राहुल के कार्यक्रम में मिमिक्री विवाद पर बोले बाबा रामदेव - 'किसी का अपमान...'
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राहुल गांधी के इंदौर में आयोजित छात्रों की गूंज कार्यक्रम को लेकर चल रहे राजनीतिक विवाद के बीच योग गुरु बाबा रामदेव ने प्रतिक्रिया दी है.
उन्होंने कहा कि सत्ता पक्ष हो या विपक्ष या फिर कोई भी राजनीतिक विचारधारा, लोकतंत्र में किसी का अपमान नहीं होना चाहिए.
उनके मुताबिक राजनीतिक मतभेद अपनी जगह हैं, लेकिन सार्वजनिक जीवन में शालीनता और मर्यादा बनाए रखना जरूरी है.
बाबा रामदेव ने कहा कि देश का संविधान और लोकतांत्रिक व्यवस्था किसी व्यक्ति के अपमान को सही नहीं ठहराती.
उन्होंने कहा कि अलग-अलग राजनीतिक दलों और विचारधाराओं का सम्मान होना चाहिए और राजनीतिक विरोध के दौरान भाषा की मर्यादा बनाए रखना जरूरी है.
उन्होंने कहा कि किसी व्यक्ति के राजनीतिक जुड़ाव के आधार पर उसके साथ अपमानजनक व्यवहार नहीं किया जाना चाहिए.
प्रधानमंत्री की मां के संदर्भ में कही यह बात
इंदौर के कार्यक्रम में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की मिमिक्री को लेकर बीजेपी और कांग्रेस के बीच विवाद चल रहा है.
बीजेपी नेताओं ने आरोप लगाया है कि कार्यक्रम में प्रधानमंत्री की दिवंगत मां को लेकर भी आपत्तिजनक संदर्भ दिया गया.
कांग्रेस की ओर से इस आरोप को खारिज किया गया है और इसे राजनीतिक हास्य तथा मिमिक्री का हिस्सा बताया गया है.
इसी संबंध में बाबा रामदेव ने कहा कि प्रधानमंत्री की मां हों या किसी अन्य व्यक्ति की मां, बहन या बेटी, सभी के सम्मान का ध्यान रखा जाना चाहिए. उन्होंने महिलाओं और पुरुषों के समान सम्मान की बात भी कही.
जाति, वर्ग और शिक्षा के आधार पर भेदभाव का विरोध
बाबा रामदेव ने अपने बयान में सामाजिक सम्मान का दायरा व्यापक रखते हुए कहा कि SC, ST और आदिवासी समुदायों की तरह ब्राह्मण, क्षत्रिय और वैश्य समुदायों के लोगों का भी समान सम्मान होना चाहिए.
उन्होंने कहा कि किसी व्यक्ति के साथ उसकी जाति, वर्ग, भाषा या त्वचा के रंग के आधार पर अभद्र व्यवहार नहीं होना चाहिए.
उन्होंने शिक्षित और अशिक्षित लोगों के समान सम्मान की भी बात कही.
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📡 स्रोत: ABP Live
💡 पृष्ठभूमि (Background)
राहुल गांधी के इंदौर में आयोजित छात्रों की गूंज कार्यक्रम के दौरान मिमिक्री पर उठे विवाद ने राजनीतिक चर्चा को नया आयाम दिया। इस कार्यक्रम में राहुल के समर्थकों ने विपक्षी नेता के चेहरे की नकल करते हुए एक व्यंग्यात्मक प्रदर्शन किया, जिसे कुछ ने अपमानजनक माना। इस पर योग गुरु बाबा रामदेव ने तटस्थ दृष्टिकोण अपनाते हुए कहा कि लोकतंत्र में किसी का अपमान नहीं होना चाहिए और शालीनता बनाए रखनी चाहिए। यह घटना राजनीतिक शिष्टाचार और सार्वजनिक विमर्श पर सवाल उठाती है, जिससे आम जनता में विचारधारा की सीमाएँ और