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रणथंभौर में लेपर्ड की हाईटेक मॉनिटरिंग

लेखक: Maroof Ahmed Khan अंतिम अपडेट: 8 अक्टूबर 2026
प्रकाशक: वॉयस ऑफ क्रांति
रणथंभौर में लेपर्ड की हाईटेक मॉनिटरिंग

रणथंभौर में लेपर्ड की गतिविधियों पर नजर रखने के लिए साइलेंट डिवाइस और हाई ट्रैक सेंसर लगाए जाएंगे। आबादी की ओर वन्यजीव के बढ़ने पर अलर्ट मिलेगा, जिससे मानव-वन्यजीव संघर्ष रोकने में मदद मिलेगी।

सवाई माधोपुर, 8 अक्टूबर । रणथंभौर टाइगर रिजर्व में अब बाघों के साथ लेपर्ड की मॉनिटरिंग के लिए भी अत्याधुनिक तकनीक का इस्तेमाल किया जाएगा। वन विभाग की ओर से लेपर्ड की गतिविधियों पर नजर रखने के लिए साइलेंट डिवाइस और हाई ट्रैक सेंसर लगाने की तैयारी की जा रही है। इसे राजस्थान के किसी टाइगर रिजर्व में इस तरह की तकनीक का शुरुआती प्रयोग बताया जा रहा है।

इन सेंसर के जरिए जंगल से निकलकर आबादी वाले क्षेत्रों की ओर जाने वाले वन्यजीवों की गतिविधियों पर नजर रखी जा सकेगी। वन्यजीव के आबादी की तरफ बढ़ने पर सिस्टम के जरिए अलर्ट जारी होगा, जिससे ग्रामीणों को समय रहते सतर्क किया जा सकेगा। इसका उद्देश्य इंसानों और वन्यजीवों के बीच होने वाले संघर्ष की घटनाओं को कम करना है।

रणथंभौर टाइगर रिजर्व में बड़ी संख्या में लेपर्ड मौजूद हैं और कई बार ये जंगल की सीमा से बाहर निकलकर आबादी वाले क्षेत्रों तक पहुंच जाते हैं। ऐसे में वन विभाग ने लेपर्ड के अधिक मूवमेंट वाले इलाकों में तकनीकी निगरानी बढ़ाने की योजना बनाई है।

रणथंभौर के डीएफओ मानस सिंह के अनुसार, इस तकनीक को केरल में हाथियों की निगरानी और ग्रामीणों को समय रहते अलर्ट करने के लिए किए जा रहे प्रयोग से प्रेरणा लेकर रणथंभौर में आजमाया जा रहा है। विभाग ने लेपर्ड की अधिक आवाजाही वाले क्षेत्रों को प्राथमिकता के आधार पर चिह्नित किया है।

इनमें सवाई माधोपुर के पुराने शहर के आसपास के क्षेत्र के साथ फलोदी रेंज के दूमोंदा, हिंदवाड़ और टोडरा शामिल हैं। जंगल से आबादी की ओर आने वाली मुख्य पगडंडियों और कच्चे रास्तों को भी चिह्नित किया जा रहा है, जहां सेंसर लगाए जाएंगे।

वन विभाग का उद्देश्य वन्यजीव के आबादी क्षेत्र में प्रवेश करने से पहले ही ग्रामीणों तक अलर्ट पहुंचाना है, ताकि संभावित घटना को समय रहते रोका जा सके। विभाग के अनुसार, यदि यह तकनीक रणथंभौर में सफल रहती है तो भविष्य में इसे अन्य पैराफेरी और आबादी से सटे क्षेत्रों में भी लगाया जा सकता है। इससे वन्यजीवों की मॉनिटरिंग को मजबूत करने के साथ मानव-वन्यजीव संघर्ष को कम करने में मदद मिलने की उम्मीद है।

बाईट-1-मानस सिंह ,डीएफओ ,रणथंभौर

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Maroof Ahmed Khan

Maroof Ahmed Khan वॉयस ऑफ क्रांति के संस्थापक एवं प्रधान संपादक हैं। वे जनसरोकार, निष्पक्ष रिपोर्टिंग और जनता की आवाज़ को प्रमुखता देने के लिए प्रतिबद्ध हैं।