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राहुल बोले- शिक्षा व्यवस्था से भारतीय युवा निराश:इंदौर में छात्रों की गूंज से 8 दिन पहले सुझाव मांगे; अब तक 4 कार्यक्रम किए

लेखक: JKS News Desk अंतिम अपडेट: 17 सितंबर 2026 👁️ 1 बार पढ़ा गया
प्रकाशक: वॉयस ऑफ क्रांति
राहुल बोले- शिक्षा व्यवस्था से भारतीय युवा निराश:इंदौर में छात्रों की गूंज से 8 दिन पहले सुझाव मांगे; अब तक 4 कार्यक्रम किए

राहुल गांधी ने शुक्रवार को कहा कि भारत की शिक्षा व्यवस्था पीढ़ी को निराश कर रही है, जिसे बेहतर भविष्य देने के लिए बनाया गया था। उन्होंने छात्रों, अभिभावकों और शिक्षकों से पूछा कि उनका शिक्षा व्यवस्था से भरोसा क्यों उठ गया है। उन्होंने आगे कहा कि शिक्षा व्यवस्था में सुधार की शुरुआत उन लोगों की बात सुनने से होगी, जो रोजाना इसकी कमियों का सामना कर रहे हैं।

राहुल ने छात्रों, अभिभावकों और शिक्षकों से अपने अनुभव, सबूत और सुझाव ऑनलाइन साझा करने को कहा। राहुल ने यह बात छात्रों की गूंज के 8 दिन पहले की है। इसका आयोजन 19 सितंबर को मध्य प्रदेश के इंदौर में होगा। अब तक तक कोटा, देहरादून, प्रयागराज और पुणे में 4 कार्यक्रम कर चुके हैं। इंदौर में कार्यक्रम की अनुमति अब तक नहीं मिली इंदौर में कार्यक्रम को लेकर कांग्रेस और प्रशासन के बीच अनुमति का मुद्दा बना हुआ है।

कांग्रेस पिछले 11 दिन से अनुमति के लिए प्रयास कर रही है। इसके लिए कलेक्टर, नगर निगम, पुलिस और इंदौर विकास प्राधिकरण के स्तर पर आवेदन और प्रक्रिया चल रही है। कांग्रेस का कहना है कि अनुमति मिले या नहीं, कार्यक्रम होकर रहेगा। वहीं प्रशासन का कहना है कि अनुमति निर्धारित वैधानिक प्रक्रिया और सुरक्षा व्यवस्था के आधार पर दी जाएगी।

22 अगस्त: राहुल बोले- महिलाओं के खिलाफ 3 तरह से हिंसा राहुल गांधी ने पुणे में ‘छात्रों की गूंज’ कार्यक्रम में महिलाओं की आजादी और पितृसत्ता के मुद्दे पर एक घंटा 16 मिनट बात की थी। राहुल ने कहा था कि महिलाओं के खिलाफ 3 तरह से हिंसा होती है। पहली- पैदा होते ही हत्या, दूसरी- शारीरिक अत्याचार, तीसरी- आर्थिक बंदिशें।

उन्होंने कहा कि महिलाओं को शिक्षा, नौकरी, संपत्ति और अपने फैसले लेने की पूरी आजादी मिलनी चाहिए। पूरी खबर पढ़ें… 8 अगस्त: राहुल बोले- रील 21वीं सदी का नशा है राहुल ने प्रयागराज में छात्रों की गूंज कार्यक्रम में 47 मिनट बात की थी। उन्होंने कहा, 'सिस्टम ने युवाओं को चक्रव्यूह में फंसा दिया है।

इनसे कहा जाता है कि आपको जितनी रील बनाना है, बनाओ। मजदूरी करो। 21वीं सदी का नशा लो, लेकिन नौकरी नहीं मिल सकती है।' उन्होंने कहा, ‘परिवारों से लाखों करोड़ रुपए लिए जाते हैं और बदले में BA-MA की डिग्री मिलती है, लेकिन यह सर्टिफिकेट रोजगार की गारंटी नहीं देता। आज हजार में से सिर्फ 12 युवाओं को परमानेंट नौकरी म

📡 स्रोत: Dainik Bhaskar

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