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राष्ट्रीय शिक्षा नीति का त्रिभाषा सूत्र राष्ट्रीय एकता के लिए अहम, पुरानी लिपियों को बचाना जरूरी: राज्यपाल

लेखक: Maroof Ahmed Khan अंतिम अपडेट: 14 अक्टूबर 2026
प्रकाशक: वॉयस ऑफ क्रांति
राष्ट्रीय शिक्षा नीति का त्रिभाषा सूत्र राष्ट्रीय एकता के लिए अहम, पुरानी लिपियों को बचाना जरूरी: राज्यपाल

अक्तूबर 14,शिमला (हिमाचल प्रदेश): भाषा राष्ट्रीय एकता में बहुत बड़ा रोल अदा कर सकती है। आने वाले समय में जब राष्ट्रीय शिक्षा नीति पूरी तरह लागू होगी तो अपनी राष्ट्रभाषा हिंदी और अपनी स्थानीय भाषा पर फोकस करना होगा। विदेशी भाषाओं के बजाय अपनी भाषा से समाज हर क्षेत्र में आगे बढ़ेगा। लोकभवन शिमला में केंद्रीय विश्वविद्यालय हिमाचल प्रदेश के वीसी प्रोफेसर सत प्रकाश बंसल द्वारा लिखित त्रिभाषा पुस्तक "अक्षर से आत्माबोध तक" का लोकार्पण के मौके पर में राज्यपाल कविंद्र गुप्ता ने यह बात कही।

राज्यपाल ने कहा कि इस तरह की पुस्तकें अपनी भाषा को महत्व देने के लिए बेहद महत्वपूर्ण हैं और विकसित भारत के संकल्प में इनका अहम योगदान रहेगा।राज्यपाल ने सेंटर यूनिवर्सिटी के वीसी सत प्रकाश बंसल और उनके सहयोगियों को इस पुस्तक के लिए बधाई दी और कहा कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 में जो त्रिभाषा सूत्र की परिकल्पना है, उसे इस पुस्तक में सही मायने में दर्शाया गया है।प्रदेश में पुरानी लिपियों पर रिसर्च की जरूरत है ताकि आने वाली पीढ़ी उसे समझ सके, नहीं तो ये धीरे-धीरे लुप्त हो जाएंगी।

उन्होंने कहा कि वे खुद डोगरी भाषा से संबंध रखते हैं, जम्मू के रहने वाले हैं और पुस्तक में डोगरी के लिए जो इनिशिएटिव लिया गया है वो सराहनीय है। नई जनरेशन अपनी भाषा को पहचाने और दैनिक जीवन में लाए। वहीं पुस्तक के लेखक प्रो. सत प्रकाश बंसल ने कहा कि यह केवल पुस्तक नहीं है। चीन, फ्रांस या जापान हो, सभी ने अपनी भाषा की ताकत से ही देश को विकसित किया है।

बच्चा 3 साल तक मां की गोद में पलता है, संस्कार लेता है, लेकिन उसके बाद उसे ऐसे एनवायरमेंट में शिक्षा दी जाती है जिसका उसकी भाषा से कोई लेना-देना नहीं होता। हमने बच्चों को बायोलॉजिकल मदर से और अपनी भाषा से जुदा कर दिया, जिससे बच्चा अपनी जड़ों से कट जाता है। राष्ट्रीय शिक्षा नीति के तहत 22 भारतीय भाषाओं को समृद्ध करने की बात है।

हमें हिंदी और डोगरी की जिम्मेदारी मिली थी, उसी के तहत थ्री लैंग्वेज फॉर्मूला कैसे इम्प्लीमेंट हो, इस पर ये किताब लिखी है। ये पुस्तक नहीं, बल्कि भाषा सूत्र के माध्यम से अपनी संस्कृति को विकसित करने और 2047 के भारत के सपने को देखने का जरिया है।

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Maroof Ahmed Khan

Maroof Ahmed Khan वॉयस ऑफ क्रांति के संस्थापक एवं प्रधान संपादक हैं। वे जनसरोकार, निष्पक्ष रिपोर्टिंग और जनता की आवाज़ को प्रमुखता देने के लिए प्रतिबद्ध हैं।