राममंदिर ट्रस्ट के नए महासचिव गोविंद देव गिरी को जानिए:17 साल की उम्र में पहली कथा की, इससे पहले कोषाध्यक्ष की जिम्मेदारी थी
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श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट में बुधवार को बड़ा प्रशासनिक बदलाव हुआ। ट्रस्ट ने स्वामी गोविंद देव गिरी को नया महासचिव नियुक्त किया है। इससे पहले वे ट्रस्ट में कोषाध्यक्ष की जिम्मेदारी संभाल रहे थे। चंपत राय के महासचिव पद से हटने के बाद ट्रस्ट में नई व्यवस्था बनाई जा रही है।
इसी के तहत स्वामी गोविंद देव गिरी को महासचिव की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी दी गई है।
गोविंद देव गिरी महाराज केवल राम मंदिर ट्रस्ट से जुड़े संत नहीं हैं, बल्कि वे लंबे समय से वेद, उपनिषद, रामायण, महाभारत और भगवद्गीता जैसे धर्मग्रंथों पर प्रवचन देते रहे हैं। 17 साल की उम्र में उन्होंने अपने गांव बेलापुर में पहली बार भगवद्गीता पर प्रवचन दिया था।
इसके बाद देश-विदेश में उनके धार्मिक प्रवचनों का सिलसिला जारी रहा। राम मंदिर आंदोलन और मंदिर निर्माण की प्रक्रिया में भी उनकी महत्वपूर्ण भूमिका रही है। जनवरी 2024 में रामलला की प्राण प्रतिष्ठा के समय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपना 11 दिन का उपवास स्वामी गोविंद देव गिरी महाराज के हाथों से जूस ग्रहण कर समाप्त किया था।
अब ट्रस्ट के महासचिव के रूप में उनके सामने मंदिर के प्रशासन, प्रबंधन और ट्रस्ट की गतिविधियों को आगे बढ़ाने की बड़ी जिम्मेदारी होगी। महाराष्ट्र के बेलापुर में जन्म, नाम था किशोरजी व्यास स्वामी गोविंद देव गिरी महाराज का जन्म 25 जनवरी 1949 को महाराष्ट्र के अहिल्यानगर जिले के बेलापुर गांव में हुआ था।
उनका मूल नाम किशोर मदनगोपाल व्यास था। बाद में वे आचार्य किशोरजी व्यास के नाम से भी प्रसिद्ध हुए। धार्मिक वातावरण वाले परिवार में पले-बढ़े गोविंद देव गिरी ने प्रारंभिक शिक्षा बेलापुर में ही हासिल की। इसके बाद वे स्वाध्याय परिवार के संस्थापक पांडुरंग शास्त्री आठवले द्वारा स्थापित तत्वज्ञान विद्यापीठ से जुड़े।
यहां उन्होंने दर्शनशास्त्र की पढ़ाई की। आगे वे वाराणसी पहुंचे, जहां वेद, उपनिषद और भारतीय दर्शन का अध्ययन किया और वैदिक विद्वान डॉ.
विश्वनाथजी देव के मार्गदर्शन में ‘दर्शनाचार्य’ की उपाधि प्राप्त की। 17 साल की उम्र में पहली कथा, फिर देश-विदेश में प्रवचन गोविंद देव गिरी महाराज की पहचान सबसे पहले एक धर्मग्रंथों के विद्वान और कथावाचक के रूप में बनी। उन्होंने महज 17 वर्ष की उम्र में अपने गांव में श्रीमद्भागवत और भगवद्गीता पर प्रवचन शुरू किया। इसके ब
📡 स्रोत: Dainik Bhaskar