राखी की डोर ने जेल की दीवारों को भी किया बेअसर, भाई-बहन के मिलन से छलकी आंखें, रक्षाबंधन पर प्रदेश की जेलों में भावनात्मक माहौल

प्रदेश की जेलों में करीब 27 हजार बंदियों से मिले 85 हजार परिजन, भावुक मुलाकातों ने जगाई परिवार और समाज से जुड़ाव की उम्मीद
भोपाल। रक्षाबंधन के पावन पर्व पर मध्यप्रदेश की विभिन्न जेलों में भाई-बहन के रिश्ते की भावनाओं ने जेल की दीवारों के बीच भी आत्मीयता का रंग भर दिया।
जेल प्रशासन की ओर से विशेष व्यवस्था के तहत आयोजित खुली मुलाकात में बड़ी संख्या में बहनें अपने भाइयों से मिलने पहुंचीं और उनकी कलाई पर राखी बांधकर स्वस्थ, सुखी एवं उज्ज्वल भविष्य की कामना की। वहीं महिला बंदियों से मिलने उनके भाई और परिजन भी जेल पहुंचे।

जेल प्रशासन के अनुसार, प्रदेश की विभिन्न जेलों में निरुद्ध करीब 27 हजार बंदियों से लगभग 85 हजार परिजनों ने खुली मुलाकात की। मुलाकात शांतिपूर्ण, सौहार्दपूर्ण और पारिवारिक वातावरण में संपन्न हुई।

लंबे समय बाद अपनों से मुलाकात का यह अवसर कई परिवारों के लिए भावुक कर देने वाला रहा। बहनों ने भाइयों की कलाई पर राखी बांधी तो कई बंदियों की आंखों में खुशी के आंसू छलक पड़े। अपने बच्चों, जिनकी उम्र 10 वर्ष तक थी, और अन्य परिजनों से मिलने वाले बंदियों के चेहरों पर भी लंबे समय बाद अपनों को करीब पाकर खुशी दिखाई दी।
जेलों में भाई-बहन के आत्मीय प्रेम और बिछड़ने के दर्द के भावुक दृश्य देखने को मिले।
सुरक्षा के बीच हुई खुली मुलाकात
मध्यप्रदेश जेल प्रशासन के आदेशानुसार जेल महानिदेशक डॉ. वरुण कपूर के मार्गदर्शन में प्रदेश की जेलों में यह विशेष व्यवस्था की गई। खुली मुलाकात के दौरान बंदियों के परिजनों को जेल गेट के अंदर निर्धारित खुले स्थान या मैदान में मिलने की अनुमति दी गई।
जेल अधिकारियों और कर्मचारियों की मौजूदगी में सुरक्षा मानकों का पालन करते हुए मुलाकात कराई गई।

बंदियों और उनके परिजनों की सुविधा के लिए जेल प्रशासन ने आवश्यक व्यवस्थाएं भी की थीं। सुरक्षा व्यवस्था के साथ मुलाकात स्थल पर अधिकारियों और कर्मचारियों द्वारा लगातार निगरानी रखी गई।
डीजी जेल डॉ. वरुण कपूर इंदौर केंद्रीय जेल में रहे मौजूद
इस विशेष आयोजन के दौरान जेल महानिदेशक डॉ. वरुण कपूर स्वयं केंद्रीय जेल इंदौर में मौजूद रहे। उन्होंने बंदियों और उनके परिजनों को रक्षाबंधन की शुभकामनाएं दीं।

मीडिया से चर्चा में डॉ. कपूर ने कहा कि इस तरह के विशेष आयोजनों का बंदियों पर सकारात्मक प्रभाव पड़ता है। उनके अनुसार, पारिवारिक और सामाजिक जिम्मेदारी की भावना को मजबूत करने तथा बंदियों को समाज की मुख्यधारा से जोड़ने के उद्देश्य से जेल विभाग द्वारा प्रतिवर्ष कुछ विशेष त्योहारों पर खुली मुलाकात का आयोजन किया जाता है।
उन्होंने कहा कि रक्षाबंधन के अवसर पर हुई मुलाकातों ने जेलों में पारिवारिक जुड़ाव और सौहार्द का वातावरण बनाया। यह आयोजन जहां बंदियों के लिए भावनात्मक रूप से महत्वपूर्ण रहा, वहीं उनके परिजनों को भी अपनों से मिलने का अवसर मिला।

रक्षाबंधन की इन मुलाकातों ने यह संदेश भी दिया कि कानून की सजा के बीच रिश्तों की डोर कमजोर नहीं होती—एक राखी, एक मुलाकात और अपनों का साथ बंदी जीवन में भी उम्मीद की एक नई किरण जगा सकता है।