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प्रो. एनके सिंधी की स्मृति में व्याख्यान, भारतीय समाजशास्त्र पर जोर

लेखक: Maroof Ahmed Khan अंतिम अपडेट: 8 सितंबर 2026 👁️ 1 बार पढ़ा गया
प्रकाशक: वॉयस ऑफ क्रांति
प्रो. एनके सिंधी की स्मृति में व्याख्यान, भारतीय समाजशास्त्र पर जोर

जयपुर में प्रो. एनके सिंधी की स्मृति में ‘समकालीन भारत में बदलते सामाजिक मुद्दों का परिदृश्य’ विषय पर स्मृति व्याख्यान आयोजित हुआ। डॉ. जीएल शर्मा ने भारतीय सामाजिक दर्शन के आधार पर सामाजिक समस्याओं के समाधान और समाजशास्त्रीय चिंतन को मजबूत करने की जरूरत बताई।

जयपुर। राजस्थान विश्वविद्यालय के समाजशास्त्र विभाग की ओर से शिक्षक दिवस के अवसर पर प्रख्यात समाजशास्त्री प्रो. एन.के. सिंधी की स्मृति में 5 सितंबर 2026 को स्मृति व्याख्यान आयोजित किया गया। कार्यक्रम का विषय ‘समकालीन भारत में बदलते सामाजिक मुद्दों का परिदृश्य’ रहा। व्याख्यान में भारतीय समाज, सामाजिक परिवर्तन, समाजशास्त्रीय चिंतन और वर्तमान सामाजिक चुनौतियों के विभिन्न पहलुओं पर चर्चा हुई।

समाजशास्त्र विभाग की अध्यक्ष डॉ. मोनिका राव ने स्वागत उद्बोधन में विभाग की अकादमिक परंपरा का उल्लेख करते हुए कहा कि समाजशास्त्र का उद्देश्य केवल यह समझना नहीं होना चाहिए कि समाज में क्या बदल रहा है, बल्कि यह भी देखना जरूरी है कि उस परिवर्तन से किस प्रकार का समाज निर्मित हो रहा है। उन्होंने कहा कि AI के दौर में केवल उससे उत्तर प्राप्त करने की क्षमता पर्याप्त नहीं है, बल्कि उसके उत्तरों पर सवाल उठाने और उनका आलोचनात्मक विश्लेषण करने की क्षमता भी विकसित करनी होगी।

कार्यक्रम संयोजक डॉ. रोहित कुमार जैन ने बताया कि समाजशास्त्र विभाग वर्ष 2003 से लगातार प्रो. एन.के. सिंधी की स्मृति में यह व्याख्यान आयोजित कर रहा है। उन्होंने कहा कि प्रो. सिंधी ने भारतीय समाज को भारतीय संदर्भों में समझने की समाजशास्त्रीय परंपरा को आगे बढ़ाने में महत्वपूर्ण योगदान दिया। उन्होंने सिद्धांत, अनुभवजन्य अनुसंधान और संस्था निर्माण के बीच संबंध स्थापित करने पर भी जोर दिया। शिक्षक दिवस के संदर्भ में उन्होंने भारतीय गुरु-परंपरा का उल्लेख करते हुए ‘आचार्यदेवो भव’ की भावना को रेखांकित किया।

कार्यक्रम के मुख्य वक्ता डॉ. जी.एल. शर्मा, अतिरिक्त निदेशक एवं पदेन उप सचिव, सूचना एवं जनसंपर्क विभाग, राजस्थान सरकार ने आधुनिक समाजशास्त्रीय चिंतन को भारतीय सामाजिक दर्शन से जोड़ते हुए विचार रखे। उन्होंने ‘वसुधैव कुटुम्बकम’, ‘सर्वे भवन्तु सुखिनः’ और ‘मैं से हम की यात्रा’ के माध्यम से सामाजिक विकास की व्यापक अवधारणा प्रस्तुत की।

डॉ. शर्मा ने कहा कि भारत को अपनी सामाजिक समस्याओं के समाधान के लिए पश्चिमी मॉडल की नकल करने की आवश्यकता नहीं है। भारतीय समाज की अपनी गहरी सामाजिक, सांस्कृतिक और बौद्धिक परंपरा है, जिसके आधार पर समकालीन चुनौतियों को समझने और उनके समाधान के लिए भारतीय दृष्टिकोण विकसित किए जा सकते हैं।

उन्होंने कहा कि विकास को केवल आर्थिक प्रगति तक सीमित नहीं किया जाना चाहिए। वास्तविक विकास वही है, जिसके केंद्र में व्यक्ति, समाज और अंतिम व्यक्ति का कल्याण हो। उन्होंने भारतीय सामाजिक दर्शन और आधुनिक समाजशास्त्रीय चिंतन के बीच बेहतर समन्वय की आवश्यकता पर जोर दिया।

कार्यक्रम में शिक्षक दिवस के अवसर पर विश्वविद्यालय के शिक्षकों का सम्मान भी किया गया। अंत में कार्यक्रम सह-संयोजक डॉ. नीलम जोशी ने आभार व्यक्त किया। कार्यक्रम में प्रो. अरविंद अग्रवाल, पूर्व कुलपति, मोतिहारी केंद्रीय विश्वविद्यालय सहित विश्वविद्यालय के अनेक शिक्षक, शोधार्थी और अन्य शिक्षाविद मौजूद रहे।

💡 पृष्ठभूमि (Background)

स्मृति व्याख्यान का विषय ‘समकालीन भारत में बदलते सामाजिक मुद्दों का परिदृश्य’ है, जिसमें वर्तमान समाज में उभरती चुनौतियों और उनके समाधान पर चर्चा की गई। यह खबर महत्वपूर्ण है क्योंकि प्रो. एनके सिंधी समाजशास्त्र के क्षेत्र में अग्रणी थे और उनकी शिक्षाएँ आज भी प्रासंगिक हैं; उनके स्मरण में यह कार्यक्रम उनके योगदान को सम्मानित करता है। आम जनता पर इसका असर यह हो सकता है कि लोगों को समाजिक समस्याओं के प्रति जागरूकता बढ़ेगी और वे समाजशास्त्रीय दृष्टिकोण से समाधान सोचने के लिए प्रेरित होंगे, जिससे सामा

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Maroof Ahmed Khan

Maroof Ahmed Khan वॉयस ऑफ क्रांति के संस्थापक एवं प्रधान संपादक हैं। वे जनसरोकार, निष्पक्ष रिपोर्टिंग और जनता की आवाज़ को प्रमुखता देने के लिए प्रतिबद्ध हैं।