पूर्व मंत्री के गांव में नदी रोकती बच्चों की पढ़ाई:बारिश में शिक्षक ट्यूब से नदी पार करते, बच्चों की पढ़ाई महीनों प्रभावित; सड़क-पुल मंजूर
भिंड से करीब 15-16 किलोमीटर दूर नदरौली गांव में स्कूल जाने के लिए शिक्षक और बच्चों को नदी पार करनी पड़ती है। बारिश में नदी का बहाव तेज होते ही इसे पैदल पार करना संभव नहीं रहता। ऐसे में ग्रामीणों को ट्यूब या मटके के सहारे नदी पार करनी पड़ती है। बारिश के दौरान स्थिति बिगड़ने पर गांव का संपर्क लगभग पूरी तरह टूट जाता है।
शिक्षक कई-कई घंटे नदी किनारे बैठकर पानी का बहाव कम होने का इंतजार करते हैं। कई बार 5-6 दिन तक स्कूल पहुंचना संभव नहीं हो पाता। वहीं आठवीं के बाद पढ़ने के लिए दूसरे गांव जाने वाले बच्चों की पढ़ाई बारिश के दौरान तीन से चार महीने तक प्रभावित होने की बात ग्रामीण बता रहे हैं। नदरौली गांव बबेडी पंचायत के अंतर्गत आता है।
गांव तक पहुंचने के लिए कोई प्रमुख पक्की सड़क नहीं है। पराये के पुरा से आगे करीब दो किलोमीटर तक खेतों की मेड़ और कच्चे रास्ते से होकर नदी तक पहुंचना पड़ता है। नदी के दूसरी तरफ नदरौली गांव है। खास बात यह है कि नदरौली पूर्व राज्य मंत्री डॉ. राजकुमार कुशवाह का पैतृक गांव है।
ग्रामीणों के मुताबिक गांव में पक्की सड़क और नदी पर पुल नहीं होने से बारिश में बच्चों की पढ़ाई के साथ पूरे गांव का आवागमन प्रभावित होता है। भास्कर टीम गांव पहुंची, रास्ते में नदी बनी सबसे बड़ी बाधा दैनिक भास्कर की टीम ने नदरौली गांव पहुंचने के रास्ते और नदी के हालात का जायजा लिया।
बबेडी पंचायत से होते हुए पराये के पड़ाव के आगे करीब दो किलोमीटर कच्चे रास्ते से नदी तक पहुंचना पड़ता है। नदी में पानी और तेज बहाव के कारण टीम ने भी ग्रामीणों की मदद से नदी पार करने की कोशिश की। हालांकि मौके पर मौजूद ग्रामीणों ने ट्यूब देने से इनकार कर दिया। उन्होंने बताया कि इस समय नदी पार करना जोखिम भरा है।
नदी के इस पार कुछ शिक्षक भी पेड़ों की छांव में बैठे मिले। वे स्कूल जाने के लिए नदी का बहाव कम होने का इंतजार कर रहे थे। शिक्षक बोले- रोज ट्यूब से पार करनी पड़ती है नदी शिक्षकों ने बताया कि बारिश के दिनों में स्कूल पहुंचना उनके लिए रोज की चुनौती है।
नदी का बहाव कम रहता है तो ग्रामीणों की मदद से ट्यूब पर बैठकर नदी पार करते हैं। पानी बढ़ने पर यह जोखिम और बढ़ जाता है। एक शिक्षक के मुताबिक, कई बार नदी का जलस्तर इतना बढ़ जाता है कि 5-6 दिन तक स्कूल पहुंचना संभव नहीं होता। यदि कोई ग्रामीण ट्यूब लेकर नदी के इस पार आ जाए और नदी पार करा दे, तभी वे स्कूल पहुंच पाते हैं।
कई बार ग्रामीण नहीं मिलते तो शिक्षक दो से तीन घंटे तक नदी किनारे बैठे रहते हैं। ई-अटेंडेंस से बढ़ी परेशानी शिक्षकों के मुताबिक स्कूलों में ई-अटेंडेंस लागू होने के बाद परेशानी और बढ़ गई है। स्कूल परिसर में मौजूद रहकर ही हाजिरी दर्ज करनी होती है।
लेकिन नदी का बहाव तेज होने पर शिक्षक जान जोखिम में डालकर नदी पार नहीं कर सकते। गांव में नेटवर्क की समस्या भी है। नदी पार करने में देरी और नेटवर्क नहीं मिलने के कारण कई बार समय पर ई-अटेंडेंस नहीं लग पाती।
शिक्षकों का कहना है कि इस समस्या की जानकारी जिला शिक्षा अधिकारी कार्यालय को दी जा चुकी है, लेकिन अभी तक स्थायी समाधान नहीं हुआ है। 900 से 1000 आबादी, बच्चों की पढ़ाई पर सीधा असर ग्रामीणों के मुताबिक नदरौली और आसपास के बबेडी-अकोड़ा क्षेत्र में करीब 200 मकान हैं और आबादी करीब 900 से 1000 के बीच है।
गांव में प्राथमिक और माध्यमिक स्कूल हैं। प्राथमिक स्कूल में करीब 40, जबकि माध्यमिक स्कूल में करीब 93 विद्यार्थी पढ़ते हैं। आठवीं के बाद करीब 50 से 60 छात्र-छात्राएं नौवीं से 12वीं तक की पढ़ाई के लिए बबेडी पंचायत की ओर जाते हैं। बारिश में नदी का पानी बढ़ने पर इन बच्चों का स्कूल जाना बंद हो जाता है।
