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पूर्व CJI ने किया जस्टिस भुइयां की टिप्पणी का विरोध:जस्टिस गवई बोले- मामला सुप्रीम कोर्ट में विचाराधीन, SIR प्रक्रिया पर बयान मर्यादा के खिलाफ

लेखक: JKS News Desk अंतिम अपडेट: 6 अक्टूबर 2026 👁️ 3 बार पढ़ा गया
प्रकाशक: वॉयस ऑफ क्रांति
पूर्व CJI ने किया जस्टिस भुइयां की टिप्पणी का विरोध:जस्टिस गवई बोले- मामला सुप्रीम कोर्ट में विचाराधीन, SIR प्रक्रिया पर बयान मर्यादा के खिलाफ

पूर्व CJI बीआर गवई और दिल्ली हाईकोर्ट के दो रिटायर्ड जजों ने सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस उज्जल भुइयां की टिप्पणी की आलोचना की है। उन्होंने कहा कि SIR का मामला सुप्रीम कोर्ट में विचाराधीन हैं। जस्टिस गवई ने सोमवार को कहा कि किसी लंबित मामले पर सुप्रीम कोर्ट के मौजूदा जज को सार्वजनिक टिप्पणी नहीं करनी चाहिए।

उन्होंने इसे न्यायिक मर्यादा के खिलाफ बताया। जस्टिस भुइयां ने रविवार को NALSAR यूनिवर्सिटी ऑफ लॉ में 19वीं जस्टिस बोध राज साहनी मेमोरियल मूट कोर्ट प्रतियोगिता के समापन समारोह में भाषण दिया था। उन्होंने कहा था कि लाखों भारतीय नागरिकों को वोट देने के अधिकार से वंचित करने वाली कोई भी प्रक्रिया मूल रूप से मनमानी है।

यह संवैधानिक व्यवस्था को नकारने जैसी है। जस्टिस भुइयां ने क्या कहा था जस्टिस भुइयां ने कहा था कि संविधान नागरिकों के दो वर्ग नहीं बनाता। एक वर्ग वोट देने के अधिकार वाला और दूसरा बिना वोटिंग अधिकार वाला नहीं हो सकता। उन्होंने कहा था कि ऐसी प्रक्रिया को किसी भी तरह की ‘व्हाटअबाउटरी’ से सही नहीं ठहराया जा सकता।

गवई ने PTI से बातचीत में कहा, “न्यायिक मर्यादा उन्हें उस मामले पर टिप्पणी करने की इजाजत नहीं देती, जो अदालत में विचाराधीन है।” उन्होंने कहा कि सुप्रीम कोर्ट के मौजूदा जज को ऐसे मुद्दे पर बयान नहीं देना चाहिए, जिस पर उसी अदालत में सुनवाई चल रही हो। रिटायर्ड जजों ने भी सवाल उठाए गवई की राय से दिल्ली हाईकोर्ट के रिटायर्ड जज एसएन ढींगरा और आरएस सोढ़ी भी सहमत रहे।

दोनों ने जस्टिस भुइयां की टिप्पणी पर सवाल उठाए। जस्टिस ढींगरा ने कहा कि यह बयान सुप्रीम कोर्ट के मौजूदा जज की सीमाओं से “काफी आगे” है। लंबित मामले पर सार्वजनिक कार्यक्रम में ऐसी टिप्पणी नहीं करनी चाहिए। उन्होंने कहा, “उन्हें ऐसा बयान देने से पहले हजार बार सोचना चाहिए था।” ढींगरा ने यह भी कहा कि जस्टिस भुइयां को मामले के पूरे तथ्य पता नहीं थे।

SIR से जुड़े फैसले कथित तौर पर CEC ज्ञानेश कुमार ने अन्य चुनाव आयुक्तों की सहमति के बिना लिए थे। इस बारे में पूछे जाने पर ढींगरा ने कहा कि असहमति होने पर चुनाव आयुक्त खुद बोल सकते हैं। उन्होंने कहा, “वे देश के शीर्ष नौकरशाह हैं और महत्वपूर्ण पदों पर बैठे हैं। वे अपनी बात खुद कह सकते हैं।

उनकी ओर से किसी और के बोलने की जरूरत नहीं है।” वोट के अधिकार पर जस्टिस सोढ़ी

📡 स्रोत: Dainik Bhaskar

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💡 पृष्ठभूमि (Background)

यह खबर पूर्व CJI बीआर गवई और दो रिटायर्ड जजों के जस्टिस उज्जल भुइयां की टिप्पणी पर विरोध के बारे में है, जिसमें उन्होंने कहा कि सुप्रीम कोर्ट के किसी भी मौजूदा जज को किसी लंबित मामले पर सार्वजनिक टिप्पणी नहीं करनी चाहिए। यह विषय न्यायिक मर्यादा और स्वतंत्रता से जुड़ा है, जो भारत की कानूनी व्यवस्था की विश्वसनीयता पर असर डालता है। यह खबर महत्वपूर्ण है क्योंकि यह न्यायिक प्रक्रियाओं में पारदर्शिता और निष्पक्षता के बीच संतुलन पर सवाल उठाती है, और यह दर्शाती है कि न्यायपालिका पर सार्वजनिक विश्वास कैस

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