पूर्व मंत्री अंटू मिश्रा का इंटरव्यू:बोले- BSP अब बुलाए तब भी नहीं जाऊंगा, 2022 में विधानसभा चुनाव नहीं लड़ा, 2027 में जरूर लडूंगा
बीएसपी में दो दशक से ज़्यादा राजनीति की। मायावती की सरकार में स्वास्थ्य मंत्री रहे, लेकिन एक सोशल मीडिया पोस्ट पर बसपा सुप्रीमो ने पार्टी से निष्कासित कर दिया। आरोप पार्टी विरोधी गतिविधियों में शामिल होना और अनुशासनहीनता। बसपा सरकार में रहे पूर्व कैबिनेट मंत्री अंटू मिश्रा से दैनिक भास्कर ने बातचीत की। उन्होंने कहा कि खुद नहीं पता कि कौन-सी अनुशासनहीनता की है। लेकिन सरकार में बहन जी ने जो मान-सम्मान और स्थान दिया, उसे नहीं भूल सकता। लेकिन अब पार्टी में बुलाने पर भी वापसी नहीं करूंगा। साल 2022 का विधानसभा चुनाव नहीं लड़ सका था। लेकिन 2027 में जरूर चुनाव लड़ूंगा। अटकलें तो कोई कुछ भी लगाए, लेकिन कौन-से राजनीतिक दल के साथ जाना है, यह मेरे सम्मानित कार्यकर्ता तय करेंगे, मैं नहीं। पढ़िए दैनिक भास्कर से यूपी सरकार के पूर्व मंत्री अंटू मिश्रा के इंटरव्यू की पूरी बातचीत, उनसे किए गए सवाल-जवाब में... सवाल- BSP में लंबे समय तक रहे, अचानक एक सोशल मीडिया पोस्ट और पार्टी से बाहर कर दिया गया, क्या कहेंगे आप? जवाब- 23 साल बीएसपी में रहा। जब मैंने पार्टी ज्वाइन की थी, तब बसपा सत्ता में नहीं थी। पार्टी तब संघर्ष कर रही थी। सामान्य कार्यकर्ता की तरह काम किया। जो भी दायित्व दिया गया, उसे निभाया। कानपुर मंडल में मुझे ब्राह्मण समाज को जोड़ने का काम दिया गया। उस समय जब पार्टी ने सोशल इंजीनियरिंग का नारा दिया था, उससे पहले ब्राह्मण समाज पार्टी में बड़ी संख्या में नहीं था। मुझे जो काम मिला, मैंने पूरा किया। ब्राह्मण समाज को जोड़ा। अगर मेहनत का आकलन करना हो तो कैसे किया जाए? केवल रिजल्ट देखकर तो उस समय मंडल में 32 सीटें थीं, तब उसमें से बीएसपी ने 28 सीटें जीती थीं। मैंने अपने काम को ईमानदारी से किया, लेकिन मुझे खुद नहीं पता कि आखिर अनुशासनहीनता कहाँ हुई। सवाल- लोग कहते हैं कि पार्टी में आप एक्टिव नहीं थे? जवाब- 2012 में सरकार नहीं रही, तब भी मैं बीएसपी के लिए काम करता रहा। बहन जी ने राजस्थान, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, उत्तराखंड और दिल्ली का प्रभारी बनाया। अगर काम नहीं कर रहा होता तो क्यों जिम्मेदारी दी जाती? लेकिन समय बीतता गया और बीएसपी की ताकत घटती गई। ऐसे कार्यकर्ता, जो सरकार के पहले से जुड़े थे, ऐसे कार्यकर्ता और पदाधिकारी या तो छोड़कर चले गए या निकाल दिए गए। लेकिन जो लोग गए, वे दूसरे दलों में जाकर विधायक हो गए। मेरी क्या अनुशासनहीनता थी, मुझे कुछ नहीं समझ आया। मैं तो दल में नहीं हूँ, लेकिन जो लोग पार्टी में हैं, उनको आत्मचिंतन की जरूरत है। इतने लोग अनुशासनहीनता पर निकाले गए, तो उनके जाने के बाद पार्टी का उद्धार हो जाना चाहिए था। पार्टी का वोट प्रतिशत गिरता रहा। जो भरोसा था, वह कम हुआ है। तभी तो वोट कम हुआ है। 2007 की सरकार में ब्राह्मण समाज का पार्टी पर भरोसा था, लेकिन लगातार ब्राह्मण समाज के नेताओं को या तो निकाल दिया गया या फिर उन्होंने छोड़ दिया। महत्वपूर्ण लोग पार्टी छोड़कर चले गए। जिन लोगों पर विश्वास करके बहन जी आकलन के आधार पर जो कुछ भी हो रहा है, वे लोग जमीनी हकीकत से बहन जी को परिचित नहीं करा रहे हैं। गलत फीडबैक दे रहे हैं। इसी लिए पार्टी से लोग अलविदा हो रहे हैं। सवाल- अब अगर बीएसपी में वापस जाने का मौका मिले तो क्या करेंगे? जवाब- विनम्रता से मना कर दूंगा। बीएसपी का एक फार्मूला और आइडियोलॉजी थी। अगर मुझे अपनी आइडियोलॉजी से काम करना हो, तो किसी भी दल में रहकर काम कर सकता हूँ। लेकिन बीएसपी में जो आज की वर्तमान व्यवस्था है, उससे सहमत नहीं हूँ। इसलिए बीएसपी में नहीं जाऊंगा। सवाल- अब आगे क्या? कौन-से दल में जाएंगे, बीजेपी या सपा? जवाब- कई भ्रामक प्रचार हुए कि मैं यहाँ जाऊंगा, वहाँ जाऊंगा। लेकिन मेरा मानना है, नेता हमें कौन बनाता है? कार्यकर्ता और जनता। मैं कार्यकर्ताओं से बात करने के बाद ही कोई फैसला लेने का काम करूंगा। सवाल- 2022 में चुनाव नहीं लड़े, 2027 का विधानसभा चुनाव लड़ेंगे आप? जवाब- 2027 में मैं जरूर कहीं न कहीं से चुनाव लड़ूंगा। मेरी इच्छा भी है कि चुनाव इस बार लड़ूं। सवाल- कानपुर से चुनाव लड़ेंगे या कहीं और से लड़ेंगे? जवाब- ये तो समय तय करेगा। जब मैं कानपुर से चुनाव लड़ा, तो मैं 300 वोट से हार गया। फिर मैं फर्रुखाबाद से चुनाव लड़ा और विधायक बन गया। लेकिन बीएसपी में एक नियम रहा कि जहाँ पर राजनीति नहीं करते, वहाँ के स्ट्रक्चर में इंटरफेयर न करें। इसलिए वहाँ मैं कार्यक्रम या निजी तौर पर तो जाता था। लोगों से मिलता था। लेकिन अब मैं फर्रुखाबाद जाऊंगा। ब्राह्मण समाज से मैं पूरे मंडल में जुड़ा हुआ रहा हूँ, अब सब जगह जाऊंगा।
📡 स्रोत: NewsData.io