राष्ट्रसंत ब्रह्मलीन महंत अवेद्यनाथ जी महाराज की 12वीं पुण्यतिथि की स्मृति में आयोजित भव्य समापन समारोह में युवाओं को लक्ष्य, अनुशासन और राष्ट्र निर्माण का संदेश

गोरखपुर में महाराणा प्रताप महाविद्यालय जंगल धूसड़, गोरखपुर में राष्ट्रसंत ब्रह्मलीन महंत अवेद्यनाथ जी महाराज की 12वीं पुण्यतिथि की स्मृति में आयोजित सप्तदिवसीय व्याख्यानमाला का सोमवार को भव्य समापन समरोह आयोजित हुआ।
एस समापन समारोह के मुख्य अतिथि भारतीय रेलवे ट्रैफिक सेवा के पूर्व अधिकारी मेजर विराट मिश्र तथा विशिष्ट अतिथि भारतीय रक्षा एवं अनुसंधान संगठन, नई दिल्ली के वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. अनंत नारायण भट्ट रहे।
कार्यक्रम की अध्यक्षता महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ. मनीष कुमार त्रिपाठी ने की।मुख्य अतिथि मेजर विराट मिश्र ने अपने उद्बोधन में विद्यार्थियों को राष्ट्र चेतना, साहस, लक्ष्यभेदन और आत्मविश्वास का संदेश देते हुए कहा कि भारत के इतिहास में ऐसे अनेक उदाहरण हैं, जब सीमित संसाधनों के बावजूद भारतीय सैनिकों ने अदम्य साहस और पराक्रम का परिचय दिया।
उन्होंने विशेष रूप से 1962 के भारत-चीन युद्ध का उल्लेख करते हुए कहा कि अत्यंत विषम भौगोलिक एवं मौसम संबंधी परिस्थितियों में भारतीय सैनिकों का संघर्ष आने वाली पीढ़ियों के लिए साहस, कर्तव्यनिष्ठा और कभी हार न मानने की प्रेरणा देता है।
उन्होंने कहा कि राष्ट्र की शक्ति केवल उसकी सीमाओं की सुरक्षा में नहीं, बल्कि उसके युवाओं की चेतना, चरित्र और संकल्प में निहित होती है। आज भारत को ऐसी प्रत्येक चुनौती का दृढ़ता से सामना करने की आवश्यकता है, जो राष्ट्र की एकता, अखंडता और विकास में बाधक बनती है।
उन्होंने विद्यार्थियों से कहा कि युवा शक्ति के पास प्रतिभा, ज्ञान, तकनीक और ऊर्जा के रूप में अपार संसाधन हैं। आवश्यकता केवल अपनी सामर्थ्य को पहचानकर उसे सही दिशा में नियोजित करने की है।मेजर मिश्र ने कहा कि जीवन में लक्ष्य स्पष्ट हो तो कठिनाइयां मार्ग की बाधा नहीं, बल्कि सफलता की सीढ़ी बन जाती हैं।
विद्यार्थियों को अपने जीवन का लक्ष्य निर्धारित कर अनुशासन, परिश्रम और निरंतर प्रयास के साथ आगे बढ़ना चाहिए।
उन्होंने कहा कि छात्र जीवन केवल व्यक्तिगत सफलता अर्जित करने का समय नहीं, बल्कि राष्ट्र के प्रति अपने दायित्व को समझने और स्वयं को राष्ट्र निर्माण के लिए तैयार करने का काल है।विशिष्ट अतिथि डॉ. अनंत नारायण भट्ट ने कहा कि भारत विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में निरंतर आत्मनिर्भरता की ओर बढ़ रहा है।
डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम और डॉ. विक्रम साराभाई जैसे वैज्ञानिकों के योगदान ने भारत के वैज्ञानिक विकास को नई दिशा प्रदान की। आज भारत अंतरिक्ष विज्ञान, रक्षा तकनीक, ड्रोन प्रौद्योगिकी सहित अनेक क्षेत्रों में अपनी क्षमता का विश्व स्तर पर प्रदर्शन कर रहा है।
उन्होंने कहा कि भारत को आत्मनिर्भर बनाने में विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी की महत्वपूर्ण भूमिका है। स्वदेशी तकनीक, अनुसंधान और नवाचार के माध्यम से देश नई ऊंचाइयों को प्राप्त कर रहा है।
उन्होंने विद्यार्थियों से कहा कि वे केवल नौकरी प्राप्त करने की मानसिकता तक सीमित न रहें, बल्कि ज्ञान, कौशल, अनुसंधान और नवाचार के माध्यम से रोजगार सृजक बनने का लक्ष्य रखें।डॉ. भट्ट ने कहा कि स्वास्थ्य एवं औषधि के क्षेत्र में भी भारत की महत्वपूर्ण भूमिका है।
आयुर्वेद और भारतीय पारंपरिक चिकित्सा ज्ञान को आधुनिक वैज्ञानिक अनुसंधान के साथ जोड़कर विश्व स्तर पर उपयोगी बनाया जा सकता है। कृषि क्षेत्र में भी भारत के सामने व्यापक संभावनाएं हैं।
उन्होंने विद्यार्थियों से 2047 के विकसित भारत के लक्ष्य को ध्यान में रखते हुए वैज्ञानिक दृष्टिकोण, आत्मनिर्भरता और नवाचार को अपने जीवन का हिस्सा बनाने का आह्वान किया।समारोह की अध्यक्षता करते हुए महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ. मनीष कुमार त्रिपाठी ने कहा कि राष्ट्रसंत ब्रह्मलीन महंत अवेद्यनाथ जी महाराज का जीवन राष्ट्रभक्ति, भारतीय संस्कृति, सामाजिक समरसता, शिक्षा, सेवा और राष्ट्र निर्माण के प्रति समर्पण का प्रेरणादायी उदाहरण है।
उन्होंने कहा कि महंत अवेद्यनाथ जी महाराज ने अपने जीवन और कार्यों के माध्यम से समाज को संगठित करने, वंचित एवं जरूरतमंद वर्गों के प्रति संवेदनशील रहने तथा राष्ट्र और संस्कृति के प्रति गौरव का भाव जागृत करने का कार्य किया।
डॉ. त्रिपाठी ने कहा कि महंत अवेद्यनाथ जी महाराज की स्मृति में आयोजित यह सप्तदिवसीय व्याख्यानमाला केवल एक कार्यक्रम नहीं, बल्कि नई पीढ़ी में राष्ट्र चेतना और सकारात्मक जीवन मूल्यों के संचार का माध्यम है।
इससे पूर्व मुख्य अतिथि मेजर विराट मिश्र ने विशिष्ट अतिथि डॉ. अनंत नारायण भट्ट एवं महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ. मनीष कुमार त्रिपाठी के साथ मां सरस्वती, मां भारती एवं राष्ट्रसंत ब्रह्मलीन महंत अवेद्यनाथ जी महाराज के चित्र पर पुष्पार्चन एवं दीप प्रज्ज्वलित कर कार्यक्रम का शुभारंभ किया।
व्याख्यानमाला की प्रास्ताविकी मनोविज्ञान विभाग की सहायक आचार्य अर्चिता राय ने प्रस्तुत की। कार्यक्रम का संचालन राजनीति विज्ञान विभाग के प्रभारी हरिकेश यादव ने किया। समारोप समारोह में महाविद्यालय के समस्त शिक्षक, कर्मचारी एवं बड़ी संख्या में विद्यार्थी उपस्थित रहे।