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राहुल गांधी मानहानि केस में आज फिर बहस:21 सितंबर को अधूरी रह गई थी दलील, अमित शाह पर 2018 में आपत्तिजनक टिप्पणी का मामला

लेखक: JKS News Desk अंतिम अपडेट: 29 सितंबर 2026
प्रकाशक: वॉयस ऑफ क्रांति
राहुल गांधी मानहानि केस में आज फिर बहस:21 सितंबर को अधूरी रह गई थी दलील, अमित शाह पर 2018 में आपत्तिजनक टिप्पणी का मामला

सुल्तानपुर में कांग्रेस नेता और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी के खिलाफ चल रहे मानहानि के मामले में मंगलवार को सुल्तानपुर की एमपी-एमएलए विशेष अदालत में दोबारा बहस होगी। 21 सितंबर को परिवादी भाजपा नेता विजय मिश्र के अधिवक्ता संतोष कुमार पांडेय ने अंतिम बहस शुरू की थी, लेकिन दलीलें पूरी नहीं हो सकीं।

अदालत ने शेष बहस के लिए 29 सितंबर की तारीख तय की है। राहुल गांधी के अधिवक्ता काशी प्रसाद शुक्ल ने बताया कि परिवादी पक्ष की बहस पूरी होने के बाद बचाव पक्ष की ओर से दलीलें रखी जाएंगी। 2018 की टिप्पणी से जुड़ा है मामला यह मामला साल 2018 में कर्नाटक विधानसभा चुनाव के दौरान बेंगलुरु में राहुल गांधी की ओर से गृहमंत्री अमित शाह के खिलाफ आपत्तिजनक टिप्पणी से जुड़ा है।

भाजपा नेता और जिला सहकारी बैंक के पूर्व चेयरमैन विजय मिश्र ने 4 अगस्त 2018 को सुल्तानपुर की एमपी-एमएलए कोर्ट में राहुल गांधी के खिलाफ मानहानि का परिवाद दायर किया था। कोर्ट ने 27 नवंबर 2023 को राहुल गांधी को तलब किया था। इसके बाद राहुल गांधी 20 फरवरी 2024 को अदालत में पेश हुए और जमानत कराई।

इसके लिए 25-25 हजार रुपए के दो जमानतदार लगाए गए थे। शाह के खिलाफ राहुल का पूरा बयान, जिस पर मानहानि का मुकदमा दायर भाजपा नेता विजय मिश्रा के वकील संतोष पांडे, जिन्होंने मुकदमा दायर किया था, ने कहा - 8 मई, 2018 को कर्नाटक चुनाव के दौरान राहुल गांधी ने बेंगलुरु में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस की थी।

इसमें उन्होंने कहा था, "अमित शाह पर हत्या का आरोप है।" खुद सुप्रीम कोर्ट ने लोया मामले में इसका जिक्र किया था। इसलिए मुझे नहीं लगता कि अमित शाह की कोई विश्वसनीयता है। ईमानदारी और सत्यनिष्ठा की बात करने वाली पार्टी के अध्यक्ष पर हत्या का आरोप लगा है। गौरतलब है कि विशेष न्यायालय के न्यायाधीश बृजमोहन हरकिशन लोया का निधन दिसंबर 2014 में नागपुर में हुआ था।

उस समय वे अपने सहकर्मी की बेटी की शादी में शामिल होने गए थे। न्यायाधीश लोया गुजरात के चर्चित सोहराबुद्दीन शेख मुठभेड़ मामले की सुनवाई कर रहे थे। अमित शाह इस मामले में आरोपी थे। हालांकि, लोया के बेटे ने अपने पिता की मौत को स्वाभाविक बताया था। सुप्रीम कोर्ट ने भी इस मामले की एसआईटी जांच से संबंधित याचिका को स्वाभाविक मौत करार देते हुए खारिज कर दिया था।

2024 में बयान, फरवरी 2026 में फिर दर्ज हुआ पक्ष मामले में राहुल गांधी का बयान 26 जुलाई 2024 को अदालत में दर्ज हुआ था। इसके बाद 20 फरवरी 2026 को भी उन्हें सीआरपीसी की धारा 313 के तहत बयान दर्ज कराने के लिए अदालत में पेश होना पड़ा। इस दौरान उन्होंने मामले में अपना पक्ष रखा। वॉइस सैंपल की अर्जी से भी बदली सुनवाई की दिशा परिवादी विजय मिश्र की ओर से मामले में लगाई गई सीडी में मौजूद आवाज और राहुल गांधी के वॉइस सैंपल का FSL से मिलान कराने की मांग की गई थी।

ट्रायल कोर्ट ने 2 मई 2026 को यह अर्जी खारिज कर दी थी। इसके बाद सेशन कोर्ट दोबारा अर्जी दाखिल की। सेशन कोर्ट ने भी 15 जुलाई को इसे खारिज कर दिया। इसके बाद हाईकोर्ट में अर्जी डाली, सितंबर में हाईकोर्ट में भी वॉइस सैंपल के मिलान से जुड़ी चुनौती दायर की गई थी। उपलब्ध रिपोर्टों के मुताबिक इसके बाद मामले में अंतिम बहस की कार्यवाही आगे बढ़ी।

21 सितंबर को 45-50 मिनट हुई थी बहस 21 सितंबर को विशेष एमपी-एमएलए कोर्ट में विजय मिश्र के वकील संतोष कुमार पांडेय ने करीब 45 से 50 मिनट तक दलीलें रखीं। हालांकि उनकी बहस पूरी नहीं हो सकी। अदालत ने शेष बहस के लिए 29 सितंबर की तारीख तय कर दी। इससे पहले 16 सितंबर को अदालत ने विजय मिश्र के पक्ष को बहस के लिए अंतिम मौका देते हुए 21 सितंबर की तारीख निर्धारित की थी, लेकिन बहस पूरी नहीं हो सकी थी।

अब 29 सितंबर को परिवादी पक्ष अपनी शेष दलीलें पूरी करेगा। इसके बाद राहुल गांधी के अधिवक्ता काशी प्रसाद शुक्ल की ओर से बचाव पक्ष की बहस की जाएगी। मामले की आगे की कार्रवाई इन दलीलों के बाद अदालत के आदेश पर निर्भर करेगी। ---------------------------------- ये खबर भी पढ़ेंः-

📡 स्रोत: NewsData.io

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