27% ओबीसी आरक्षण की कानूनी लड़ाई तेज, राष्ट्रपति के नाम ज्ञापन देकर सुप्रीम कोर्ट में अपील की मांग
ताज़ा खबरों से अपडेट रहने के लिए हमारे WhatsApp चैनल से जुड़ेंJoin करें →
भोपाल में कलेक्टर के माध्यम से सौंपा ज्ञापन, लंबित अभ्यर्थियों के हितों की रक्षा और 13 प्रतिशत होल्ड पदों की भर्तीवार सूची सार्वजनिक करने की उठाई मांग
भोपाल। मध्य प्रदेश में अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) के 27 प्रतिशत आरक्षण का मुद्दा एक बार फिर चर्चा में है। आरक्षण की कानूनी लड़ाई और लंबित अभ्यर्थियों के भविष्य को लेकर 15 अक्टूबर 2026 को राष्ट्रपति के नाम जिला कलेक्टर, भोपाल के माध्यम से ज्ञापन सौंपा गया। ज्ञापन में मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय के 9 अक्टूबर 2026 के निर्णय को सर्वोच्च न्यायालय में चुनौती देने और तत्काल विशेष अनुमति याचिका (एसएलपी) दायर करने की मांग की गई।
ज्ञापन के माध्यम से मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव से आरक्षण की कानूनी रक्षा के लिए लिखित कार्ययोजना जारी करने और विधानसभा का विशेष सत्र बुलाने का आग्रह किया गया। साथ ही प्रदेश के महाधिवक्ता प्रशांत सिंह और सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता की भूमिका तथा इस मामले में दी गई कानूनी सलाह की स्थिति स्पष्ट करने की मांग भी रखी गई।
13 प्रतिशत होल्ड पदों की सूची सार्वजनिक करने की मांग
ज्ञापन में ओबीसी के 13 प्रतिशत होल्ड पदों की भर्तीवार सूची सार्वजनिक करने का मुद्दा प्रमुखता से उठाया गया। इसमें लंबित अभ्यर्थियों के हितों की रक्षा के लिए सर्वोच्च न्यायालय से अंतरिम राहत मांगने और भर्ती प्रक्रिया से जुड़े मामलों में स्पष्टता लाने की मांग की गई।
इसके अलावा ओबीसी आरक्षण को संविधान की नौवीं अनुसूची में शामिल करने की संभावनाओं का विधिक परीक्षण कराने का आग्रह किया गया। ज्ञापन में कहा गया कि आरक्षण से जुड़े निर्णयों में लंबित अभ्यर्थियों के भविष्य को ध्यान में रखते हुए प्रभावी कानूनी कदम उठाए जाने चाहिए।
प्रतिनिधित्व के प्रमाणिक आंकड़े पेश करने पर जोर
ज्ञापन में ओबीसी वर्ग के सामाजिक, शैक्षणिक और प्रशासनिक प्रतिनिधित्व से संबंधित प्रमाणिक आंकड़े प्रस्तुत करने की मांग भी की गई। साथ ही केंद्र सरकार और संबंधित मंत्रालयों की भूमिका स्पष्ट करने तथा मुख्य सचिव के माध्यम से समयबद्ध कार्ययोजना जारी कर विभागवार जवाबदेही तय करने का आग्रह किया गया।
ज्ञापन के माध्यम से राष्ट्रपति से अनुरोध किया गया कि संबंधित मांगों को सक्षम प्राधिकारियों तक पहुंचाकर नियमानुसार कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।
ज्ञापन में कहा गया कि 27 प्रतिशत ओबीसी आरक्षण के मुद्दे पर केवल आश्वासन पर्याप्त नहीं है। इसके लिए प्रभावी कानूनी कार्रवाई, लंबित अभ्यर्थियों के हितों की सुरक्षा और आगे की प्रक्रिया को लेकर स्पष्ट निर्णय आवश्यक हैं।