प्रयागराज में जब रेल आई, किताबों को भी रास्ता मिल गया | संगम तीरे

1859 में प्रयागराज तक रेल पहुंची तो सिर्फ यात्रियों का सफर आसान नहीं हुआ। कुछ ही दशकों में रेलवे स्टेशन पर किताबों की दुकान खुली, ए. एच. व्हीलर की ‘Indian Railway Library’ से किपलिंग की किताबें प्रकाशित हुईं और शहर का इंडियन प्रेस हिंदी साहित्य के बड़े केंद्रों में शामिल हो गया।
आखिर रेल ने प्रयागराज में किताबों और विचारों के सफर को कैसे बदल दिया?
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