रिजिजू बोले- अभिजीत दीपके AAP कार्यकर्ता, छात्र नेता कैसे बने:आम आदमी पार्टी ने छात्रों का आंदोलन हाईजैक करने की कोशिश की
केंद्रीय संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने मंगलवार, 18 अगस्त को CJP संस्थापक अभिजीत दिपके पर निशाना साधा। उन्होंने आरोप लगाया कि दिपके आम आदमी पार्टी के कार्यकर्ता हैं, जो जंतर-मंतर पर युवाओं के नेतृत्व वाले प्रदर्शनों में खुद को छात्र नेता बताने की कोशिश कर रहे हैं। ANI को दिए इंटरव्यू में रिजिजू ने कहा कि प्रदर्शन कर रहे छात्रों की चिंताएं सही हैं। हालांकि, उनका आरोप है कि AAP ने अपने फायदे के लिए आंदोलन को हाईजैक करने की कोशिश की। छात्रों की मांग सही, राजनीतिक दलों पर आरोप हाल के छात्र आंदोलनों से युवा नेतृत्व उभरने के सवाल पर रिजिजू ने कहा कि सरकार छात्रों की शिकायतों को गंभीरता से लेती है। उन्होंने छात्र आंदोलन और राजनीतिक फायदे के लिए आंदोलन के इस्तेमाल में फर्क बताया। रिजिजू ने कहा, “छात्रों की चिंताएं सही हैं, लेकिन आम आदमी पार्टी और अन्य लोगों की ओर से स्थिति को हाईजैक करने की कोशिश सही नहीं है। अभिजीत दिपके महाराष्ट्र से हैं, लेकिन वह आम आदमी पार्टी के कार्यकर्ता हैं। वह ‘छात्र’ कैसे बन गए?” उन्होंने कहा कि सरकार छात्रों की वास्तविक मांगों पर उनसे सीधे बातचीत के लिए तैयार है। साथ ही, रिजिजू ने चुनावी झटकों के बाद राजनीतिक दलों पर आंदोलन का फायदा उठाने का आरोप लगाया। रिजिजू ने कहा, “छात्रों में एक जुनून होता है और उनसे बातचीत की जा सकती है। लेकिन जब राजनीतिक दल छात्रों के पीछे छिपकर अपना राजनीतिक फायदा उठाने की कोशिश करते हैं, तो यह बिल्कुल सही नहीं है।” Gen Z से BJP के जुड़ाव पर बोले रिजिजू किरण रिजिजू ने Gen Z के साथ BJP के जुड़ाव को लेकर बनी धारणा पर भी बात की। उन्होंने उस दावे को खारिज किया कि BJP का युवाओं से जुड़ाव नहीं है। उन्होंने कहा कि एशियाई समाजों में अक्सर युवाओं से बड़ों की बात सुनने की उम्मीद की जाती है। इसलिए पीढ़ियों के बीच तालमेल बनना धीरे-धीरे होने वाली प्रक्रिया है। रिजिजू ने कहा कि Gen Z के साथ दूरी कम करने के लिए लगातार और सक्रिय बातचीत जरूरी है। उन्होंने कहा, “जुड़ाव की कोई कमी नहीं है। वे हमारे अपने बच्चे हैं। हमारा समाज एशियाई है। एशिया में लोग परिवार के रिश्तों से जुड़े रहते हैं। यह पश्चिमी समाज जैसा नहीं है।” उन्होंने कहा, “हम जुड़े हुए हैं। हम परिवार के माहौल में रहते हैं, जहां बच्चों से बड़ों की बात सुनने की उम्मीद की जाती है। अगर कोई
📡 स्रोत: Dainik Bhaskar