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रांची के रातू गढ़ में 187 वर्षों से राज परिवार कर रहा मां की आराधना, सांप्रदायिक एकता की मिसाल

लेखक: Maroof Ahmed Khan अंतिम अपडेट: 19 अक्टूबर 2026
प्रकाशक: वॉयस ऑफ क्रांति
रांची के रातू गढ़ में 187 वर्षों से राज परिवार कर रहा मां की आराधना, सांप्रदायिक एकता की मिसाल

रांची की ऐतिहासिक दुर्गा पूजा का केंद्र रातू राज परिवार, वर्ष 1839 से चली आ रही है परंपरा, 187 वर्षों से हो रही है मां की आराधना, रातूगढ़ का यह पूजा सांप्रदायिक एकता का प्रतीक।

Short Headline: रांची के रातू गढ़ में 187 वर्षों से राज परिवार कर रहा मां की आराधना, सांप्रदायिक एकता की मिसाल

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रांची की ऐतिहासिक दुर्गा पूजा का केंद्र रातू राज परिवार

1839 से चली आ रही है परंपरा 187 वर्षों से हो रही है मां की आराधना

रातूगढ़ का यह पूजा सांप्रदायिक एकता का प्रतीक

एंकर रांची में सार्वजनिक और पारंपरिक दुर्गा पूजा की शुरुआत का श्रेय रातू गढ़ को जाता है। वर्ष 1839 में सबसे पहले रातू गढ़ पर माँ दुर्गा की प्रतिमा स्थापित कर इस पर्व की शुरुआत की गई थी। पिछले 187 वर्षों से अनवरत चली आ रही इस पारंपरिक पूजा को देखने के लिए आज भी दूर-दराज से श्रद्धालु रातू पहुंचते हैं।

होल्ड अप साउंड रिपोर्ट

वीओ 01. रांची में रातू राज परिवार के मुख्य पुजारी भोला शंकर मिश्र बताते हैं कि नागवंशी राजाओं के इस प्राचीन गढ़ में बरसों से बेहद कड़े पारंपरिक विधान के साथ दुर्गा पूजा संपन्न कराई जाती है। विजया दशमी के अवसर पर यहाँ शक्ति की विशेष आराधना होती है। इस ऐतिहासिक पूजा की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि इससे सभी जातियों, धर्मों और स्थानीय जनजातीय समुदायों का गहरा और आत्मीय जुड़ाव रहा है।

वीओ 02. रातूगढ़ की इस गौरवशाली परंपरा से जुड़ी कई पीढ़ियाँ माँ की सेवा में समर्पित रही हैं। यहाँ लगभग 75 वर्षों से जुड़ीं राज पुरोहित की माता कांति देवी, जो खुद पिछले 50 से अधिक वर्षों से इस दुर्गा पूजा के अनुष्ठानों को नजदीक से देखती और कराती आ रही हैं, बताती हैं कि यहाँ का प्रत्येक विधान बहुत ही सूक्ष्म और विधि-विधान से पूर्ण किया जाता है।

वीओ 03. रातूगढ़ की इस आध्यात्मिक और ऐतिहासिक महत्ता के कारण यहाँ हर वर्ष शिरकत करने वाले दीपटोली, रांची के चिकित्सक डॉ. राजेश कुमार सिंह कहते हैं कि इस प्राचीन परिसर में प्रवेश करते ही एक अलग और अलौकिक ऊर्जा और शक्ति का अनुभव होता है। यही कारण है कि राजधानी रांची और आसपास के जिलों से बड़ी संख्या में भक्तगण यहाँ माता के दर्शन और पूजन के लिए खींचे चले आते हैं।

अंतिम वीओ ऐतिहासिक मान्यताओं, पारंपरिक अनुष्ठानों और प्राचीन विरासतों को समेटे रातूगढ़ का यह दुर्गोत्सव केवल एक धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि सामाजिक सौहार्द, आपसी भाईचारे और सांप्रदायिक एकता का एक जीवंत प्रतीक है।

रांची से प्रताप की रिपोर्ट।

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Maroof Ahmed Khan

Maroof Ahmed Khan वॉयस ऑफ क्रांति के संस्थापक एवं प्रधान संपादक हैं। वे जनसरोकार, निष्पक्ष रिपोर्टिंग और जनता की आवाज़ को प्रमुखता देने के लिए प्रतिबद्ध हैं।