आज राखी बांधने के लिए 3 शुभ मुहूर्त:वैदिक काल में सोना और मणि बांधते थे, जानिए 3000 साल से ज्यादा पुराना रक्षाबंधन कैसे बना भाई–बहन का त्योहार
आज सावन महीने की पूर्णिमा है। इस बार भद्रा नहीं होने से दिनभर में राखी बांधने के लिए सुबह 6:15 से शाम 7 बजे तक कुल 3 शुभ मुहूर्त हैं। ग्रंथों में सूर्योदय से सूर्यास्त तक ही रक्षाबंधन करने की परंपरा है। रक्षाबंधन आज भाई–बहन का त्योहार है, लेकिन हजारों साल पहले इसका रूप अलग था।
अथर्ववेद में रक्षा के लिए सोना और मणि बांधने का जिक्र है। वहीं, रामायण में वनवास से पहले कौशल्या ने राम के लिए औषधि से रक्षा सूत्र तैयार किया था। भविष्योत्तर पुराण में श्रीकृष्ण ने युधिष्ठिर को सावन महीने की पूर्णिमा पर रक्षाबंधन करने की पूरी विधि बताई। 13वीं सदी तक यह तय नियम और मंत्र वाला धार्मिक कर्म बन चुका था।
फिर अकबर के दौर में रक्षाबंधन मुगल दरबार तक पहुंचा और जहांगीर ने अपनी आत्मकथा में लिखा कि इस धागे को राखी नाम दिया। 18वीं सदी में राजपूत महिलाएं राजाओं के लिए राखियां लेकर आती थीं और 19वीं सदी में राखी देकर किसी भी पुरुष को भाई बनाने की परंपरा शुरू हुई।
पहले जानते हैं रक्षाबंधन के मुहूर्त, थाली में रखी जाने वाली सामग्री और राखी बांधने का शास्त्रीय तरीका... अब जानिए, वैदिक काल में रक्षा के लिए बांधा जाने वाला सोना और मणि कैसे भाई-बहन की राखी बनी...
📡 स्रोत: NewsData.io