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रिपोर्ट- फ्रांस दंगों और भारत के प्रदर्शनों में कनेक्शन:9 देशों के 101 संगठनों तक फैला सीक्रेट नेटवर्क; चीन में बैठा सिंघम कर रहा फंडिंग

लेखक: JKS News Desk अंतिम अपडेट: 22 अक्टूबर 2026
प्रकाशक: वॉयस ऑफ क्रांति
रिपोर्ट- फ्रांस दंगों और भारत के प्रदर्शनों में कनेक्शन:9 देशों के 101 संगठनों तक फैला सीक्रेट नेटवर्क; चीन में बैठा सिंघम कर रहा फंडिंग

फ्रांस में हुए दंगों और भारत में मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर हो रहे प्रदर्शनों के बीच कनेक्शन का दावा किया गया है। अमेरिकी न्यूज चैनल फॉक्स न्यूज की रिपोर्ट में 9 देशों के 101 संगठनों के नेटवर्क का जिक्र है। रिपोर्ट के मुताबिक, ये संगठन अलग-अलग देशों में प्रदर्शनों के आयोजन, उनके बीच तालमेल बनाने या उन्हें बढ़ावा देने में भूमिका निभा रहे हैं।

इसमें फ्रांस के इंडियन अलायंस पेरिस (IAP) और प्रोग्रेसिव इंटरनेशनल जैसे संगठनों का भी नाम है। रिपोर्ट में चीन के शंघाई में रहने वाले अमेरिकी मूल के कारोबारी नेविल रॉय सिंघम पर कुछ वामपंथी संगठनों को आर्थिक मदद देने का दावा भी किया गया है। रिपोर्ट में फ्रांस में आगे होने वाले प्रदर्शनों और 20 नवंबर को प्रस्तावित इंटरनेशनल यूथ स्ट्राइक का भी जिक्र है।

IAP सचिव के फ्रांसीसी कम्युनिस्ट पार्टी से संबंध का दावा फॉक्स न्यूज की रिपोर्ट ‘ग्लोबल केऑस इंक ग्रोज टू 101 ग्रुप्स’ में इंडियन अलायंस पेरिस (IAP) और मैनहैटन स्थित पीपल्स फोरम के बीच साझेदारी का जिक्र किया गया है। रिपोर्ट के मुताबिक, सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म डिसइन्फोलैब ने अपनी एक पोस्ट में दावा किया कि IAP के सचिव जॉय बनर्जी फ्रांस की ट्रेड यूनियन CGT के पूर्व प्रतिनिधि रह चुके हैं और उनके फ्रांसीसी कम्युनिस्ट पार्टी से संबंध हैं।

रिपोर्ट में प्रोग्रेसिव इंटरनेशनल नाम के अंतरराष्ट्रीय संगठन का भी जिक्र है। इस संगठन ने 16 अक्टूबर को अपनी वेबसाइट पर जारी ब्रीफिंग में फ्रांस, स्पेन, भारत और अल्बानिया में चल रहे आंदोलनों का एक साथ उल्लेख किया। संगठन ने सवाल उठाया कि क्या ये आंदोलन उन परिस्थितियों को बदलने के लिए संगठित ताकत बन सकते हैं, जिनके खिलाफ वे शुरू हुए हैं।

उसने इन आंदोलनों को समर्थन देने और उनके बीच संपर्क बढ़ाने की बात भी कही। 101 संगठनों में 33 छात्र और युवा समूह रिपोर्ट के मुताबिक, 9 देशों में फैले 101 संगठनों में से 33 का नेतृत्व छात्रों या युवाओं के हाथ में है। बाकी संगठनों का नेतृत्व मुख्य रूप से वयस्क करते हैं। रिपोर्ट में वामपंथी, कम्युनिस्ट और समाजवादी समूहों के साथ छात्र संगठनों का भी जिक्र है।

रिपोर्ट में इस नेटवर्क को ‘रेड-ग्रीन प्रोटेस्ट इकोसिस्टम’ नाम दिया गया है। इसमें ‘रेड’ का संबंध कम्युनिस्ट और समाजवादी समूहों से, जबकि ‘ग्रीन’

📡 स्रोत: Dainik Bhaskar

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