राजनीति

राजनीतिक विरोध के खिलाफ पुलिस कार्रवाई पर जमाअत-ए-इस्लामी हिंद ने जताई चिंता, पुलिस से पेशेवर रवैये की मांग

लेखक: Maroof Ahmed Khan अंतिम अपडेट: 8 अक्टूबर 2026
प्रकाशक: वॉयस ऑफ क्रांति

नई दिल्ली, 8 अक्टूबर। जमाअत-ए-इस्लामी हिंद के उपाध्यक्ष प्रोफेसर सलीम इंजीनियर ने दिल्ली में विरोध प्रदर्शनों से निपटने के तरीके और विपक्षी नेताओं की हिरासत को लेकर चिंता जताई है। उन्होंने पुलिस और संबंधित संस्थानों से बिना किसी अनुचित राजनीतिक दबाव के पेशेवर रवैया अपनाते हुए संवैधानिक दायित्वों का पालन करने की मांग की।

मीडिया को जारी बयान में प्रोफेसर सलीम इंजीनियर ने कहा कि राजनीतिक रूप से निर्वाचित प्रतिनिधि, चाहे वे विपक्षी दलों से ही क्यों न हों, जनता के प्रतिनिधि होते हैं और लोकतांत्रिक व्यवस्था में उनकी महत्वपूर्ण भूमिका होती है। उन्होंने कहा कि प्रभावी विपक्ष के बिना लोकतंत्र सुचारू रूप से काम नहीं कर सकता। उनके अनुसार विपक्षी नेताओं, अन्य राजनीतिक नेताओं और प्रदर्शनकारियों के साथ किया जा रहा व्यवहार लोकतांत्रिक व्यवस्था के लिए चिंता का विषय है।

उन्होंने हाल के दिनों में आकाशवाणी भवन और जंतर-मंतर के पास विपक्षी सांसदों को हिरासत में लिए जाने का उल्लेख करते हुए कहा कि विरोध प्रदर्शनों को रोकने से प्रदर्शनकारियों द्वारा उठाए जा रहे मुद्दों का समाधान नहीं हो सकता। उन्होंने शांतिपूर्ण लोकतांत्रिक प्रदर्शनों के लिए प्रशासनिक बाधाओं और पुलिस प्रतिबंधों के बढ़ते इस्तेमाल पर भी चिंता जताई।

जमाअत-ए-इस्लामी हिंद ने अनावश्यक हिरासत और कथित तौर पर बेवजह दर्ज की गई एफआईआर की समीक्षा और आवश्यक कार्रवाई की मांग की। संगठन ने पुलिस के दुर्व्यवहार से जुड़े आरोपों की निष्पक्ष जांच तथा दोषी पाए जाने वाले अधिकारियों की जवाबदेही तय करने की मांग भी रखी।

बयान में मीडिया रिपोर्टों का हवाला देते हुए कहा गया कि आने वाले दिनों में जंतर-मंतर और दिल्ली के आसपास विरोध प्रदर्शनों को रोकने के लिए बड़ी संख्या में सुरक्षाकर्मियों की तैनाती की जानकारी सामने आई है। संगठन ने इसे लेकर चिंता जताते हुए कहा कि सुरक्षा व्यवस्था ऐसी होनी चाहिए जिससे नागरिकों के लोकतांत्रिक अधिकारों के इस्तेमाल में अनावश्यक बाधा न आए।

प्रोफेसर सलीम इंजीनियर ने कहा कि राजनीतिक विपक्ष की जिम्मेदारी है कि वह जनता से जुड़े मुद्दों को उठाए। ऐसे मामलों में सरकार को विपक्ष की बात सुनने और संबंधित चिंताओं के समाधान के लिए लोकतांत्रिक बातचीत एवं संस्थागत संवाद का रास्ता अपनाना चाहिए, भले ही सरकार विपक्ष के विचारों से सहमत न हो।

उन्होंने सरकार और पुलिस अधिकारियों से शांतिपूर्ण ढंग से अपनी बात रखने वाले लोगों के लिए आवश्यक व्यवस्था सुनिश्चित करने तथा उनकी सुरक्षा का ध्यान रखने का आग्रह किया। उन्होंने कहा कि निर्वाचित प्रतिनिधियों और शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों के साथ व्यवहार का प्रभाव केवल तत्कालीन विरोध प्रदर्शनों तक सीमित नहीं रहता, बल्कि इससे देश की लोकतांत्रिक छवि और संस्थाओं के प्रति नागरिकों के विश्वास पर भी असर पड़ सकता है।

जमाअत-ए-इस्लामी हिंद ने सरकार से राजनीतिक विरोध, शांतिपूर्ण असहमति और संवैधानिक स्वतंत्रताओं के सम्मान को सुनिश्चित करने की मांग की।

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Maroof Ahmed Khan

Maroof Ahmed Khan वॉयस ऑफ क्रांति के संस्थापक एवं प्रधान संपादक हैं। वे जनसरोकार, निष्पक्ष रिपोर्टिंग और जनता की आवाज़ को प्रमुखता देने के लिए प्रतिबद्ध हैं।