रोटरी क्लब भोपाल हिल्स का प्रोजेक्ट मुस्कान, बच्चों को शिक्षा के साथ क्रोशिया का हुनर
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भोपाल। बच्चों की शिक्षा में सहयोग करने और उन्हें नए कौशल से जोड़ने के उद्देश्य से रोटरी क्लब भोपाल हिल्स ने 30 सितंबर को अयोध्या बायपास स्थित हरशिनी सोशल वेलफेयर सोसायटी में ‘प्रोजेक्ट मुस्कान’ का आयोजन किया। कार्यक्रम के तहत बच्चों को स्कूल बैग, नोटबुक और पेंसिल सेट वितरित किए गए। इसके साथ ही विशेष क्रोशिया आर्ट वर्कशॉप आयोजित कर बच्चों को रचनात्मक कौशल सीखने का अवसर दिया गया।
वर्कशॉप का संचालन प्रोजेक्ट चेयर रोटेरियन ममता भसीन और को-चेयर रोटेरियन अंजलि रामसिंघानी ने किया। बच्चों को क्रोशिया की बुनियादी तकनीकों से परिचित कराने के साथ धागे से उपयोगी और सजावटी वस्तुएं तैयार करने की प्रक्रिया भी सिखाई गई। इस गतिविधि का उद्देश्य बच्चों में रचनात्मकता, एकाग्रता और अपने हाथों से कुछ नया तैयार करने के आत्मविश्वास को बढ़ावा देना रहा।
क्लब अध्यक्ष रोटेरियन अनिल कुमार गुप्ता ने बच्चों से संवाद कर उन्हें शिक्षा के प्रति निरंतर आगे बढ़ने, अपनी क्षमताओं को पहचानने और भविष्य के लिए बड़े लक्ष्य तय करने के लिए प्रेरित किया। हरशिनी सोशल वेलफेयर सोसायटी की संस्थापक नेहा ममतानी ने संस्था की ओर से बच्चों की शिक्षा और समग्र विकास के लिए किए जा रहे प्रयासों की जानकारी साझा की। क्लब सदस्यों ने संस्था परिसर का भ्रमण कर वहां संचालित विभिन्न गतिविधियों को भी जाना।
कार्यक्रम में बच्चों की उपलब्धियों और प्रतिभा को भी मंच दिया गया। उनकी शैक्षणिक उपलब्धियों की सराहना की गई। इसके साथ ही बच्चों ने रुद्राष्टकम और महिषासुर मर्दिनी की प्रस्तुतियां देकर अपनी प्रतिभा और आत्मविश्वास का परिचय दिया।
‘प्रोजेक्ट मुस्कान’ के माध्यम से रोटरी क्लब भोपाल हिल्स ने शैक्षणिक सहयोग के साथ कौशल विकास, रचनात्मक गतिविधियों और बच्चों की सक्रिय भागीदारी को भी जोड़ा। कार्यक्रम का समापन बच्चों द्वारा प्रस्तुत ‘शुक्रिया डांस’ के साथ हुआ।
💡 पृष्ठभूमि (Background)
रोटरी क्लब भोपाल हिल्स द्वारा आयोजित ‘प्रोजेक्ट मुस्कान’ एक सामाजिक पहल है, जिसमें बच्चों को शिक्षा के साथ-साथ क्रोशिया कला का कौशल सिखाया जाता है। यह कार्यक्रम शिक्षा के प्रति जागरूकता बढ़ाने और रचनात्मक क्षमताओं को विकसित करने के उद्देश्य से है। इस तरह की पहलों से बच्चों के समग्र विकास में मदद मिलती है, जिससे वे शैक्षणिक और व्यावहारिक दोनों तरह के कौशल से लैस होते हैं। समाज में यह कदम शिक्षा और कला के संगम को दर्शाता है, जिससे अन्य संगठनों को भी ऐसी पहल करने की प्रेरणा मिल सकती है और समुदाय मे