भोपाल

राष्ट्रीय संगोष्ठी ‘नाड़ी विश्लेषण 2026’ में आयुर्वेद की शास्त्रीय परंपरा और आधुनिक शोध का संगम

लेखक: Santosh Yogi अंतिम अपडेट: 7 अक्टूबर 2026
प्रकाशक: वॉयस ऑफ क्रांति
राष्ट्रीय संगोष्ठी ‘नाड़ी विश्लेषण 2026’ में आयुर्वेद की शास्त्रीय परंपरा और आधुनिक शोध का संगम

भोपाल। पं. खुशीलाल शर्मा शासकीय स्वशासी आयुर्वेद महाविद्यालय एवं संस्थान, भोपाल द्वारा राष्ट्रीय आयुष मिशन, मध्यप्रदेश के सहयोग से 6 अक्टूबर 2026 को रजत जयंती ऑडिटोरियम में राष्ट्रीय संगोष्ठी ‘नाड़ी विश्लेषण 2026’ का सफल आयोजन किया गया। संगोष्ठी का विषय “Exploring Practical Techniques of Nadi Parikshan and its Clinical Significance in Diagnostics” रहा।

संगोष्ठी का मुख्य उद्देश्य नाड़ी परीक्षा की भूमिका को व्यापक दृष्टिकोण से समझना रहा। आयोजन में नाड़ी परीक्षा को केवल दोषों के आकलन तक सीमित न रखते हुए रोग की स्थिति तथा साध्य-असाध्यता के आकलन में इसके महत्व पर भी चर्चा की गई।

कार्यक्रम का शुभारंभ सुबह 8:30 बजे पंजीयन के साथ हुआ। इसके बाद राज्यपाल मंगुभाई पटेल की गरिमामयी उपस्थिति में संगोष्ठी का विधिवत उद्घाटन हुआ। इस अवसर पर दक्षिण-पश्चिम विधानसभा क्षेत्र, भोपाल के विधायक भगवान दास सबनानी, आयुष विभाग के प्रमुख सचिव शोभित जैन, आयुष आयुक्त आर. उमा महेश्वरी तथा पं. खुशीलाल शर्मा शासकीय स्वशासी आयुर्वेद महाविद्यालय एवं संस्थान, भोपाल के प्राचार्य सहित अन्य गणमान्य उपस्थित रहे।

उद्घाटन सत्र में विशिष्ट नाड़ी विशेषज्ञ वैद्यों का सम्मान किया गया। साथ ही राज्यपाल द्वारा स्मारिका ‘आयुर्वर्धन—Sickle Cell’ का विमोचन किया गया।

संगोष्ठी में विद्यार्थियों, शोधार्थियों और चिकित्सा विशेषज्ञों की व्यापक सहभागिता रही। कुल 660 पंजीयन प्राप्त हुए, जिनमें 372 UG विद्यार्थी, 110 PG Scholars और 110 Medical Officers शामिल रहे। इसके अलावा Faculty तथा On-Spot Registration के माध्यम से भी प्रतिभागियों की संख्या में वृद्धि हुई।

वैज्ञानिक सत्रों के अंतर्गत कुल 107 abstracts प्राप्त हुए, जिनमें से 80 शोध-पत्रों को प्रस्तुति के लिए चयनित किया गया। कार्यक्रम के दौरान 50 research papers प्रस्तुत किए गए। इन प्रस्तुतियों में नाड़ी परीक्षा से जुड़े शोध, clinical interpretation और इसके व्यावहारिक पहलुओं पर प्रतिभागियों ने अपने अध्ययन और निष्कर्ष साझा किए।

पूरे कार्यक्रम को दो हॉल में आयोजित किया गया। Hall-1 में तीन Plenary Sessions और Hall-2 में चार Scientific Sessions आयोजित किए गए। इनमें विशेषज्ञ व्याख्यान, शोध-पत्र प्रस्तुतियां और विभिन्न अकादमिक गतिविधियां शामिल रहीं।

संगोष्ठी की विशेषता hands-on training और interactive discussion भी रही। नाड़ी विशेषज्ञों द्वारा प्रतिभागियों को नाड़ी परीक्षण की व्यावहारिक तकनीकों का प्रशिक्षण दिया गया। Medical Officers, PG Scholars और UG Students को विशेषज्ञों के साथ प्रत्यक्ष संवाद का अवसर मिला। प्रतिभागियों ने नाड़ी परीक्षण, clinical interpretation, diagnosis और research से जुड़े सवाल पूछे, जिनका विशेषज्ञ वक्ताओं ने विस्तार से समाधान किया।

इस प्रकार संगोष्ठी में पारंपरिक आयुर्वेदिक ज्ञान, clinical experience, research और आधुनिक तकनीक के बीच समन्वय देखने को मिला। देश के विभिन्न संस्थानों से आए विशेषज्ञों, Faculty Members, Medical Officers, PG Scholars और UG Students की सहभागिता ने आयोजन को व्यापक अकादमिक मंच प्रदान किया।

‘नाड़ी विश्लेषण 2026’ के माध्यम से नाड़ी परीक्षा जैसे आयुर्वेद के प्राचीन एवं महत्वपूर्ण विषय को practical, clinical और research-oriented दृष्टिकोण से समझने का प्रयास किया गया। आयोजन ने प्रतिभागियों को नाड़ी परीक्षण की शास्त्रीय अवधारणाओं के साथ-साथ उनके व्यावहारिक और शोध संबंधी पहलुओं को समझने का अवसर दिया।

आयोजकों के अनुसार, संगोष्ठी का उद्देश्य आयुर्वेद की शास्त्रीय परंपरा को आधुनिक clinical practice, research और technology से जोड़ते हुए नाड़ी परीक्षा के व्यापक महत्व पर अकादमिक विमर्श को आगे बढ़ाना रहा।

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Santosh Yogi

संतोष योगी भोपाल के वरिष्ठ पत्रकार हैं जो भोपाल जिला एवं आसपास की घटनाओं को प्रमुखता से कवर करते हैं।