राज्य

राधा-कृष्ण और शनिदेव की मूर्तियों की हुई प्राण प्रतिष्ठा:हाथरस में धार्मिक कार्यक्रम के साथ RCC सड़क और दो हाईमास्ट सोलर लाइटों का लोकार्पण

लेखक: JKS News Desk अंतिम अपडेट: 4 सितंबर 2026
प्रकाशक: वॉयस ऑफ क्रांति
राधा-कृष्ण और शनिदेव की मूर्तियों की हुई प्राण प्रतिष्ठा:हाथरस में धार्मिक कार्यक्रम के साथ RCC सड़क और दो हाईमास्ट सोलर लाइटों का लोकार्पण

हाथरस के जलेसर रोड स्थित ग्राम नगला अहीर, पंचायत बरवाना के प्राचीन शिव मंदिर और एकता स्थल पर गुरुवार दोपहर करीब 2 बजे धार्मिक और विकास से जुड़ा कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम में राधा-कृष्ण और शनिदेव महाराज की मूर्तियों की प्राण प्रतिष्ठा की गई।

कार्यक्रम में उत्तर प्रदेश सरकार के समाज कल्याण मंत्री असीम अरुण, हाथरस सांसद अनूप प्रधान वाल्मीकि, विधायक वीरेंद्र सिंह राणा, विधायक अंजुला सिंह माहौर और उत्तर प्रदेश राज्य महिला आयोग की उपाध्यक्ष अपर्णा यादव समेत कई जनप्रतिनिधि शामिल हुए। इस दौरान 225 मीटर आरसीसी सड़क और दो हाईमास्ट सोलर लाइटों का लोकार्पण किया गया।

मंदिर के सौंदर्यीकरण और सामुदायिक भवन के निर्माण कार्य का भी निरीक्षण किया गया। जनसभा में हाईस्कूल और इंटरमीडिएट में बेहतर प्रदर्शन करने वाले मेधावी छात्रों को सम्मानित किया गया।

POCSO और दुष्कर्म मामले में आरोपी की जल्द गिरफ्तारी का भरोसा कार्यक्रम के दौरान पत्रकारों ने राज्य महिला आयोग की उपाध्यक्ष अपर्णा बिष्ट यादव से POCSO और दुष्कर्म के एक मामले में आरोपी की गिरफ्तारी न होने को लेकर सवाल किया। उन्होंने कहा कि मामला अब उनके संज्ञान में आया है। आरोपी को जल्द गिरफ्तार कर जेल भेजा जाएगा।

पत्रकारों ने एक मृत युवती की मां के कलेक्ट्रेट पहुंचने और न्याय की मांग को लेकर अपने साथ पेट्रोल ले जाने के मामले में भी सवाल किए। महिला आयोग की उपाध्यक्ष ने पीड़ित परिवार को न्याय दिलाने का भरोसा दिया।

अहेरिया समाज को एससी में शामिल करने का अध्ययन अंतिम चरण में समाज कल्याण मंत्री असीम अरुण ने एससी और एसटी की जाति श्रेणियों में बदलाव को लेकर कहा कि इसका अधिकार संसद के पास है। उन्होंने बताया कि अहेरिया समाज को एससी श्रेणी में शामिल करने के लिए अध्ययन अंतिम चरण में है।

उन्होंने कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि एससी/एसटी सूची में किसी भी बदलाव का आधार तथ्य, आंकड़े और सबूत होने चाहिए। जब तक जनसंख्या के आंकड़े उपलब्ध नहीं होंगे, तब तक यह तय करना मुश्किल है कि किसी जाति का प्रतिनिधित्व सही है या नहीं। इसके लिए जातिगत जनगणना जरूरी थी।

📡 स्रोत: NewsData.io

📰 पूरी खबर पढ़ें (NewsData.io पर जाएं)
J
JKS News Desk

वॉयस ऑफ क्रांति की संपादकीय टीम आपके लिए भोपाल, मध्यप्रदेश और देश की सटीक और विश्वसनीय समाचार प्रस्तुत करती है।