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RSS ने देशभर में NRC कराने की मांग दोहराई:कहा- वोटर लिस्ट की जांच हो, कौन भारतीय नागरिक और कौन नहीं यह जानना जरूरी

लेखक: JKS News Desk अंतिम अपडेट: 1 अक्टूबर 2026
प्रकाशक: वॉयस ऑफ क्रांति
RSS ने देशभर में NRC कराने की मांग दोहराई:कहा- वोटर लिस्ट की जांच हो, कौन भारतीय नागरिक और कौन नहीं यह जानना जरूरी

स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) और जनगणना को लेकर चल रही चर्चा के बीच RSS ने देशभर में नेशनल रजिस्टर ऑफ सिटिजन्स (NRC) कराने की मांग दोहराई है। दिल्ली में एक कार्यक्रम के दौरान संघ के प्रचार प्रमुख सुनील आंबेकर ने कहा- यह साफ होना चाहिए कि कौन भारतीय नागरिक है और कौन नहीं। आंबेकर ने कहा कि वोटर लिस्ट में गलत तरीके से शामिल गैर-नागरिकों की पहचान जरूरी है।

उन्होंने सिटीजनशिप अमेंडमेंट एक्ट (CAA) के तहत पात्र लोगों को नागरिकता देने और उनकी पहचान NRC के जरिए करने की बात भी कही। आंबेकर ने जनसंख्या में बदलाव को 1947 के विभाजन से जोड़ते हुए कहा कि जनसंख्या संतुलन देश की सांस्कृतिक पहचान, एकता और सुरक्षा से जुड़ा है। उन्होंने राजनीतिक दलों से संवेदनशील राष्ट्रीय मुद्दों को राजनीतिक फायदे के लिए इस्तेमाल नहीं करने की अपील की।

साथ ही कहा कि ऐसे मामलों को केवल ‘सेक्युलर बनाम सांप्रदायिक’ बहस के बजाय देश की एकता, अखंडता और सुरक्षा के नजरिए से देखा जाना चाहिए। आंबेकर की स्पीच की 5 बड़ी बातें 1.

NRC की प्रक्रिया पर आपत्ति हो तो कानूनी रास्ता: आंबेकर ने कहा कि अगर किसी को NRC की प्रक्रिया पर आपत्ति है तो अदालत समेत कानूनी रास्ते खुले हैं। सिर्फ राजनीतिक कारणों से किसी गैर-नागरिक को भारतीय नागरिक मानना सही नहीं होगा। 2.

पड़ोसी देशों के SC/ST और कमजोर वर्गों का जिक्र: उन्होंने कहा- पड़ोसी देशों से भारत आए जो लोग CAA के तहत नागरिकता के पात्र हैं, उन्हें नागरिकता मिलनी चाहिए। पड़ोसी देशों में रह गए SC/ST और आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों के लोगों के उत्पीड़न को भी देखा जाना चाहिए।” 3.

जनसंख्या बदलाव की शुरुआत मुस्लिम आक्रमणों से जोड़ी: आंबेकर ने कहा- भारत में जनसंख्या बदलाव की शुरुआत मुस्लिम आक्रमणों के दौर से हुई। 1947 में धर्म और जनसंख्या के आधार पर देश का विभाजन हुआ था, इसलिए जनसंख्या संतुलन जरूरी है। संस्कृति की रक्षा की बात को सांप्रदायिक नहीं कहा जा सकता। 4.

शादी और दूसरे कानूनों में समानता की बात: आंबेकर ने कहा कि कानून सभी के लिए समान होना चाहिए। उन्होंने शादी और बहुविवाह से जुड़े अलग-अलग कानूनी प्रावधानों के साथ संविधान के अनुच्छेद 29 और 30 तथा स्थानीय निकाय चुनावों में जनसंख्या नियंत्रण से जुड़े नियमों का भी जिक्र किया। 5.

अवैध प्रवास पर पुरानी नीतियों की आलोचना: उन्होंने कहा

📡 स्रोत: Dainik Bhaskar

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💡 पृष्ठभूमि (Background)

यह खबर भारतीय राष्ट्रीय रजिस्टर ऑफ सिटिजन्स (NRC) के बारे में है, जिसे RSS ने देशभर में लागू करने की मांग दोहराई है। NRC का उद्देश्य यह तय करना है कि कौन भारतीय नागरिक है और कौन नहीं, ताकि गैर-नागरिकों को वोटर लिस्ट से हटाया जा सके। यह विषय इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि वर्तमान में वोटर लिस्ट में गैर-नागरिकों की मौजूदगी और CAA के तहत नागरिकता के प्रश्नों पर विवाद चल रहा है। यदि NRC लागू हुआ तो आम जनता पर असर पड़ेगा: नागरिकता की पहचान स्पष्ट होगी, लेकिन प्रक्रिया में समय, लागत और विवाद भी बढ़ सकते

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