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रग्बी से लेकर पारा-स्पोर्ट्स तक देश-दुनिया में डंका बजा:मेडल लाओ, नौकरी पाओ योजना से, 180 से ज्यादा खिलाड़ियों को मिली सरकारी नौकरी

लेखक: JKS News Desk अंतिम अपडेट: 31 अगस्त 2026
प्रकाशक: वॉयस ऑफ क्रांति
रग्बी से लेकर पारा-स्पोर्ट्स तक देश-दुनिया में डंका बजा:मेडल लाओ, नौकरी पाओ योजना से, 180 से ज्यादा खिलाड़ियों को मिली सरकारी नौकरी

पढ़ोगे-लिखोगे तो बनोगे नवाब, खेलोगे-कूदोगे तो होगे खराब, अब बिहार में स्थिति इस कहावत के उलट है। गांवों की मिट्टी के अखाड़ों से लेकर राजगीर के आधुनिक अंतरराष्ट्रीय एस्ट्रोटर्फ तक, बिहार के खिलाड़ी आज देश-दुनिया में अपनी चमक बिखेर रहे हैं।

राज्य का खेल तंत्र अब सिस्टमेटिक प्लानिंग, विश्वस्तरीय इंफ्रास्ट्रक्चर और वैज्ञानिक प्रशिक्षण के दम पर नई इबारत लिख रहा है। राज्य सरकार की मेडल लाओ, नौकरी पाओ नीति ने न सिर्फ युवाओं से भविष्य की चिंता छीनी है, बल्कि 180 से अधिक पदक विजेताओं को क्लास वन ऑफिसर और सब-इंस्पेक्टर बनाकर मजबूत खेल संस्कृति की नींव रख दी है।

मैदानों का हो रहा ऑडिट खिलाड़ियों को अब उच्चस्तरीय प्रशिक्षण के लिए दिल्ली, पटियाला या बेंगलुरु जाने की मजबूरी धीरे-धीरे समाप्त हो रही है। पंचायत स्तर तक खेल सुविधाएं पहुंचाई जा रही हैं।

हालांकि, पंचायतों में मनरेगा योजना से बने कई मैदान तय गुणवत्ता मानकों पर खरे नहीं उतरे थे, जिसके समाधान के लिए खेल विभाग ने विशेषज्ञों की विशेष टीम गठित की है। यह टीम पूरे राज्य में मैदानों का सर्वे कर रही है, ताकि जरूरत के अनुसार उन्हें अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप दुरुस्त किया जा सके।

रग्बी, पारा-स्पोर्ट्स और क्रिकेट में दबदबा रग्बी में स्वर्णिम सफर : सब-जूनियर से लेकर सीनियर वर्ग तक बिहार की बेटियों ने नेशनल रग्बी में लगातार गोल्ड और सिल्वर जीतकर पूरे देश में दबदबा कायम किया है।

पारा-एथलीटों का परचम : शरद कुमार (पारा हाई जंप) और प्रमोद भगत (पारा बैडमिंटन) के बाद कॉमनवेल्थ गेम्स में सोमन राणा और झंडू कुमार ने साबित कर दिया कि हौसले किसी कमी के मोहताज नहीं होते। उभरते नए सितारे : क्रिकेट में वैभव सूर्यवंशी और अनुकूल रॉय राष्ट्रीय फलक पर चमक रहे हैं।

वहीं खेलो इंडिया और नेशनल गेम्स में वुशु, फेंसिंग, साइकिलिंग और हर्डल्स में भी बिहारी युवाओं ने पदकों की झड़ी लगाई है। हमारा स्पष्ट संकल्प है कि बिहार के प्रतिभावान खिलाड़ी संसाधनों या आर्थिक तंगी के कारण पीछे न छूटें।

राजगीर खेल अकादमी से लेकर पंचायत स्तर तक विकसित हो रहे ढांचे के दम पर हम ओलिंपिक और एशियन गेम्स को लक्ष्य बनाकर काम कर रहे हैं। मेडल लाओ, नौकरी पाओ योजना ने युवाओं के मन से कॅरियर की असुरक्षा खत्म की है। - श्रेयसी सिंह, खेल मंत्री ग्रासरूट टैलेंट हंट से लेकर हाई-परफॉर्मेंस ट्रेनिंग का पूरा रोडमैप तैयार है।

राजगीर में स्पोर्ट्स साइंस सेंटर, बायो-मैकेनिक्स लैब और मॉडर्न डाइट मैनेजमेंट के जरिए खिलाड़ियों को इंटरनेशनल मानकों पर तैयार किया जा रहा है। - रवींद्रण शंकरण, महानिदेशक, बिहार राज्य खेल प्राधिकरण सही एक्सपोजर जरूरी बिहार के युवा क्रिकेट, फुटबॉल, हॉकी, एथलेटिक्स, कबड्डी, कुश्ती और बैडमिंटन जैसे तमाम खेलों में अपनी क्षमता साबित कर रहे हैं।

बिहार के सामने असल चुनौती प्रतिभा की कमी नहीं, बल्कि सही उम्र में पहचान कर उसे राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्ररीय स्तर तक ले जाने वाले तंत्र की थी। आधुनिक स्टेडियम, एस्ट्रोटर्फ और प्रशिक्षण केंद्रों के विस्तार से उम्मीदें बढ़ी हैं।

जरूरत इस बात की है कि खिलाड़ियों को जमीनी स्तर पर निरंतर प्रतिस्पर्धी माहौल और उचित एक्सपोजर मिलता रहे। योगेश कुमार (हॉकी खिलाड़ी वकोच)

📡 स्रोत: NewsData.io

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