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प्रेस काउंसिल ने विरोध प्रदर्शनों की कवरेज करने वाले पत्रकारों के लिए जारी किया निर्देश

लेखक: Maroof Ahmed Khan अंतिम अपडेट: 16 अक्टूबर 2026
प्रकाशक: वॉयस ऑफ क्रांति
प्रेस काउंसिल ने विरोध प्रदर्शनों की कवरेज करने वाले पत्रकारों के लिए जारी किया निर्देश

16 अक्टूबर, नई दिल्ली: प्रेस काउंसिल ऑफ इंडिया (PCI) ने 14 अक्टूबर 2026 को आयोजित अपनी बैठक में विरोध-प्रदर्शनों और धरनों की कवरेज करने वाले पत्रकारों के लिए व्यापक सुरक्षा और रिपोर्टिंग दिशा-निर्देश जारी किए हैं। हाल ही में दिल्ली में प्रदर्शनों की कवरेज के दौरान पत्रकारों को हिरासत में लिए जाने और सुरक्षा संबंधी चिंताओं के बाद इन दिशा-निर्देशों को अपनाया गया है।इन दिशा-निर्देशों को मुख्य रूप से 6 श्रेणियों में विभाजित किया गया है, जिनका उद्देश्य मीडियाकर्मियों की सुरक्षा, निष्पक्ष रिपोर्टिंग और कानून प्रवर्तन एजेंसियों के साथ बेहतर समन्वय सुनिश्चित करना है।

प्रेस काउंसिल ने मीडिया को निम्नलिखित दिशा-निर्देशों का पालन करने की सलाह दी है।1. पहचान और पेशेवर आचरणअपने मीडिया संस्थान अथवा समाचार-पत्र द्वारा जारी वैध पहचान-पत्र और/या लागू होने की स्थिति में वैध पीआईबी (PIB) अथवा डीआईपी (DIP) मान्यता-पत्र साथ रखें।अपने वैध प्रेस पहचान-पत्र को हर समय स्पष्ट रूप से दिखाई देने वाली जगह पर रखें।

यदि पहचान-पत्र डोरी (लैनयार्ड) से लटका हुआ है, तो उसे सावधानीपूर्वक पहनें और सुरक्षित रखें, ताकि भीड़ की आवाजाही या टकराव के दौरान उसके उलझने का खतरा कम हो।पुलिस या कानून प्रवर्तन अधिकारियों के पूछने पर शांतिपूर्वक और स्पष्ट रूप से अपनी पहचान पत्रकार के रूप में बताएं।निष्पक्षता और पेशेवर आचरण बनाए रखें।

प्रदर्शनों में भाग न लें, किसी पक्ष का समर्थन न करें, टकराव को न भड़काएं और प्रदर्शनकारियों, विरोधी प्रदर्शनकारियों या पुलिस के काम में हस्तक्षेप न करें।सम्मानजनक व्यवहार करें और पुलिस के निर्देशों का पालन करें। तनावपूर्ण परिस्थितियों में बहस से बचें तथा विशेष रूप से तत्काल सुरक्षा के लिए दिए गए वैध निर्देशों का अनुपालन करें।

आवश्यकता पड़ने पर शांतिपूर्वक अपनी प्रेस पहचान स्पष्ट करें।

  1. सुरक्षित स्थान का चयन और भीड़ से सुरक्षा

टकराव वाले स्थानों से उचित और सुरक्षित दूरी बनाए रखें, विशेषकर जब तनाव बढ़ रहा हो या पुलिस कार्रवाई की आशंका हो।कैमरे या रिकॉर्डिंग उपकरणों को पुलिस बैरिकेड, वाहनों या अन्य उपकरणों से इस तरह न जोड़ें, जिससे आवाजाही बाधित हो या संपत्ति को नुकसान पहुंचे।भीड़ के बीच सावधानी से चलें और गिरने या भीड़ के पैरों तले कुचले जाने का जोखिम कम करने के लिए छोटे-छोटे कदम उठाएं।प्रदर्शनकारियों, विरोधी प्रदर्शनकारियों, पुलिस और खतरे के अन्य संभावित स्रोतों के सापेक्ष अपनी स्थिति का लगातार आकलन करते रहें।

  1. परिस्थितियों के प्रति सतर्कता और बचाव की योजना

अपने आसपास की गतिविधियों पर लगातार नजर रखें। भीड़ के व्यवहार में बदलाव, नजदीक आते व्यक्तियों, संभावित टकराव, भीड़ के शोर में बदलाव और उभरते खतरों के प्रति सतर्क रहें।सुरक्षित निकलने का मार्ग पहले से ध्यान में रखें और परिस्थितियों के बदलने पर उसे अपडेट करें। आसपास के निकास द्वारों, खुली सड़कों, फुटपाथों और सुरक्षित स्थानों की पहचान करें।धुएं या आंसू गैस की स्थिति में दिखाई देने वाले स्थलों और सुरक्षित रास्तों की सहायता से प्रभावित क्षेत्र से बाहर निकलें। भीड़ के और भीतर जाने से बचें।4. व्यक्तिगत सुरक्षा के उपाय और प्राथमिक उपचार

