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राजस्थान: लूणी नदी के संरक्षण को लेकर सुप्रीम कोर्ट सख्त, अजमेर से जुड़े नदी तंत्र पर भी पड़ेगा असर

लेखक: AIR Jaipur अंतिम अपडेट: 25 अगस्त 2026
प्रकाशक: वॉयस ऑफ क्रांति

अजमेर, 25 अगस्त। सुप्रीम कोर्ट ने राजस्थान की बांडी, जोजरी और लूणी नदी में बढ़ते प्रदूषण पर सख्त रुख अपनाया है। न्यायमूर्ति विक्रम नाथ और न्यायमूर्ति संदीप मेहता पीठ ने नदी के किनारे से सौ मीटर के दायरे में निर्माण और विकास गतिविधियों पर अंतरिम रोक लगा दी है।

वहीं, मौजूदा बाढ़ रेखा अथवा नदी के प्रवाह क्षेत्र के दोनों ओर पांच सौ मीटर के दायरे में प्रदूषण फैलाने वाले उद्योगों और गतिविधियों पर भी रोक रहेगी। यह व्यवस्था उच्च बाढ़ रेखा और पारिस्थितिक बफर जोन के वैज्ञानिक सीमांकन तक लागू रहेगी। आदेश का असर अजमेर जिले पर भी पड़ेगा।

क्योंकि लूणी नदी का उद्गम अजमेर की नाग पहाड़ी से होता है और इसका प्रारंभिक जलग्रहण क्षेत्र अजमेर जिले से जुड़ा है। इसके बाद नदी नागौर, पाली, जोधपुर, बालोतरा और अन्य क्षेत्रों से होकर आगे बढ़ती है।

सर्वोच्च न्यायालय ने राजस्थान सरकार को नदी तंत्र के संरक्षण और पुनर्जीवन के लिए समन्वित कार्ययोजना पर प्रभावी कार्रवाई के निर्देश दिए हैं। अदालत ने नदी संरक्षण से जुड़े मामलों में प्रदूषण फैलाने वाले अधिकारियों और इकाइयों की भूमिका की जांच और लंबित मामलों में कार्रवाई तेज करने पर भी जोर दिया है।

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