राजनीति

राहुल गांधी 13 दिन में दूसरी बार आएंगे MP:1 अक्टूबर को बालाघाट जाएंगे; कहा था- 30+ बच्चों की मौत, सरकार सोती रही

लेखक: JKS News Desk अंतिम अपडेट: 29 सितंबर 2026
प्रकाशक: वॉयस ऑफ क्रांति
राहुल गांधी 13 दिन में दूसरी बार आएंगे MP:1 अक्टूबर को बालाघाट जाएंगे; कहा था- 30+ बच्चों की मौत, सरकार सोती रही

मध्यप्रदेश के बालाघाट में बैगा आदिवासी बच्चों की मौतों के बीच राहुल गांधी 1 अक्टूबर को बालाघाट आएंगे। वे बैहर और बिरसा के प्रभावित आदिवासी इलाकों में जाकर मृत बच्चों के परिवारों से मुलाकात करेंगे। बालाघाट में सरकारी आंकड़ों के मुताबिक 32 बच्चों की मौत हो चुकी है। राहुल गांधी का 13 दिन में मध्यप्रदेश में यह दूसरा दौरा होगा।

इससे पहले वे 19 सितंबर को इंदौर आए थे। यहां उन्होंने ‘छात्रों की गूंज’ कार्यक्रम में हिस्सा लिया था। कार्यक्रम से पहले उन्होंने लिखा था- 30 से ज्यादा आदिवासी बच्चों की बीमारी, कुपोषण मौतें हो रही हैं, लेकिन कार्रवाई सुस्त रही। सरकार सोती रही। राहुल गांधी ने कहा था- मुख्यमंत्री जी, दीये जलाने और उत्सव मनाने से फुर्सत मिल गई हो तो जरा राज्य की जमीनी हालत भी देखिए।

बीमारी, पोषण और साफ पानी की कमी है। चरमराती स्वास्थ्य व्यवस्था के कारण छोटे बच्चों की जान जा रही है। मृत बच्चों के परिवारों से मिलेंगे राहुल नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने कहा- राहुल गांधी मृत बच्चों के परिवारों से मिलकर जमीनी हालात समझेंगे। उनसे जानेंगे कि सरकारी योजनाओं का लाभ आदिवासी परिवारों तक क्यों नहीं पहुंचा।

बच्चों को पोषण, दलिया, मच्छरदानी और टीकाकरण जैसी जरूरी सुविधाएं नहीं मिल पाईं। वहीं, मृत बच्चों के परिवारों को आर्थिक मदद देने पर सिंघार ने कहा कि सिर्फ सहायता देना काफी नहीं है। सरकार की जिम्मेदारी है कि उसकी योजनाएं हर जरूरतमंद तक पहुंचें। स्वास्थ्य मंत्री की जिम्मेदारी तय नहीं की गई।

मुख्यमंत्री मोहन यादव ने चुप्पी साध ली। जून में शुरू हुईं बच्चों की मौतें, पहली मौत 16 जून को बालाघाट के बिरसा विकासखंड के बैगा आदिवासी बहुल इलाकों में बच्चों की मौत का सिलसिला जून 2026 से सामने आया। उपलब्ध जमीनी रिपोर्ट के मुताबिक पहली दर्ज मौत 16 जून 2026 को बोंदारी गांव में 16 वर्षीय रूपलाल धुर्वे की हुई थी।

इसके बाद 26 जून को कोहनीमोड़टोला की 14 वर्षीय लमनिन धुर्वे और 27 जून को साहिल धुर्वे की मौत हुई। इसके बाद बोंदारी, कुंडेकसा, कोरका और आसपास के गांवों में बच्चों की मौतों का सिलसिला बढ़ता गया। मौतों का खुलासा कैसे हुआ?

मामला शुरुआत में स्थानीय स्तर तक सीमित रहा। प्रभावित गांवों में लगातार बच्चों की मौत के बावजूद इसकी व्यापक जानकारी बाद में सामने आई। अगस्त में स्थानीय ग्रामीणों, जनप्रतिनिध

📡 स्रोत: Dainik Bhaskar

📰 पूरी खबर पढ़ें (Dainik Bhaskar पर जाएं)
J
JKS News Desk

वॉयस ऑफ क्रांति की संपादकीय टीम आपके लिए भोपाल, मध्यप्रदेश और देश की सटीक और विश्वसनीय समाचार प्रस्तुत करती है।