रेल विस्तार की मांग पर विकास को लेकर बहस
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बक्सर में एक ट्रेन के विस्तार की मांग ने जिले के विकास को लेकर एक ऐसी बहस छेड़ दी है, जिसका दायरा रेलवे से निकलकर उद्योग, रोजगार, शिक्षा और राजनीतिक प्राथमिकताओं तक पहुंच गया है।
स्थानीय विधायक आनंद मिश्र ने हावड़ा-पटना सुपरफास्ट एक्सप्रेस का बक्सर तक विस्तार किए जाने के अनुरोध को लेकर रेल मंत्री की ओर से मिले पत्र को सोशल मीडिया मंच एक्स पर साझा किया। पत्र में अनुरोध पर जांच किए जाने की जानकारी सामने आई। इसके बाद सोशल मीडिया पर लोगों की अलग-अलग प्रतिक्रियाएं आने लगीं।
कुछ लोगों ने सवाल उठाया कि बक्सर जैसे जिले के लिए रेल सुविधाएं जरूरी होने के बावजूद विकास का लक्ष्य केवल नई ट्रेन या ठहराव तक सीमित नहीं होना चाहिए। वहीं विधायक की ओर से प्रतिक्रिया देते हुए कहा गया कि वे विधायक हैं और स्थानीय लोगों की आकांक्षाओं के अनुरूप काम करना उनकी जिम्मेदारी है।
उन्होंने रेल को बक्सर के लिए जीवनरेखा बताया।सोशल मीडिया पर शुरू हुई बहस में सबसे अहम सवाल यह रहा कि जनप्रतिनिधियों की उपलब्धियों का मूल्यांकन किस आधार पर किया जाए। एक पक्ष का मानना है कि किसी भी क्षेत्र के लिए बेहतर रेल संपर्क बड़ी आवश्यकता है।
दूसरी ओर यह तर्क सामने आया कि रेल के साथ-साथ बक्सर को उद्योग और रोजगार के क्षेत्र में भी ऐसी योजनाओं की जरूरत है, जिनका सीधा लाभ स्थानीय युवाओं को मिले।इसी बीच समाजवादी नेता तथा जगजीवन राम शोध संस्थान के निदेशक डॉ नरेंद्र पाठक ने बक्सर के पुराने औद्योगिक इतिहास का जिक्र कर बहस को नया मोड़ दे दिया।डॉ पाठक ने कहा कि पूर्व जनप्रतिनिधि अनंत प्रसाद शर्मा ने बक्सर को औद्योगिक केंद्र के रूप में विकसित करने की परिकल्पना की थी।
उनके अनुसार इसी सोच के तहत चुरामनपुर और अहरौली क्षेत्र की जमीन पर औद्योगिक क्षेत्र स्थापित करने की दिशा में पहल हुई थी।
उनके मुताबिक उस समय जिन संभावित योजनाओं की रूपरेखा सामने आई थी, उनमें आटा मिल, ऑक्सीजन उत्पादन, रेल कोच मरम्मत से जुड़े नट-बोल्ट निर्माण, सीमेंट के उपोत्पाद, दवा तथा चिकित्सकीय उपकरण निर्माण जैसी गतिविधियां शामिल थीं। डॉ पाठक ने दावा किया कि इन योजनाओं की रूपरेखा अनंत प्रसाद शर्मा ने स्वयं तैयार की थी।
📡 स्रोत: NewsData.io