रेजीनगर उपचुनाव: बंगाल पुलिस की कार्रवाई से खौफ में हुमायूं कबीर, EC को लिखा लेटर
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पश्चिम बंगाल में रेजीनगर उपचुनाव को लेकर सियासत गरमाती दिख रही है.
बहरमपुर थाने की पुलिस ने एक वायरल ऑडियो के मामले में आम जनता विकास पार्टी (AUJP) के सुप्रीमो और विधायक हुमायूं कबीर को समन भेजा है.
पुलिस शनिवार को उनके शक्तिपुर स्थित आवास पहुंची और सोमवार को थाने में उपस्थित होने का नोटिस दिया.
हुमायूं कबीर के थाने में पेश होने से पहले ही शक्तिपुर पुलिस ने AUJP कार्यकर्ता और कबीर के करीबी हैदर शेख को गिरफ्तार कर लिया है.
AUJP कार्यकर्ताओं और नेताओं की गिरफ्तारी के मामले में AUJP विधायक हुमायूं कबीर ने चुनाव आयोग को पत्र लिखकर कहा है कि उनके कार्यकर्ताओं को गैर-कानूनी तरीके से गिरफ्तार किया जा रहा है.
AUJP ने चुनाव आयोग को लिखा लेटर
AUJP की तरफ से रविवार (20 सितंबर) को चुनाव आयोग को लिखे लेटर में कहा गया कि एक सोची-समझी साजिश के तहत उन पर नकली नोट और हथियार रखने के झूठे आरोप लगाकर पुलिस कस्टडी में भेज दिया गया.
लेटर में कहा गया कि नवदा पुलिस स्टेशन ने शनिवार को हमारे उम्मीदवार सरतुल इस्लाम मंडल (मदन) को गिरफ्तार किया.
लेटर में आगे कहा गया कि रेजीनगर थाने की पुलिस ने शनिवार को अब्दुल अलीम शेख (आंचल अध्यक्ष, दादपुर आंचल), मंजूर शेख (गेबू), हक मल्लिक और मसरुद्दीन शेख हमारे इन सभी नेताओं को गिरफ्तार किया.
इसके अलावा शक्तिपुर पुलिस ने पूर्व सैनिक नसीम शेख को गिरफ्तार किया है.
कई अधिकारियों को हटाने की मांग
चुनाव आयोग से कहा गया कि डर के इस माहौल और पुलिस प्रशासन के ऐसे खुलेआम पक्षपाती रवैये के बीच, निष्पक्ष और शांतिपूर्ण चुनाव कराना पूरी तरह से असंभव है.
लेटर में आगे कहा गया कि हम मांग करते हैं कि 6 अक्टू़बर को होने वाले रेजीनगर विधानसभा उपचुनाव को निष्पक्ष, स्वतंत्र और लोकतांत्रिक तरीके से कराने के लिए बहरमपुर एसपी, इंस्पेक्टर-इन-चार्ज (IC) बेलडांगा पुलिस स्टेशन, ऑफिसर-इन-चार्ज (OC), रेजीनगर पुलिस स्टेशन और शक्तिपुर पुलिस स्टेशन के ऑफिसर-इन-चार्ज को उनकी मौजूदा जिम्मेदारियों से तुरंत हटाया जाए.
ताकि लोग बिना किसी डर के वोट डाल सकें. <p sty
📡 स्रोत: ABP Live
💡 पृष्ठभूमि (Background)
रेजीनगर उपचुनाव के दौरान पश्चिम बंगाल की सियासत गर्म हो रही है। बहरमपुर थाने ने एक वायरल ऑडियो के मामले में विकास पार्टी के सुप्रीमो और विधायक हुमायूं कबीर को समन भेजा, जिससे वह शक्तिपुर पुलिस के समक्ष पेश होने के लिए बाध्य हुए। यह घटना चुनावी माहौल में गहरी ध्रुवीकरण और कानूनी जाँच का संकेत देती है। महत्वपूर्ण इसलिए है क्योंकि यह दिखाता है कि राजनीतिक दलों पर पुलिस कार्रवाई का दबाव बढ़ रहा है, जिससे चुनावी प्रक्रियाओं में पारदर्शिता और जवाबदेही पर सवाल उठते हैं। आम जनता पर इसका असर चुनावी विश्व