राजस्थान में खेती को हाईटेक बनाने की तैयारी
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एआई और डेटा आधारित तकनीकों से किसानों को मिलेगी आधुनिक कृषि सलाह, पीएम फसल बीमा योजना में पारदर्शिता बढ़ाने पर जोर
झालावाड़, 12 अक्टूबर। राजस्थान में कृषि क्षेत्र को आधुनिक तकनीक, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) और डेटा आधारित व्यवस्था से जोड़ने के लिए राज्य सरकार की ओर से कई पहल की जा रही हैं। इनका उद्देश्य किसानों को तकनीक आधारित सेवाएं उपलब्ध कराना, कृषि उत्पादकता बढ़ाना तथा खेती की लागत और जोखिम कम करना है। इसी क्रम में जयपुर स्थित पंत कृषि भवन में वाधवानी इंस्टीट्यूट फॉर आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के विशेषज्ञों ने प्रदेश के 13 जिलों के कृषि अधिकारियों को एआई के उपयोग और उसके व्यावहारिक अनुप्रयोगों का प्रशिक्षण दिया।
प्रशिक्षण में अधिकारियों को बताया गया कि एआई के माध्यम से मौसम आधारित कृषि सलाह, कीट एवं रोगों की समय पर पहचान, फसल उत्पादन का पूर्वानुमान, सिंचाई और उर्वरक प्रबंधन तथा बाजार से जुड़ी जानकारी किसानों तक प्रभावी ढंग से पहुंचाई जा सकती है। इससे संसाधनों का बेहतर उपयोग करने और कृषि कार्यों में सटीकता बढ़ाने में मदद मिल सकती है।
साथ ही किसानों की आय बढ़ाने की संभावनाओं को भी बल मिलेगा। संयुक्त निदेशक कृषि (विस्तार), झालावाड़ डॉ. नरेश कुमार शर्मा ने बताया कि प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना में रिमोट सेंसिंग, ड्रोन और इमेज एनालिटिक्स जैसी तकनीकों के उपयोग से फसल क्षति का आकलन अधिक वैज्ञानिक और पारदर्शी बनाया जा सकता है।
राज किसान पोर्टल को भी एआई और डेटा आधारित तकनीकों से अधिक सक्षम बनाने पर जोर दिया जा रहा है, ताकि किसानों को उनकी जरूरत के अनुरूप योजनाओं और सेवाओं की जानकारी मिल सके।
कृषि विभाग ने प्राकृतिक एवं जैविक खेती, जलवायु अनुकूल कृषि और आधुनिक तकनीकों के प्रसार को बढ़ावा देने के लिए 38 संगठनों के साथ समझौता ज्ञापनों पर हस्ताक्षर किए हैं। इनके माध्यम से किसानों को प्रशिक्षण, प्रदर्शन प्लॉट, तकनीकी मार्गदर्शन, मृदा स्वास्थ्य सुधार और जल संरक्षण से जुड़ी सुविधाएं उपलब्ध कराने पर जोर दिया जाएगा।
राज्य में एग्रीस्टैक आयुक्तालय की स्थापना की प्रक्रिया के साथ कृषि योजनाओं के बेहतर एकीकरण पर भी काम किया जा रहा है। कृषि आयुक्त को एग्रीस्टैक आयुक्तालय का आयुक्त नामित किया गया है। एग्रीस्टैक डेटा के माध्यम से विभिन्न विभागीय योजनाओं और कार्यक्रमों को जोड़ने का प्रयास किया जा रहा है।
इससे भूमि क्षेत्रफल के आधार पर उर्वरक की जरूरत का आकलन करने, उर्वरक वितरण को लक्षित बनाने और ड्रोन के जरिए नैनो लिक्विड यूरिया के वितरण में सही लाभार्थियों की पहचान करने में मदद मिल सकती है।
किसान पंजीकरण के क्षेत्र में भी राजस्थान ने महत्वपूर्ण उपलब्धि दर्ज की है। राज्य सरकार के अनुसार, निर्धारित 90.19 लाख किसान आईडी बनाने का लक्ष्य शत-प्रतिशत पूरा कर लिया गया है। कृषि मंत्री डॉ. किरोड़ी लाल मीणा ने बताया कि राजस्थान यह लक्ष्य पूरा करने वाला उत्तर भारत का पहला और देश का छठा राज्य बन गया है। किसान आईडी को पीएम-किसान, प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना, उर्वरक वितरण प्रणाली और न्यूनतम समर्थन मूल्य पर खरीद व्यवस्था से जोड़ने की दिशा में भी काम किया गया है।
डॉ. नरेश कुमार शर्मा के अनुसार, किसान आईडी से किसानों की प्रमाणित डिजिटल पहचान विकसित होगी और विभिन्न योजनाओं के लिए बार-बार समान दस्तावेज जमा करने की जरूरत कम हो सकती है। किसान आईडी, भूमि रिकॉर्ड और क्रॉप रजिस्ट्री के एकीकरण से पात्र किसानों की पहचान और योजनाओं का लाभ पहुंचाने की प्रक्रिया अधिक सुगम बनाने में मदद मिलेगी। इन पहलों का उद्देश्य कृषि सेवाओं को अधिक पारदर्शी, तकनीक-सक्षम और किसान-केंद्रित बनाना है।