राहुल गांधी और डीके शिवकुमार के वीडियो पर बवाल, BJP ने बताया कर्नाटक का अपमान
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दिल्ली में सोमवार को विपक्ष के प्रदर्शन के दौरान राहुल गांधी के आसपास जुटी भीड़ के बीच धक्का-मुक्की का एक वीडियो सामने आया है. इसके बाद भाजपा ने कांग्रेस को घेरना शुरू कर दिया है.
वीडियो में लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी कुछ लोगों के बीच से आगे बढ़ते दिखाई दे रहे हैं. इस दौरान कर्नाटक के मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार भी उनके पास नजर आते हैं.
भाजपा नेताओं ने वीडियो साझा कर राहुल गांधी पर अहंकार दिखाने का आरोप लगाया और इसे कर्नाटक के मुख्यमंत्री का अपमान बताया.
वहीं, शिवकुमार ने कहा कि महज 10 सेकंड का वीडियो पूरी स्थिति को नहीं दिखाता.
उन्होंने विपक्ष के असल मुद्दे को मतदाता सूची में कथित गड़बड़ियों और वोट चोरी के आरोपों से जुड़ा बताया.
डीके शिवकुमार बोले- पूरा संदर्भ समझना जरूरी
कर्नाटक के मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार ने सोशल मीडिया मंच एक्स पर सफाई देते हुए कहा कि राहुल गांधी ने उनकी सुरक्षा की चिंता करते हुए उन्हें वाहन में लौटने और सतर्क रहने की सलाह दी थी.
शिवकुमार के मुताबिक, दोनों के बीच भरोसे, स्नेह और पारिवारिक रिश्ते जैसा जुड़ाव है.
उन्होंने अपनी पोस्ट में लिखा कि 10 सेकंड का वीडियो पूरी कहानी नहीं बता सकता.
शिवकुमार ने कहा कि लोगों को असल मुद्दे से ध्यान नहीं हटाना चाहिए. उन्होंने लिखा, हमारी लड़ाई लोकतंत्र के लिए है, ध्यान भटकाने के लिए नहीं.
उनका इशारा मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर विपक्ष के प्रदर्शन की ओर था.
विपक्ष विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) के तहत मतदाता सूचियों में कथित गड़बड़ियों का आरोप लगाते हुए चुनाव आयोग पर सवाल उठा रहा है.
असम सीएम ने कांग्रेस पर साधा निशाना
वीडियो साझा करने वाले शुरुआती भाजपा नेताओं में असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा भी शामिल रहे. सरमा पहले कांग्रेस में थे और बाद में भाजपा में शामिल हो गए थे.
उन्होंने एक्स पर लिखा, 2015 में मैंने एक स्वाभिमानी असमिया होने के नाते अपमान
📡 स्रोत: ABP Live
💡 पृष्ठभूमि (Background)
राहुल गांधी और डीके शिवकुमार के वीडियो पर बवाल के पीछे राजनीतिक संघर्ष की कहानी है। दिल्ली में विपक्षी प्रदर्शन के दौरान राहुल गांधी के चारों ओर धक्का-मुक्की का दृश्य दिखाया गया, जिसके बाद भाजपा ने इस घटना को अपनी राजनीतिक रणनीति में इस्तेमाल किया। यह खबर महत्वपूर्ण है क्योंकि यह दिखाती है कि कैसे राजनीतिक नेता विरोधियों के खिलाफ वीडियो का उपयोग करके जनमत को प्रभावित कर रहे हैं। जनता पर इसका असर यह हो सकता है कि लोगों में राजनीतिक ध्रुवीकरण बढ़े, और चुनावी माहौल में असमानता तथा अविश्वास पैदा हो।