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पूर्व सैनिक को कर्नाटक डिप्टी सीएम से मिलने से रोका:आत्महत्या की कोशिश; दावा- सरकार ने 24 साल तक जमीन मिलने का वादा पूरा नहीं किया

लेखक: JKS News Desk अंतिम अपडेट: 2 सितंबर 2026
प्रकाशक: वॉयस ऑफ क्रांति
पूर्व सैनिक को कर्नाटक डिप्टी सीएम से मिलने से रोका:आत्महत्या की कोशिश; दावा- सरकार ने 24 साल तक जमीन मिलने का वादा पूरा नहीं किया

कर्नाटक में कारगिल युद्ध में शामिल रहे पूर्व सैनिक शिवानंद रेड्डी ने 29 अगस्त को आत्महत्या की कोशिश की। वह 24 साल से लंबित जमीन आवंटन के मामले में डिप्टी सीएम जी. परमेश्वर से मिलने बेंगलुरु पहुंचे थे। रेड्डी का आरोप है कि सरकार ने उन्हें जमीन देने का वादा किया था, लेकिन अब तक मामला आगे नहीं बढ़ा।

वह इस बारे में डिप्टी सीएम से मदद मांगना चाहते थे। हालांकि, पुलिस ने उन्हें मिलने से रोक दिया। इसके बाद उन्होंने आत्महत्या की कोशिश की। फिलहाल रेड्डी का एक निजी अस्पताल में इलाज चल रहा है। घटना पर पुलिस और संबंधित अधिकारियों की अभी तक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।

शिवानंद ने आत्महत्या की कोशिश की, इलाज जारी; तस्वीरें… पूर्व सैनिक से रिश्वत मांगने का आरोप रेड्डी के मुताबिक, जमीन के लिए लंबे समय से इंतजार करने के बाद 2022 में राजस्व विभाग के अधिकारियों ने उनसे काम आगे बढ़ाने के लिए 10 लाख रुपए रिश्वत मांगी।उन्होंने इसकी शिकायत लोकायुक्त से की।

इसके बाद लोकायुक्त ने कार्रवाई करते हुए 3 लोगों को गिरफ्तार किया। इनमें दो सरकारी कर्मचारी थे। रेड्डी का आरोप है कि इस कार्रवाई के बाद अधिकारियों ने उनका मामला और लटका दिया। उन्होंने कई बार शिकायत और आवेदन दिए, लेकिन उनकी समस्या का समाधान नहीं हुआ।

कारगिल युद्ध में घायल हुए थे रेड्डी शिवानंद रेड्डी भारतीय सेना की मराठा लाइट इन्फैंट्री में नायक (NK) के पद पर रहे हैं। उन्होंने 17 साल सेना में सेवा की। 1999 के कारगिल युद्ध के दौरान रात में गश्त के दौरान उनके पैरों में गंभीर चोटें आईं।

इसके बाद उन्हें स्थायी रूप से दिव्यांग घोषित कर 2000 में मेडिकल आधार पर सेना से रिटायर कर दिया गया। सरकारी नियमों के तहत रिटायर्ड और दिव्यांग पूर्व सैनिकों के पुनर्वास के लिए जमीन देने का प्रावधान है। रेड्डी भी इसी आधार पर जमीन आवंटन की मांग कर रहे थे।

लेकिन 24 साल बीतने के बाद भी उन्हें जमीन नहीं मिली। --------------------------------------- ये खबर भी पढ़ें… कर्नाटक के सीएम बोले- सीता का चरित्र राम से बड़ा:कहा- महिलाएं संसद तक नेतृत्व संभालें, सरकार पूरा साथ देगी कर्नाटक के सीएम डीके शिवकुमार ने बुधवार को कहा कि रामायण में सीता का चरित्र भगवान राम से कहीं बड़ा है।

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📡 स्रोत: Dainik Bhaskar

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💡 पृष्ठभूमि (Background)

यह खबर कर्नाटक के पूर्व सैनिक शिवानंद रेड्डी के बारे में है, जिन्हें 24 साल से लंबित जमीन आवंटन के वादे के बावजूद सरकार द्वारा सहायता नहीं मिली। उन्होंने 29 अगस्त को आत्महत्या की कोशिश की और डिप्टी सीएम से मिलने की योजना बनाई, पर पुलिस ने उन्हें रोका। यह घटना सैन्य वयोवृद्धों के अधिकारों और सरकारी वादों के प्रति जनता की असंतुष्टि को उजागर करती है। यदि इस मुद्दे पर उचित समाधान नहीं मिलता, तो वयोवृद्धों में निराशा बढ़ सकती है, जिससे सामाजिक अस्थिरता और सरकार के प्रति विश्वासघात की भावना बढ़ सकती ह

🎙️ वॉयस ऑफ क्रांति का मत

पूर्व सैनिक की पीड़ा से यह स्पष्ट होता है कि वादा तोड़ने से मनोवैज्ञानिक संकट बढ़ता है। सरकार की जवाबदेही और पारदर्शी प्रक्रियाएँ ज़रूरी हैं। यदि वादे निभाने में देरी हो, तो नागरिक कानूनी मार्ग, सार्वजनिक सुनवाई या मीडिया के माध्यम से दबाव बना सकते हैं। समाज को सहानुभूति और समर्थन के साथ नीतिगत सुधार की मांग करनी चाहिए, ताकि भविष्य में किसी को भी इस तरह का संघर्ष न सहना पड़े।

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