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राजस्थान: टीबी मुक्त राजस्थान के प्रयासों को मिलेगी गति, कमजोर जिलों पर रहेगा विशेष फोकस, मुख्य सचिव ने टीबी मुक्त भारत अभियान की प्रगति की ली समीक्षा बैठक

लेखक: AIR Jaipur अंतिम अपडेट: 20 अगस्त 2026
प्रकाशक: वॉयस ऑफ क्रांति
राजस्थान: टीबी मुक्त राजस्थान के प्रयासों को मिलेगी गति, कमजोर जिलों पर रहेगा विशेष फोकस, मुख्य सचिव ने टीबी मुक्त भारत अभियान की प्रगति की ली समीक्षा बैठक

जयपुर, 20 अगस्त। मुख्य सचिव वी. श्रीनिवास ने प्रदेश को टीबी मुक्त बनाने के अभियान में तेजी लाने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने कहा कि टीबी की स्क्रीनिंग, जांच और उपचार को अधिक प्रभावी बनाया जाए तथा कमजोर प्रदर्शन वाले जिलों पर विशेष ध्यान देते हुए जिला स्तर पर प्रगति की नियमित निगरानी की जाए।

मुख्य सचिव गुरुवार को शासन सचिवालय में टीबी मुक्त भारत अभियान की प्रगति की समीक्षा कर रहे थे। उन्होंने टीबी की समय पर पहचान के लिए एक्स-रे मशीनों का अधिकतम उपयोग करने और न्यूक्लिक एसिड एम्प्लीफिकेशन टेस्ट (नाट) की संख्या बढ़ाने के निर्देश दिए।

उन्होंने कहा कि बेहतर प्रदर्शन करने वाले जिलों की कार्यप्रणाली का अध्ययन कर अन्य जिलों में भी उसी अनुरूप प्रभावी कार्ययोजना तैयार की जाए। श्रीनिवास ने टीबी प्रिवेंटिव ट्रीटमेंट (टीपीटी) और डिफरेंशिएटेड टीबी केयर पर विशेष जोर दिया।

उन्होंने कहा कि मरीजों का पूरा उपचार सुनिश्चित करने के साथ उनके परिवार के पात्र सदस्यों की स्क्रीनिंग भी कराई जाए और आवश्यकता होने पर उन्हें प्रिवेंटिव ट्रीटमेंट दिया जाए।

उन्होंने टीबी उन्मूलन अभियान में जनभागीदारी बढ़ाने के निर्देश देते हुए माय भारत स्वयंसेवकों को सक्रिय रूप से जोड़ने तथा एनसीसी कैडेट्स की ब्लॉक स्तर तक भागीदारी बढ़ाने को कहा। एएनएम, आशा सहयोगिनी और सामुदायिक स्वास्थ्य अधिकारियों सहित जमीनी स्तर के स्वास्थ्यकर्मियों की भूमिका को भी प्रभावी बनाने पर जोर दिया।

उन्होंने टीबी मुक्त राजस्थान के लक्ष्य के लिए स्पष्ट रोडमैप तैयार कर निर्धारित समयसीमा में कार्य पूरा करने के निर्देश दिए। चिकित्सा, स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग की प्रमुख शासन सचिव गायत्री राठौड़ ने प्रस्तुतीकरण के माध्यम से अभियान की प्रगति की जानकारी दी।

उन्होंने बताया कि प्रदेश में टीबी मुक्त घोषित ग्राम पंचायतों की संख्या लगातार बढ़ी है। वर्ष 2022 में 29 ग्राम पंचायतें टीबी मुक्त घोषित हुई थीं, जो 2023 में बढ़कर 586, वर्ष 2024 में 3,350 और वर्ष 2025 में 6,547 हो गईं।

उन्होंने बताया कि अभियान के तहत प्रदेश में अब तक 2 करोड़ 38 लाख 43 हजार 583 लोगों की स्क्रीनिंग की जा चुकी है। टीबी रोगियों को 2 लाख 4 हजार 888 पोषण किट भी वितरित की गई हैं। वर्ष 2026 में एक्स-रे के उपयोग का स्तर निर्धारित लक्ष्य का 83 प्रतिशत तक पहुंच गया है।

प्रदेश में टीबी की जांच के लिए 643 नाट लैब, 132 हैंडहेल्ड एक्स-रे यूनिट और 652 फिक्स्ड एक्स-रे मशीनें उपलब्ध हैं। अभियान के दौरान 3 लाख 29 हजार से अधिक नाट जांच तथा 35 लाख 87 हजार से अधिक एक्स-रे किए जा चुके हैं। बैठक में एनएचएम के मिशन निदेशक डॉ. जोगा राम सहित चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग के वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे।

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