राहुल गांधी की याचिका में 14 खामियां, फीस में ₹220 की कमी... SC में सुनवाई पर लेटेस्ट अपडेट्स
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लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी समेत कई 10 विपक्षी नेताओं की ओर से सुप्रीम कोर्ट में याचिका भी दायर की गई है, जिसमें एसआईआर के दौरान मतदाता सूची से बड़े पैमाने पर नाम हटाए जाने और चुनाव प्रक्रिया में कथित गड़बड़ियों को लेकर हस्तक्षेप की मांग की गई.
याचिका दाखिल होने के बाद सुप्रीम कोर्ट रजिस्ट्री ने उसमें 14 डिफेक्ट यानी तकनीकी खामियां बताई है. वहीं नौ याचिकाकर्ताओं के वकालतनामे भी जोड़े नहीं किए गए थे.
इनमें याचिका में कुछ जगहों पर प्रतिवादियों के नाम में गड़बड़ी, निजी पक्षकारों को प्रतिवादी बनाने का स्पष्टीकरण न देना, पुराने फैसले की कॉपी नहीं लगाना, राहुल गांधी और मल्लिकार्जुन खरगे को छोड़ कर बाकी 9 याचिकाकर्ताओं की तरफ से वकालतनामा नहीं आना, खरगे के पहचान पत्र की धुंधली कॉपी, 220 रुपये की कोर्ट फीस कम जमा करना, दस्तावेजों की प्रिंटिंग में कमी जैसी बातें शामिल हैं.
फिलहाल याचिका से जुड़ी खामियों को दूर करने की प्रकिया चल रही है. इतनी सारी कमियों का आज ही दुरुस्त हो पाना मुश्किल लगता है. ऐसे में शायद कल मामला सुनवाई के लिए न आ सके.
राहुल गांधी शाम 4:30 बजे की समय सीमा से पहले सुप्रीम कोर्ट नहीं पहुंच सके, इसलिए वकील एस प्रसन्ना ने याचिका दायर की.
कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे, सपा चीफ अखिलेश यादव, आरजेडी नेता तेजस्वी यादव, NCP (शरद पवार) की नेता सुप्रिया सुले, शिवसेना (UBT) के नेता संजय राउत, भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी के नेता डी. राजा, सीपीएण महासचिव एम. ए.
बेबी और इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग के नेता ई. टी. मोहम्मद बशीर समेत विपक्षी दलों के नेता भी इस याचिका से संबद्ध हैं.
विपक्ष की प्रमुख मांगों में से एक मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार का इस्तीफा है.
सुप्रीम कोर्ट की वेबसाइट पर 'राहुल गांधी बनाम भारतीय चुनाव आयोग' के रूप में सूचीबद्ध किया गया है.
1. SIR से जुड़े सभी दस्तावेज कोर्ट म
📡 स्रोत: ABP Live
💡 पृष्ठभूमि (Background)
राहुल गांधी और अन्य विपक्षी नेताओं ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की है, जिसमें चुनाव आयोग द्वारा 2024 के चुनाव के दौरान मतदाता सूची से बड़े पैमाने पर नाम हटाने और अन्य प्रक्रियागत गड़बड़ियों पर सवाल उठाया गया है। यह विषय चुनावी पारदर्शिता और लोकतंत्र के मूलभूत सिद्धांतों से जुड़ा है। खबर महत्वपूर्ण है क्योंकि इसमें कोर्ट ने याचिका में 14 तकनीकी खामियां बताई हैं, जिससे न्यायिक प्रक्रिया पर चर्चा और सुधार की मांग बढ़ रही है। यदि याचिका सफल होती है, तो मतदाता सूची की सटीकता और चुनावी नियमों में