राष्ट्रीय सृजन पुरस्कारों का ऐलान, मधुकांत को साहित्यश्री सम्मान

राष्ट्रभाषा हिन्दी प्रचार समिति श्रीडूंगरगढ़ ने वर्ष 2026 के राष्ट्रीय सृजन पुरस्कारों की घोषणा की। रोहतक के साहित्यकार मधुकांत और जयपुर के डॉ. सूरजसिंह नेगी समेत छह साहित्यकार होंगे सम्मानित। राष्ट्रभाषा हिन्दी प्रचार समिति श्रीडूंगरगढ़ ने वर्ष 2026 के राष्ट्रीय सृजन पुरस्कारों की घोषणा कर दी है।
समिति की ओर से साहित्य के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान और उत्कृष्ट सृजन के लिए देशभर के साहित्यकारों का चयन किया गया है। समिति का सर्वोच्च मलाराम माली स्मृति साहित्यश्री सम्मान रोहतक के वरिष्ठ साहित्यकार मधुकांत को उनके समग्र साहित्यिक अवदान के लिए प्रदान किया जाएगा।
वहीं हिन्दी सृजन पुरस्कार जयपुर के कथाकार एवं उपन्यासकार डॉ. सूरजसिंह नेगी को उनकी कृति ‘भावेश जो कह न सका’ के लिए दिया जाएगा। इसके अलावा मीरा जैन, लाल देवेंद्र कुमार श्रीवास्तव, डॉ. सतीश कुमार और अरविंद पथिक को भी विभिन्न साहित्यिक विधाओं में उत्कृष्ट सृजन के लिए सम्मानित किया जाएगा।
राष्ट्रीय सृजन पुरस्कारों का सम्मान समारोह 27 सितंबर को श्रीडूंगरगढ़ में आयोजित किया जाएगा। समारोह में चयनित साहित्यकारों को सम्मानित करने के साथ साहित्यिक संगोष्ठी का भी आयोजन किया जाएगा, जिसमें साहित्य से जुड़े विभिन्न विषयों पर चर्चा होगी।
समिति की ओर से साहित्यश्री सम्मान के तहत 21 हजार रुपए की पुरस्कार राशि प्रदान की जाएगी। वहीं अन्य पुरस्कारों के तहत चयनित साहित्यकारों को 11-11 हजार रुपए की राशि दी जाएगी। पुरस्कार के साथ सभी सम्मानित साहित्यकारों को सम्मान-पत्र, स्मृति-चिह्न और शॉल भेंट कर सम्मानित किया जाएगा।
समिति का कहना है कि इन पुरस्कारों का उद्देश्य हिन्दी साहित्य के क्षेत्र में उत्कृष्ट कार्य कर रहे रचनाकारों को प्रोत्साहित करना और साहित्य सृजन की परंपरा को आगे बढ़ाना है।