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"राजा के दो सींग' नाटक ने बटोरी तालियां, सराहा

लेखक: JKS News Desk अंतिम अपडेट: 29 सितंबर 2026
प्रकाशक: वॉयस ऑफ क्रांति
"राजा के दो सींग' नाटक ने बटोरी तालियां, सराहा

जन संस्कृति मंच के बिहार राज्य सम्मेलन के मौके पर रविवार रात समस्तीपुर कॉलेज भवन में लोककथा पर आधारित नाटक राजा दो सींग का मंचन हुआ। प्रस्तुति रंगकर्मी दीपक सिन्हा के निर्देशन में रंगसंस्था रंगनायक द लेफ्ट थियेटर बेगूसराय ने की। दर्शकों ने नाटक को खूब सराहा। नाटक में कथा यह रही कि पमपम हजाम नामक नाई ने बाल काटते वक्त राजा के सिर पर सींग देख लिया।

राजा के मना करने के बाद भी भेद खुल गया। राजा ने पमपम और सत्तापरस्त कलाकार को फांसी की सजा दे दी। नाटक का लेखन और निर्देशन दीपक सिन्हा ने किया। राजा की भूमिका यथार्थ सिन्हा ने निभाई। पमपम हजाम की भूमिका देवेंद्र कुंवर ने निभाई। अन्य भूमिकाओं में भूषण भारती दरबारी बने। निखिल कुमार अंगरक्षक बने।

संजय कुमार मंत्री बने। संगीतज्ञ की भूमिका पंकज कुमार सिन्हा ने निभाई।संगीत पर वरिष्ठ रंगकर्मी विजय कुमार सिन्हा रहे। ढोलक पर प्रमोद पंडित रहे। सहगायन दिलीप भारद्वाज, अमित मेहता ने किया। हारमोनियम पर सूर्यप्रकाश आरा युवानीति रहे। संगीत संयोजन कर्णप्रिय रहा। नाटक ने सशक्त प्रस्तुति के साथ समकालीन सामाजिक-राजनीतिक सरोकारों पर ध्यान खींचा।

मंच से वर्तमान दौर की लूट, झूठ, फासीवादी सत्ता-संस्कृति के खिलाफ तीखा प्रतिरोध दिखाया गया। कलाकारों ने सत्ता के दमनकारी चरित्र, सामाजिक विसंगतियों, आम जनता के संघर्ष को प्रभावी ढंग से पेश किया। मंचन के बाद कवि-साहित्यकार, जन संस्कृति मंच के जिलाध्यक्ष डॉ.

प्रभात कुमार ने कहा कि लोगों की जिंदगी को मोबाइल और आभासी दुनिया लगातार निगल रही है। ऐसे दौर में सांस्कृतिक गतिविधियों, जनपक्षधर कला-साहित्य का महत्व बढ़ गया है। उन्होंने कहा कि रंगमंच समाज को सोचने, सवाल करने, बदलाव की दिशा में प्रेरित करने का महत्वपूर्ण माध्यम है।

📡 स्रोत: NewsData.io

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