राजस्थान विश्वविद्यालय में लोक साहित्य, कला और इतिहास पर संगोष्ठी शुरू
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राजस्थान विश्वविद्यालय के राजस्थान अध्ययन केंद्र की ओर से ‘राजस्थान का लोक साहित्य, कला एवं इतिहास’ विषय पर दो दिवसीय संगोष्ठी का शुभारंभ हुआ। कैबिनेट मंत्री कर्नल राज्यवर्धन सिंह राठौड़ ने इसका उद्घाटन किया।
27 अक्टूबर, जयपुर। राजस्थान विश्वविद्यालय के राजस्थान अध्ययन केंद्र की ओर से ‘राजस्थान का लोक साहित्य, कला एवं इतिहास’ विषय पर दो दिवसीय संगोष्ठी का शुभारंभ हुआ। संगोष्ठी का उद्घाटन कैबिनेट मंत्री कर्नल राज्यवर्धन सिंह राठौड़ ने किया। कार्यक्रम में राजस्थान की लोक परंपराओं, साहित्य, कला, इतिहास और सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण के साथ उन्हें व्यापक स्तर पर पहचान दिलाने पर चर्चा की गई।
लोक साहित्य पीढ़ियों के अनुभवों का संग्रह
उद्घाटन सत्र को संबोधित करते हुए कैबिनेट मंत्री कर्नल राज्यवर्धन सिंह राठौड़ ने कहा कि राजस्थान का लोक साहित्य केवल साहित्यिक रचनाओं तक सीमित नहीं है, बल्कि यह पीढ़ियों के अनुभवों, परंपराओं और जीवन मूल्यों का संग्रह है। उन्होंने कहा कि राजस्थान की समृद्ध लोक विरासत को विश्व पटल पर पहुंचाना जरूरी है, ताकि देश-दुनिया के लोग यहां की संस्कृति और परंपराओं से परिचित हो सकें।
मायड़ भाषा के ज्ञान से समझ सकेंगे लोक संस्कृति
कार्यक्रम के मुख्य वक्ता बाबूलाल ने कहा कि राजस्थान के लोक इतिहास, संस्कृति और विरासत को सही मायने में समझने के लिए मायड़ भाषा का ज्ञान जरूरी है। उन्होंने क्षेत्रीय भाषा और लोक साहित्य को राजस्थान की सांस्कृतिक पहचान का महत्वपूर्ण आधार बताया।
युवा पीढ़ी को महापुरुषों और वीरांगनाओं के इतिहास से जोड़ने पर जोर
संगोष्ठी की अध्यक्षता राजस्थान विश्वविद्यालय के कुलगुरु प्रो. भगवती प्रसाद सारस्वत ने की। उन्होंने कहा कि देश की युवा पीढ़ी को अपने महापुरुषों और वीरांगनाओं के इतिहास से अवगत कराना आवश्यक है। इससे युवाओं में अपनी सांस्कृतिक विरासत, ऐतिहासिक परंपराओं और गौरवशाली अतीत के प्रति जागरूकता बढ़ेगी।
दो दिनों तक होगा विचार-विमर्श दो दिवसीय संगोष्ठी में राजस्थान के लोक साहित्य, कला, इतिहास और सांस्कृतिक परंपराओं से जुड़े विभिन्न पहलुओं पर विचार-विमर्श किया जाएगा। आयोजन का उद्देश्य प्रदेश की ऐतिहासिक और सांस्कृतिक धरोहर को समझना, उसका संरक्षण करना और नई पीढ़ी तक पहुंचाना है। कार्यक्रम में राजस्थान अध्ययन केंद्र की निदेशक एवं संगोष्ठी संयोजक डॉ. दीपिका विजयवर्गीय सहित अन्य प्रतिभागी उपस्थित रहे।
बाइट — कर्नल राज्यवर्धन सिंह राठौड़, कैबिनेट मंत्री
बाइट — प्रो. भगवती प्रसाद सारस्वत, कुलगुरु, राजस्थान विश्वविद्यालय
बाइट — डॉ. दीपिका विजयवर्गीय, संगोष्ठी संयोजक एवं निदेशक, राजस्थान अध्ययन केंद्र