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राजस्थान: प्रदेश में लम्पी रोग के बढ़ते मामलों को देखते हुए राज्य सरकार सतर्क, पशु मेले और हाट-बाजारों पर लगाया प्रतिबंध

लेखक: Maroof Ahmed Khan अंतिम अपडेट: 17 सितंबर 2026 👁️ 1 बार पढ़ा गया
प्रकाशक: वॉयस ऑफ क्रांति
राजस्थान: प्रदेश में लम्पी रोग के बढ़ते मामलों को देखते हुए राज्य सरकार सतर्क, पशु मेले और हाट-बाजारों पर लगाया प्रतिबंध

जयपुर, 12 सितंबर। प्रदेश में लंपी स्किन डिजीज की स्थिति और इसके प्रभावी नियंत्रण को लेकर पशुपालन विभाग ने सतर्कता बढ़ा दी है। इसको लेकर विभाग के प्रमुख शासन सचिव विकास सीतारामजी भाले की अध्यक्षता में बैठक हुई। बैठक में रोग की वर्तमान स्थिति, प्रभावित क्षेत्रों में सर्वेक्षण, टीकाकरण और उपचार व्यवस्थाओं की समीक्षा की गई।

बैठक में पशुओं के आवागमन को नियंत्रित करने के लिए पशु मेलों और पशु हाट पर प्रतिबंध लगाया गया है। इसके साथ ही जिला एवं राज्य स्तर पर नियंत्रण कक्ष तथा त्वरित प्रतिक्रिया दल गठित किए गए हैं। पशुपालकों में जागरूकता बढ़ाने के लिए विभिन्न माध्यमों से प्रचार सामग्री का भी उपयोग किया जा रहा है।

बैठक में पशुपालन निदेशक डॉ. सुरेश चंद मीना ने बताया कि वर्तमान में प्रदेश के 10 जिले लंपी रोग से प्रभावित हैं, जिनमें अधिकांश पूर्वी राजस्थान के जिले हैं। उन्होंने बताया कि सक्रिय गौवंशों की संख्या में कमी आ रही है, जबकि अब तक 16 पशुओं की मौत हुई है।

प्रमुख शासन सचिव ने अधिकारियों को रोग की रोकथाम और नियंत्रण के लिए सभी आवश्यक कदम प्रभावी एवं समयबद्ध तरीके से उठाने के निर्देश दिए। उन्होंने प्रभावित क्षेत्रों में पशुपालकों को लंपी रोग के लक्षण, बचाव और उपचार की जानकारी उपलब्ध कराने तथा पशु चिकित्सा संस्थानों के माध्यम से आवश्यक सेवाएं सुनिश्चित करने को कहा।

उन्होंने उन जिलों पर विशेष ध्यान देने के निर्देश दिए, जहां अभी तक लंपी रोग के मामले सामने नहीं आए हैं, ताकि वहां संक्रमण का प्रसार रोका जा सके। उन्होंने व्यापक प्रचार-प्रसार के माध्यम से पशुपालकों को रोग के प्रति जागरूक करने और चिकित्साधिकारियों को घर-घर जाकर बीमार पशुओं का सर्वेक्षण करने के निर्देश दिए। भाले ने जिला स्तर पर निरंतर निगरानी रखने तथा अन्य संबंधित विभागों के साथ समन्वय से कार्य करने को कहा।

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Maroof Ahmed Khan

Maroof Ahmed Khan वॉयस ऑफ क्रांति के संस्थापक एवं प्रधान संपादक हैं। वे जनसरोकार, निष्पक्ष रिपोर्टिंग और जनता की आवाज़ को प्रमुखता देने के लिए प्रतिबद्ध हैं।