'रायता और फैला दिया...', SIR को लेकर पवन खेड़ा ने ज्ञानेश कुमार पर कसा तंज
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कांग्रेस नेता पवन खेड़ा ने चुनाव आयोग की ओर से फॉर्म 6 और विशेष गहन पुनरीक्षण यानी एसआईआर को लेकर दिए गए जवाब पर सवाल उठाए हैं.
उन्होंने दावा किया कि फार्म 6 एक वैधानिक फॉर्म है और इसमें बदलाव करने के लिए 1960 के नियमों में संशोधन जरूरी है. खेड़ा ने कहा कि ये नियम संसद में संशोधन के बिना नहीं बदले जा सकते.
उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि दो चुनाव आयुक्तों और मुख्य चुनाव आयुक्त के बीच फॉर्म 6 को लेकर सामने आए मतभेद पर चुनाव आयोग की ओर से उन्हें स्पष्ट जवाब मिला या नहीं.
फॉर्म 6 को लेकर खेड़ा का सवाल
पवन खेड़ा ने कहा कि 23 सितंबर को द इंडियन एक्सप्रेस में प्रकाशित खबर सिर्फ चुनाव आयोग के भीतर मतभेदों को लेकर नहीं थी, बल्कि उसमें यह भी बताया गया था कि मतभेद किन मुद्दों पर थे.
उनके मुताबिक, सबसे प्रमुख मुद्दा फॉर्म 6 में किए गए बदलावों का था.
खेड़ा ने कहा कि फॉर्म 6 एक वैधानिक फॉर्म है और इसमें बदलाव 1960 के नियमों में संशोधन किए बिना नहीं किया जा सकता.
उन्होंने सवाल उठाया कि अगर नियमों में बदलाव की जरूरत है तो इसे संसद के जरिए किया जाना चाहिए.
उन्होंने कहा कि सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी की ओर से मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के सामने उठाई गई मुख्य आपत्ति भी इसी मुद्दे से जुड़ी थी.
'गैर-कानूनी फॉर्म 6 से एसआईआर भी गैर-कानूनी'
खेड़ा ने आरोप लगाया कि अगर फॉर्म 6 में बदलाव गैर-कानूनी तरीके से किया गया था तो उसके आधार पर किया गया पूरा एसआईआर भी गैर-कानूनी माना जाना चाहिए.
उन्होंने आगे दावा किया कि इसी एसआईआर के आधार पर बंगाल और बिहार में हुए चुनावों की वैधता पर भी सवाल खड़े होते हैं.
लेकिन चुनाव आयोग ने इसका जवाब तो नहीं दिया बल्कि रायता और फैला दिया.
ECINet पर भी उठाए सवाल
पवन खेड़ा ने चुनाव आयोग के ECINet प्लेटफॉर्म को लेकर भी सवाल उठ
📡 स्रोत: ABP Live