‘राजी’ के किरदार ‘धुरंधर’ से कम देशभक्त नहीं, मेघना गुलजार ने समझाया फर्क
ताज़ा खबरों से अपडेट रहने के लिए हमारे WhatsApp चैनल से जुड़ेंJoin करें →
मेघना गुलजार अपनी हालिया फिल्म दायरा को लेकर चर्चा में है. फिल्म की स्टार कास्ट और वो खुद लगातार फिल्म का प्रचार कर रहीं हैं.
इसी दौरान उन्होंने अलग-अलग फिल्मों में देशभक्ति को अलग तरीके से प्रेजेंट करने पर बात की है.
उन्होंने अपनी बात समझाने के लिए फिल्म 'राजी' और 'धुरंधर' में किरदारों की देशभक्ति की तुलना भी की है.
उनका मानना है कि देशभक्ति को पर्दे पर दिखाने का तरीका हर फिल्म में एक जैसा नहीं होता.
कहीं बड़े एक्शन सीन इस्तेमाल करके देशभक्ति दिखाई जाती है हो, तो कहीं एक किरदार चुपचाप अपने देश के लिए बहुत बड़ा जोखिम उठा रहा होता है और उसके बारे में बहुत कम लोगों को पता होता है.
ये भी पढें: सिद्धार्थ मल्होत्रा की 'द वन' को जीरो कट के साथ मिली CBFC से मंजूरी, जानें- फिल्म का रन टाइम और सर्टिफिकेशन
राजी के किरदार धुरंधर से कम वतनपरस्त नहीं
हाल ही में केके क्रिएट के एक पॉडकास्ट में जब मेघना गुलजार से धुरंधर और राजी की देशभक्ति के फर्क को लेकर सवाल किया गया, तो उन्होंने कहा कि असल अंतर फिल्मों की कहानी में होता है.
उन्होंने कहा, कहानी के हिसाब से फिल्म के सीन्स के फैसले होते हैं. धुरंधर मे उस तरह का एक्शन है क्योंकि उस कहानी में वैसा एक्शन दिखाने की जरूरत है.
वहीं ऐसा भी जरूरी नहीं है कि वतपरस्ती दिखाने के लिए जोर-शोर से बोलना जरूरी हो.
लेकिन इसका मतलब ये नहीं है कि एक गलत और दूसरा सही है या कोई किरदार दूसरी फिल्म के कैरेक्टर से कम देशभक्त है. ये सब स्टोरी पर निर्भर करता है.
ये भी पढें: लालबागचा राजा के दरबार पहुंचे गोविंदा, को-स्टार कोमल रानी स्वर्णकार संग लिया बप्पा का आशीर्वाद
उन्होंने कहा कि दोनों कहानियों में देश के लिए कुछ करने का तरीका अलग है.
लेकिन इस आधार पर राजी के किरदारों की देशभक्ति को धुरंधर के किरदारों की देशभक्
📡 स्रोत: ABP Live Film
💡 पृष्ठभूमि (Background)
इस खबर में मेघना गुलजार ने अपनी नई फिल्म दायरा के प्रचार के दौरान देशभक्ति की अलग-अलग प्रस्तुति पर चर्चा की है। उन्होंने ‘राजी’ और ‘धुरंधर’ की तुलना कर यह स्पष्ट किया कि देशभक्ति का चित्रण हर फिल्म में अलग हो सकता है। यह विषय इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि आज के समाज में फिल्मों के माध्यम से देशभक्ति की धारणा पर गहरा प्रभाव पड़ता है। जनता को यह समझने में मदद मिलेगी कि फिल्मों में दिखाई गई भावनाएँ वास्तविकता से भिन्न हो सकती हैं, जिससे वे अधिक समालोचनात्मक दृष्टिकोण से फ़िल्मों का आनंद ले सकें।