अपने साथ एक छोटा आपातकालीन किट रखें। इसमें प्राथमिक उपचार की आवश्यक सामग्री, जरूरी व्यक्तिगत दवाइयां, पीने का पानी, प्रोटीन से भरपूर हल्का नाश्ता, टॉर्च, कपड़ा या छोटा तौलिया तथा आंखों की सुरक्षा के लिए चश्मा शामिल होना चाहिए।खतरे के आकलन के आधार पर उपयुक्त सुरक्षात्मक हेलमेट और शरीर की सुरक्षा के उपकरणों पर विचार करें।

सुरक्षा उपकरणों के इस्तेमाल से अनावश्यक जोखिम लेने की प्रवृत्ति नहीं बढ़नी चाहिए।प्राथमिक उपचार की बुनियादी जानकारी प्राप्त करें और ड्यूटी पर जाने से पहले सुरक्षा उपकरणों के इस्तेमाल का अभ्यास करें।आंसू गैस के गोले, फ्लैश-बैंग उपकरण या धुआं पैदा करने वाले ग्रेनेड को कभी न छुएं, न उठाएं और न ही उन्हें हटाने का प्रयास करें।

ये गर्म हो सकते हैं, इनमें विस्फोट हो सकता है या इन पर खतरनाक अवशेष मौजूद हो सकते हैं।5. समन्वय और संचार

रिपोर्टिंग के पूरे कार्यकाल के दौरान अपने न्यूज़रूम के साथ नियमित संपर्क बनाए रखें।मीडिया संस्थानों को एक संपर्क अधिकारी नामित करना चाहिए, जो पत्रकारों की लोकेशन पर नजर रखे और आपातकालीन परिस्थितियों में सहायता प्रदान करे।स्वतंत्र पत्रकार (फ्रीलांसर) यह सुनिश्चित करें कि किसी विश्वसनीय संपादक या संपर्क व्यक्ति को उनकी लोकेशन, रिपोर्टिंग की योजना और वापस लौटने के संभावित समय की जानकारी हो।विशेष रूप से अकेले काम करते समय साथी पत्रकारों की सुरक्षा का ध्यान रखें और जहां तक संभव हो, सहकर्मियों के साथ संपर्क बनाए रखें।पहले से निर्धारित प्रदर्शनों के मामले में, जहां संभव हो, मीडिया संस्थानों को संबंधित पुलिस अधिकारियों, जन सूचना अधिकारियों या प्रेस संपर्क अधिकारियों के साथ समन्वय करना चाहिए, ताकि संचार की प्रक्रिया स्पष्ट हो सके और मीडिया के लिए निर्धारित स्थानों की जानकारी मिल सके।

  1. नैतिक और जिम्मेदार रिपोर्टिंग

घटनाओं की सटीक, वस्तुनिष्ठ और निष्पक्ष रिपोर्टिंग करें। सत्यापित तथ्यों, आरोपों, विचारों और अपुष्ट दावों के बीच स्पष्ट अंतर रखें। सटीकता और निष्पक्षता से संबंधित पत्रकारिता आचरण के लागू मानदंडों का पालन करें।जहां तक संभव हो, कई स्रोतों के माध्यम से जानकारी की पुष्टि करें। गवाहों से पूछें कि उन्हें जानकारी कहां से मिली और घटना के संबंध में उनकी निकटता, देखने की स्थिति, विश्वसनीयता तथा संभावित पक्षपात का आकलन करें।प्रदर्शनकारियों, आयोजकों, पुलिस और सरकारी अधिकारियों के बयानों की समान पत्रकारिता-संबंधी जांच करें।

दावों का स्पष्ट रूप से स्रोत बताएं और उनकी पुष्टि के लिए अन्य साक्ष्य जुटाएं।पुलिस की वास्तविक समय की तैनाती, सामरिक गतिविधियों या बचाव के रास्तों का सीधा प्रसारण या प्रकाशन न करें। इससे लोगों की सुरक्षा या पुलिस की परिचालन संबंधी गोपनीयता प्रभावित हो सकती है।लोगों के इरादों, उद्देश्यों या भावनाओं के बारे में अनुमान लगाने के बजाय उनके प्रत्यक्ष रूप से दिखाई देने वाले कार्यों का वर्णन करें।नाबालिगों, असुरक्षित परिस्थितियों में मौजूद व्यक्तियों, घायलों और संकट में फंसे आम नागरिकों की तस्वीरें लेते या उनकी पहचान उजागर करते समय विशेष सावधानी बरतें।

यह विचार करें कि सामग्री प्रकाशित करने से उन्हें प्रतिशोध, उत्पीड़न या किसी अन्य नुकसान का सामना करना पड़ सकता है या उनकी निजता के अधिकार का उल्लंघन हो सकता है।कैमरे और अन्य उपकरणों, लाइव प्रसारण की प्रतिबद्धताओं या विशेष फुटेज हासिल करने के दबाव को पत्रकारों की सुरक्षा पर हावी न होने दें।

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Maroof Ahmed Khan

Maroof Ahmed Khan वॉयस ऑफ क्रांति के संस्थापक एवं प्रधान संपादक हैं। वे जनसरोकार, निष्पक्ष रिपोर्टिंग और जनता की आवाज़ को प्रमुखता देने के लिए प्रतिबद्ध हैं।