउन के विनोद ने बताया कि यहां जब भी बारिश होती है, हर बार यही समस्या खड़ी हो जाती है। आखिर इस समस्या को ठीक कब कराया जाएगा। क्षेत्र में इस समय सीवर सफाई का कोई नया काम भी काफी दिनों से नहीं हुआ है। जलभराव का मुख्य कारण यह है कि इलाके के सारे नाले और सीवर लाइनें पूरी तरह से जाम पड़ी हैं। नाले की निकासी सही न होने की वजह से पानी आगे नहीं निकल पाता, सड़कों और निचले हिस्सों में लगातार भरा रहता है। महाकुंभ में शहर के विकास के लिए मिले थे 7500 करोड़ रुपए प्रयागराज को स्मार्ट सिटी बनाने के नाम पर पिछले कुछ वर्षों में कागजों पर करोड़ों रुपए खर्च हुए। लेकिन, महज 90 मिमी की बारिश में क्या हालात हुए, ये आप देख सकते हैं। महाकुंभ में प्रयागराज को 7500 करोड़ रुपए दिए गए थे। इसमें से 5500 करोड़ रुपए से शहर भर में सड़कों, सीवर लाइनों, पेयजल परियोजनाओं और बड़े-बड़े पुलों को बनवाया गया। नगर निगम को नगरीय व्यवस्था और शहरी प्रबंधन के लिए 1636 करोड़ रुपए मिले थे। शहर की मुख्य सड़कों और गलियों को खोदकर सीवर लाइनें डालने का काम पिछले कई सालों से जारी है। इस उद्देश्य के लिए विशेष रूप से राष्ट्रीय स्वच्छ गंगा मिशन, गंगा प्रदूषण नियंत्रण इकाई डिवीजन का गठन किया गया था। इस इकाई ने शहर में जहां-जहां भी सीवर लाइनें डालीं, वहां निर्माण काम पूरा होने के बाद भी सड़कें धंस गईं और जमीन की बनावट कमजोर हो गई। सीवर और ड्रेनेज लाइन बिछाने के नाम पर करोड़ों रुपए खर्च कर दिए गए। आलम यह है कि जहां भी सीवर लाइन का काम हुआ, वहां बारिश के दौरान जलभराव की समस्या और ज्यादा हो गई। जिम्मेदारों ने क्या कहा, पढ़िए- सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने सोशल मीडिया X पर लिखा- इतिहास में पढ़ाया जाता है, नदियों के किनारे शहर-सभ्यताएं विकसित हुईं। यूपी के भाजपा राज में ये तस्वीर किसी भी शहर की हो सकती है। यूपी में एक मुख्यनगरी है, जहां भ्रष्टाचार के कारण जल-निकासी की कुव्यवस्था इतनी बदनाम हो चुकी है कि वहां आए-दिन सड़कें नदी बन जाती हैं। वो नगर इस तरह की बदइंतजामी का मॉडल बन चुका है।तथ्य के स्तर पर बात करें तो ये स्मार्ट सिटी प्रयागराज का सबसे सभ्रांत इलाका ‘जार्ज टाउन’ बताया जा रहा है, जहां थाना तक जलमग्न है। देश की जनता पूछ रही है कि ये इलाका भाजपा के शहर उत्तरी के विधायक जी के तहत ही आता है या फिर ये बहकर शहर दक्षिणी के भाजपा विधायक के विधानसभा क्षेत्र में चला गया है। वैसे सुना है भाजपा राज में प्रयागराज के विकास पर 1 लाख करोड़ रुपए का घपला हुआ है। ---------------------------------- ये खबर भी पढ़िए- मुस्कान को अरेस्ट करने वाली महिला दरोगा सस्पेंड: वीडियो बनाकर शेयर करती क्यूआर कोड, मेरठ के SSP ऑफिस में तैनात थी मेरठ में पति के टुकड़े करने वाली मुस्कान को जिस महिला दरोगा ने गिरफ्तार किया था, उसे सस्पेंड किया गया है। महिला दरोगा से जुड़ा एक वीडियो रविवार को सोशल मीडिया पर सामने आया था। इसके बाद यह कार्रवाई की गई। पढ़ें पूरी खबर...

📡 स्रोत: NewsData.io

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