राजस्थान-एमपी से मुंबई तक बेटियों की सौदेबाजी की पड़ताल:मां-बाप 3 से 5 लाख में बेच रहे, गोदनामे पर दलाल पाल रहे, बालिग होते ही मुंबई में रेट 35-40 लाख
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तीन-चार साल की बच्ची…...परिवार की गरीबी और कर्ज के बीच उसका सौदा। कागज पर ‘गोदनामा’ बताया। स्टांप पर बच्ची किसी दूसरे परिवार के हवाले हो गई। वह परिवार उसे कई साल अपने पास रखता है। फिर यही बच्ची राजस्थान-मध्यप्रदेश की सीमा से निकलकर मुंबई, पुणे और नागपुर जैसे शहरों तक पहुंचती है। वहां उसका नाम, उम्र और पहचान तक बदल गए।
आगे उसे बार में डांस या देह व्यापार के नेटवर्क में फंसा दिया। यही नहीं, जाे नाबालिग थी वे कागजाें में हेरफेर कर बालिग बन गई। यह किसी एक बच्ची की कहानी नहीं है बल्कि राजस्थान और मध्यप्रदेश की सीमा से जुड़े 16 जिलों की 100 से ज्यादा बस्तियों में अधिकांश घराें की है। करीब एक महीने की पड़ताल में भास्कर टीम ने इस नेटवर्क की कड़ियां तलाशीं।
परिवारों से बातचीत, स्टांप पर बने गोदनामे, स्कूल रिकॉर्ड, एफआईआर, रेस्क्यू दस्तावेज के रिकॉर्ड को क्रॉस-वेरिफाई किया। इसके बाद टीम मुंबई पहुंची और वहां पुलिस रिकॉर्ड, बालिका गृह में जांच की। मुंबई में जांच के दौरान ऐसे मामलों के डॉक्यूमेंट्स और पुलिस रिकॉर्ड मिले। जिनमें राजस्थान और मध्यप्रदेश से लाई गई लड़कियों को बरामद किया गया था।
भास्कर के पास इनके सभी दस्तावेज भी उपलब्ध हैं।
पहला सौदा : कर्ज था इसलिए देनी पड़ी बेटी हम 11 बस्तियों में पहुंचे। यहां गरीबी और कर्ज की मजबूरी में मां-बाप ही अपनी बेटियों को दूसरों के हवाले कर रहे हैं। पड़ताल के दौरान झालावाड़, बूंदी व मंदसौर की बस्तियों में चार परिवारों से मुलाकात हुई। रिपोर्टर : आपके कितने बच्चे हैं?
मां-बाप : दो लड़के और तीन लड़कियां। रिपोर्टर : फिर बाकी बच्चियां कहां हैं? इस सवाल पर वे जवाब नहीं दे पाए। कुछ देर बाद बोले-एक मुंबई गई थी, जो आ गई।
उनकी गोद में डेढ़ साल की एक मासूम बच्ची थी। हमने उनकी बड़ी बेटी माया (परिवर्तित नाम) के बारे में पूछा। रिपोर्टर : माया को क्यों दिया था? पिता : कर्ज में दलाल रोहित को दाे लाख में दे दिया।
बूंदी शहर के पास एक गांव में मिली मां ने भी अपनी मजबूरी बताई। उसने अपनी दो बेटियां रिश्तेदारी में ही दे दी थीं। उधर, मध्यप्रदेश में मंदसौर के पास एक डेरे में मिली महिला ने बताया कि उसने अपनी तीन बेटियों को 50-50 हजार रुपए में दे दिया। दूसरा सौदा : गोदनामे-स्टांप पर खरीद-फरोख्त गरीब परिवारों में छोटी बच्चियां की गोद लेने के नाम पर स्टांप पर लिख
📡 स्रोत: Dainik Bhaskar