Real Estate: UP में बिल्डरों और एजेंट्स के लिए सख्त हुए नियम, घर खरीदार जान लें

Real Estate News: अपनी मेहनत की कमाई से हर कोई अपना घर खरीदना चाहता है, लेकिन क्या घर खरीदने के लिए केवल बजट तय करना ही काफी है तो ऐसा नहीं है, बल्कि घर खरीदने के लिए आपको कानूनी प्रक्रियाएं भी करवानी जरूरी होती है. इसके अलावा भी कई जरूरी काम होते हैं, जिनकी जानकारी होना महत्वपूर्ण है.
ऐसे में अगर आप भी उत्तर प्रदेश में घर खरीदने की योजना बना रहे हैं तो यह खबर आपके लिए जरूरी है. उत्तर प्रदेश रियल एस्टेट रेगुलेटरी ऑथारिटी यानी UP-RERA ने रियल एस्टेट से जुड़े नियमों में बदलाव किए हैं, जिनकी जानकारी होना आपके लिए जरूरी है. प्रोजेक्ट से जुड़ी देनी होगी रिपोर्ट
नए नियमों के तहत बिल्डर को प्रोफेशनल्स के सर्टिफिकेट के साथ ही Quarterly Progress Report जमा करनी होगी. लोन का पैसा भी अलग अकाउंट में रखना होगा इसके अलावा अब प्रोजेक्ट से जुड़ा लोन का पैसा भी अलग अकाउंट में रखना जरूरी होगा.
साथ ही हर फाइनेंशियल ईयर में अकाउंट्स का ऑडिट कराना होगा. एक बात का ध्यान रखें, खरीदारों से प्रोजेक्ट का पैसा कैश नहीं लिया जा सकेगा. ट्रनिंग सर्टिफिकेट की होगी जरूरत एजेंटों को रजिस्ट्रेशन और रिन्यूअल के लिए ट्रेनिंग सर्टिफिकेट की जरूरत होगी.
साथ ही हर तीन महीने अपने ट्रांजैक्शन की जानकारी जमा करनी होगी. याद रखें, जरूरी रिपोर्ट को लेट जमा करने पर लेट फीस लगेगी.
8452 करोड़ में से 93% रकम FD में, कहां कितना हुआ खर्च? कितनी लगेगी फीस? बता दें कि QPR के लिए 15 हजार रुपये.
एजेंट की तिमाही रिपोर्ट के लिए 10 हजार रुपये तक की फीस लगेगी और सालाना ऑडिट रिपोर्ट क
📡 स्रोत: ABP Live Vyapar