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प्यारा सजा है दरबार भवानी... मंदिर के बाहर तिरंगी आभा, भीतर सोने की आंगी

लेखक: JKS News Desk अंतिम अपडेट: 11 अक्टूबर 2026
प्रकाशक: वॉयस ऑफ क्रांति
प्यारा सजा है दरबार भवानी... मंदिर के बाहर तिरंगी आभा, भीतर सोने की आंगी

कस्बे में स्थित चौथ माता मंदिर में नवरात्रि के अवसर पर चौथ माता के सोने का चोला चढ़ाया गया है। इसके साथ ही माता मंदिर में भक्तों के आने का सिलसिला शुरू हो गया है। पहाड़ की चोटी पर माता के विराजमान होने के कारण यहां जाने के लिए 750 सीढ़ियां चढ़नी पड़ती है। हर सीढ़ी पर दान देने वाले हर भक्त का नाम-पता आज भी मौजूद है।

मंदिर में स्थापित चौथ माता की प्रतिमा साक्षात देवी के रूप में बरवाड़ा के राजा को स्वप्न के दौरान प्रकट हुई थी। माता के भक्तों के लिए चौथ माता सेवा समिति की ओर से भंडारे का आयोजन भी किया जा रहा है। नवरात्रि के अवसर पर हर साल चौथ माता मंदिर में बड़ी संख्या में भक्त माता के दर्शन के लिए आते हैं।

सन 1451 ईस्वी में महाराजा भीम सिंह ने प्रतिमा को पहाड़ की चोटी पर माघ माह की चतुर्थी पर स्थापित करवाया। इसके बाद से बरवाड़ा का नाम चौथ का बरवाड़ा के नाम से जाना जाता है। चौथ माता ट्रस्ट के मैनेजर राम अवतार गुर्जर ने बताया कि मंदिर स्थापना के साथ ही मंदिर में देसी घी की अखंड ज्योति जल रही है।

शुरू में चौथ माता का मंदिर काफी छोटा था। सन 1997 में चौथ माता ट्रस्ट की स्थापना की गई। इसके बाद इस मंदिर में विकास का कार्य तेज हुआ। मंदिर की ऊंचाई ज्यादा होने के कारण मंदिर पहुंचने तक 750 सीिढ़यों का निर्माण हुआ। सीढ़ी निर्माण के लिए पत्थर एवं अन्य सामान देने वाले हर भक्त का नाम आज भी चौथ माता मंदिर की सीिढ़यों पर गुदा हुआ है।

चौथ माता मंदिर की सबसे खास बात यह है कि माता के बगल में गणेश जी विराजमान है। जिसके चलते इसे चौथ गणेश का मंदिर भी कहा जाता है। पूरे देश में चोथ गणेश का यही एकमात्र मंदिर है। जिसके चलते पूरे देश के कोने-कोने से भक्त यहां चौथ माता के साथ-साथ गणेश जी के दर्शन के लिए भी आते हैं। बूंदी राजघराने में चौथ माता को कुलदेवी के रूप में पूजा जाता है।

जिसके चलते हाडोती क्षेत्र के कोटा, बांरा, बूंदी तथा झालावाड़ से हर विवाहित जोड़ा अपने परिवार की सफलता के लिए चौथ माता मंदिर जरूर आता है। मंदिर परिसर में ही बाबा भैरव का भी स्थान है। जहां पर भी बड़ी संख्या में भक्त पहुंचकर अपनी मनोकामना पूरी होने के लिए अरदास करते हैं।

📡 स्रोत: NewsData.io

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