पूर्व अफसरों का डेलिगेशन नहीं पहुंच पाया ECI, महाभियोग नोटिस देने की थी प्लानिंग
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दिल्ली के पूर्व उपराज्यपाल नजीब जंग के नेतृत्व में 5 अक्टूबर को ब्यूरोक्रेट्स और सिविल सोसाइटी का एक डेलिगेशन चुनाव आयोग के ऑफिस पहुंचा.
हालांकि, पूरे मकसद पर उस समय पानी फिर गया, जब डेलिगेशन को चुनाव आयोग परिसर में घुसने से रोक दिया गया. इस दौरान कड़ा सुरक्षा पहरा बिछाया गया.
इस डेलिगेशन में दिल्ली के पूर्व उपराज्यपाल नजीब जंग, जीके पिल्लई, अमिताबाह पांडेय, अशोक शर्मा, यशवर्धन आजाद, योगेंद्र यादव, अंजलि भारद्वाज, साईं बालाजी समेत कई अन्य लोग भी मौजूद रहे.
अंजलि भारद्वाज ने कहा कि हमें चुनाव आयोग में जाकर महाभियोग का पत्र देना था. सीनियर सिविल सर्वेंट जाना चाह रहे थे. यह कोई प्रोटेस्ट नहीं था, लेकिन सभी रास्ते बंद कर दिए गए.
वहां पहुंचना मुश्किल कर दिया था. हम यहां आए थे ताकि अपनी बात बता सकें. इलेक्शन कमीशन संवैधानिक संस्था है. भारद्वाज ने कहा, अब कोई ऑप्शन नहीं रह गया है. इसलिए महाभियोग जरूरी है.
नजीब जंग बोले- हमें शर्म आती है, उन्होंने ऐसा किया
वहीं, दिल्ली के पूर्व राज्यपाल नजीब जंग ने कहा है कि अजीब महसूस हो रहा है, यहां आकर क्योंकि हम कोई एक्टिविस्ट नहीं हैं. हमने 40-45 साल सरकार की सेवा की है.
हमने कॉन्स्टिट्यूशन की कसम खाई थी कि उसको ध्यान में रखते हुए कार्य करेंगे. हमारी शिकायत सरकार से नहीं है.
पूर्व राज्यपाल ने कहा, ज्ञानेश कुमार हमसे 15 साल जूनियर है, हमें शर्म आती है उन्होंने ऐसा किया. 13 करोड़ लोग इस प्रकिर्या से वंचित हैं.
जब इलेक्शन के दौरान घर घर सर्वे करते है, जो लोग इलेक्शन कराते है, उनकी ट्रेनिंग होती है. उन्हें गांवो में भेजते है ताकि कोई वोट से वंचित ना रहे. लेकिन यह शर्म आती है कि इतने लोग इस प्रक्रिया से बाहर हैं.
हम चाहते है कि वह अपने पद से इस्तीफा दे दें.
जीके पिल्लई ने बोला- फंडामेंटल राइट्स में बदलाव किया
जीके पिल्लई ने कहा है कि आज जो हिंदुस्तानी है, उस साबित करना पड़ रहा है कि वह हिंदुस्तानी है. 99.9 प्रतिशत
📡 स्रोत: ABP Live
💡 पृष्ठभूमि (Background)
यह खबर दिल्ली के पूर्व उपराज्यपाल नजीब जंग के नेतृत्व में 5 अक्टूबर को चुनाव आयोग के कार्यालय में पहुँचने वाले 5 पूर्व अधिकारियों और नागरिक समाज के डेलिगेशन के प्रवेश पर रोक के बारे में है। इस घटना ने चुनावी प्रक्रिया में पारदर्शिता और स्वतंत्र निरीक्षण के सवाल उठाए। यह महत्वपूर्ण है क्योंकि चुनाव आयोग के परिसर में डेलिगेशन को प्रवेश न देने से चुनावी निगरानी की प्रभावशीलता पर संदेह पैदा हुआ, जो लोकतंत्र के मूलभूत सिद्धांतों को प्रभावित कर सकता है। आम जनता पर इसका असर यह हो सकता है कि चुनावी प्रक