रीवा: मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने 'बलराम महोत्सव' का किया वर्चुअल शुभारंभ, कहा- अति वर्षा और बाढ़ से फसल हानि का हो सर्वे
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रीवा में सेवा संकल्प अभियान के तहत करहिया कृषि उपज मंडी में 'बलराम महोत्सव' का आयोजन हुआ। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने वर्चुअल माध्यम से जुड़कर रीवा के प्रगतिशील किसानों से संवाद किया और उन्नत खेती की जानकारी ली। कृषि और गो-संवर्धन में प्रगति: मुख्यमंत्री ने कहा कि रीवा के सुंदरजा आम को जीआई टैग मिलने से वैश्विक मांग बढ़ी है।
यहाँ धान-गेहूं के साथ प्राकृतिक खेती, उद्यानिकी और बसामन मामा गौ अभ्यारण्य में गो-संरक्षण के साथ प्राकृतिक खेती का मॉडल बेहतर ढंग से विकसित किया गया है। इसके अलावा रीवा में खाद्य प्रसंस्करण इकाइयाँ स्थापित कर किसानों को लाभ पहुँचाया जाएगा। फसल क्षति का सर्वे और स्वामित्व योजना: मुख्यमंत्री ने हाल ही में आई बाढ़ और अति वर्षा से हुई फसल हानि का समुचित सर्वे कराने के निर्देश दिए।
साथ ही बताया कि स्वामित्व योजना के तहत आबादी भूमि पर भू-धिकार पत्रों का निःशुल्क पंजीयन कराया जा रहा है, जिस पर सरकार चार हजार करोड़ रुपये खर्च कर रही है। स्लीमनाबाद टनल का काम पूरा होने से जल्द ही नर्मदा का जल विंध्य के खेतों तक पहुँचेगा। उप मुख्यमंत्री का संबोधन: उप मुख्यमंत्री श्री राजेन्द्र शुक्ल ने कहा कि प्रदेश में सिंचाई क्षमता 2003 के 7 लाख हेक्टेयर से बढ़कर अब 54 लाख हेक्टेयर हो गई है, जो जल्द ही 1 करोड़ हेक्टेयर तक पहुँचेगी।
उन्होंने किसानों को फसल ऋण भुगतान में सहूलियत देने और नदी जोड़ो अभियानों के लिए मुख्यमंत्री व प्रधानमंत्री का आभार जताया। सम्मान और सहभागिता: महोत्सव में प्रगतिशील किसानों (व्यासमुनि पाण्डेय, सुरेन्द्र कुशवाहा, सुनीता कुशवाहा आदि) ने मुख्यमंत्री से संवाद किया और किसानों व उनकी प्रतिभावान संतानों को सम्मानित किया गया।
इस अवसर पर कमिश्नर शीलेन्द्र सिंह, कलेक्टर नरेन्द्र कुमार सूर्यवंशी, जिला पंचायत सीईओ सृष्टि देशमुख गौड़ा सहित अन्य जनप्रतिनिधि और अधिकारी उपस्थित रहे।
🎙️ वॉयस ऑफ क्रांति का मत
रीवा में बलराम महोत्सव के वर्चुअल शुभारंभ से किसानों को उन्नत खेती और प्राकृतिक कृषि की दिशा में प्रेरणा मिली। जब वर्षा और बाढ़ से फसल क्षति का सामना करना पड़े, तो हमें सहानुभूति के साथ एकजुट होकर जलवायु‑स्मार्ट तरीकों को अपनाना चाहिए। ज्ञान साझा कर, नयी प्रौद्योगिकी अपनाकर और सामूहिक प्रयास से हम न केवल फसल बचा सकते हैं, बल्कि ग्रामीण समाज को सशक्त और समृद्ध बना सकते हैं।