ग्रामीणों का कहना है कि अभिभावक बच्चों को नदी पार कराने का जोखिम नहीं लेते। इसी वजह से कई बार बच्चों की पढ़ाई तीन से चार महीने तक प्रभावित होती है। ग्रामीण बोले- महिलाओं और जरूरी कामों के लिए भी निकलना मुश्किल गांव के रहने वाले श्रीलाल कुशवाहा ने कहा, "इसी गांव के रहने वाले पूर्व मंत्री राजकुमार कुशवाहा हैं।
वे सरकार में मंत्री रहे, तब भी गांव को पक्की सड़क नहीं दिलवा पाए। नदी में पानी बढ़ने पर पुल नहीं है। बच्चे स्कूल नहीं आ-जा सकते। महिलाएं निकल नहीं सकतीं। शिक्षक भी गांव में पढ़ाने नहीं जा पाते हैं। सभी परेशान होते हैं।" ग्रामीणों का कहना है कि समस्या केवल स्कूल आने-जाने की नहीं है।
बारिश में नदी बढ़ने के बाद गांव के लोगों के लिए जरूरी कामों से बाहर निकलना भी मुश्किल हो जाता है। देवेंद्र सिंह कुशवाह बोले- हाईस्कूल के बच्चों की पढ़ाई बंद रहती है सरकारी माध्यमिक विद्यालय के शिक्षक देवेंद्र सिंह कुशवाह ने बताया, "प्राइमरी स्कूल और मिडिल स्कूल गांव में है।
परंतु हाईस्कूल व हायर सेकंडरी के छात्रों की पढ़ाई चार महीने बंद रहती है। वहीं जब नदी का जलस्तर बढ़ता है तो हम लोगों को भी खासी परेशानी होती है। कई बार गांव के स्कूल में पढ़ने नहीं जा पाते हैं तो स्कूल बंद रहते हैं।
इससे सबसे ज्यादा बुरा असर शिक्षा पर भी पड़ रहा है।" एक अन्य शिक्षक ने बताया कि बारिश में समय पर स्कूल पहुंचना चाहें तो भी कई बार संभव नहीं होता। गांव का कोई व्यक्ति ट्यूब लेकर आता है और नदी पार करवाता है, तभी स्कूल पहुंच पाते हैं। ऐसे में शिक्षकों का स्कूल आना-जाना भी ग्रामीणों की मदद पर निर्भर हो जाता है।
सड़क-पुल के साथ बिजली की भी समस्या ग्रामीण सड़क और पुल के साथ बिजली की सुविधा को लेकर भी शिकायत करते हैं। उनका कहना है कि गांव में सरकारी स्तर पर बिजली की पर्याप्त सुविधा नहीं है। वे ट्यूबवेल पर रखे ट्रांसफॉर्मर के माध्यम से बिजली का उपयोग करते हैं।
ग्रामीणों का कहना है कि पक्की सड़क, नदी पर पुल और पर्याप्त बिजली जैसी मूलभूत सुविधाएं मिलने से गांव की सबसे बड़ी समस्याएं दूर हो सकती हैं। मंत्री रहे राजकुमार कुशवाहा का यह पैतृक गांव नदरौली को पूर्व में राज्य मंत्री का दर्जा प्राप्त रहे डॉ. राजकुमार कुशवाहा का पैतृक गांव बताया जाता है।
मध्यप्रदेश में शिवराज सिंह चौहान के शासनकाल में डॉ. राजकुमार कुशवाहा को पाठ्यपुस्तक निगम का उपाध्यक्ष बनाया गया था और उन्हें राज्य मंत्री का दर्जा प्राप्त था। ग्रामीणों को उम्मीद थी कि गांव के ही व्यक्ति को सरकार में मंत्री पद का दर्जा मिलने के बाद सड़क और पुल की समस्या दूर होगी।
लेकिन ग्रामीणों के मुताबिक आज भी स्थिति में अपेक्षित बदलाव नहीं हुआ। गांव तक पहुंचने के लिए पगडंडी और खेतों की मेड़ का सहारा लेना पड़ता है। बारिश में नदी रास्ता रोक देती है और गांव का संपर्क लगभग कट जाता है।
ग्रामीणों की मांग- नदी पर पुल बने, गांव को पक्की सड़क से जोड़ा जाए ग्रामीणों की मांग है कि नदरौली को पक्की सड़क से जोड़ा जाए और नदी पर स्थायी पुल बनाया जाए। उनका कहना है कि पुल बनने के बाद बच्चों का स्कूल जाना, शिक्षकों की उपस्थिति और ग्रामीणों का आवागमन आसान हो सकेगा।
फिलहाल बारिश आते ही नदरौली के सामने वही सवाल खड़ा हो जाता है—स्कूल जाना हो या गांव से बाहर निकलना, नदी पार करने के लिए ट्यूब का सहारा आखिर कब तक लेना पड़ेगा? डॉ.
कुशवाह बोले- गांव के लिए पुल और सड़क स्वीकृत जब इस मामले में दैनिक भास्कर ने पूर्व राज्य मंत्री (बीज निगम के पूर्व उपाध्यक्ष) डॉ राजकुमार कुशवाहा से बातचीत की गई तो उन्होंने बताया कि पूर्व में नदरौली गांव से बबेड़ी वायपास के लिए सड़क निर्माण कराए जाने के लिए शासन ने स्वीकृत मार्ग किया है।
करीब चार से पांच किलोमीटर लंबी सड़क बनेगी साथ बैसली नदी पर पुल भी बनेगा इसके लिए पर 12 करोड़ से अधिक खर्च होगा। कुछ तकनीकी परेशानियां आ रही है। इस संदर्भ विधायक से बातचीत भी हुई थी। उन्होंने समाधान निकाला लिया है। बारिश के बाद काम शुरू होने की उम्मीद है।
📡 स्रोत: NewsData.io