राजनीति

रूसी तेल पर अमेरिकी टैरिफ का बोझ भारतीय जनता पर नहीं पड़ना चाहिए: जमाअत-ए-इस्लामी हिंद

लेखक: Maroof Ahmed Khan अंतिम अपडेट: 21 सितंबर 2026
प्रकाशक: वॉयस ऑफ क्रांति

नई दिल्ली। रूस से तेल और गैस खरीदने वाले देशों पर अमेरिका की ओर से अतिरिक्त टैरिफ लगाए जाने की आशंका के बीच जमाअत-ए-इस्लामी हिंद ने कहा है कि ऐसे भू-राजनीतिक विवादों का आर्थिक बोझ आम भारतीय नागरिकों पर नहीं पड़ना चाहिए। जमाअत के उपाध्यक्ष एस. अमीनुल हसन ने भारत सरकार से ऊर्जा और व्यापार नीति में रणनीतिक स्वायत्तता बनाए रखने तथा देश की ऊर्जा सुरक्षा को प्राथमिकता देने का आग्रह किया है।

18 सितंबर को जारी बयान में एस. अमीनुल हसन ने ‘लिंडसे ओ. ग्राहम सैनक्शनिंग रूस एंड ईरान एक्ट, 2026’ को लेकर चिंता जताई। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने 18 सितंबर को इस कानून पर हस्ताक्षर कर दिए हैं। कानून राष्ट्रपति को रूस से तेल और गैस खरीदने वाले निर्धारित देशों के आयात पर 100 प्रतिशत तक अतिरिक्त टैरिफ लगाने का अधिकार देता है। हालांकि भारत पर ऐसा टैरिफ स्वतः लागू नहीं होता और इसका वास्तविक प्रभाव अमेरिकी प्रशासन द्वारा लिए जाने वाले निर्णय तथा कानून में निर्धारित शर्तों पर निर्भर करेगा।

अमीनुल हसन ने कहा कि अमेरिका की ओर से लगाए जाने वाले संभावित अतिरिक्त शुल्क का असर केवल सरकारों तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि व्यापार और निर्यात के जरिए कंपनियों, कर्मचारियों और छोटे कारोबारियों पर भी पड़ सकता है। उन्होंने कहा कि रूस से ऊर्जा आयात में किसी तरह की अचानक कमी आने पर भारत को वैकल्पिक स्रोतों से कच्चे तेल की खरीद बढ़ानी पड़ सकती है, जिससे वैश्विक बाजार में प्रतिस्पर्धा और कीमतों पर असर पड़ने की संभावना है।

उन्होंने कहा कि भारत के लिए अपनी 1.4 अरब से अधिक आबादी की ऊर्जा जरूरतों को भरोसेमंद और किफायती तरीके से पूरा करना महत्वपूर्ण है। उनके मुताबिक, देश की दीर्घकालिक ऊर्जा सुरक्षा का समाधान केवल एक आपूर्तिकर्ता से दूसरे आपूर्तिकर्ता की ओर निर्भरता बदलना नहीं हो सकता। इसके लिए आयातित जीवाश्म ईंधन पर निर्भरता कम करने की दिशा में लगातार काम करने की जरूरत है।

जमाअत के उपाध्यक्ष ने सार्वजनिक परिवहन और रेलवे के विस्तार, नवीकरणीय ऊर्जा, ऊर्जा दक्षता, इलेक्ट्रिक मोबिलिटी, विकेंद्रीकृत बिजली उत्पादन और घरेलू विनिर्माण में निवेश बढ़ाने की वकालत की। उन्होंने कहा कि इससे ऊर्जा आयात पर निर्भरता कम करने के साथ आर्थिक और रणनीतिक आत्मनिर्भरता को भी बढ़ावा मिल सकता है।

उन्होंने भारत सरकार से आग्रह किया कि देश किसी एक भू-राजनीतिक गुट या ऊर्जा स्रोत पर अत्यधिक निर्भर न रहे और अपनी ऊर्जा तथा व्यापारिक साझेदारियों में विविधता बनाए रखे। उन्होंने कहा कि भारत की विदेश और आर्थिक नीतियां देश की ऊर्जा सुरक्षा, आर्थिक हित और आम नागरिकों के कल्याण को ध्यान में रखकर तय की जानी चाहिए।

अमीनुल हसन ने भारत और अमेरिका के बीच लगातार कूटनीतिक संवाद की जरूरत पर भी जोर दिया। उन्होंने कहा कि दोनों देशों को ऐसे कदमों से बचना चाहिए जिनसे मौजूदा व्यापारिक संबंधों पर व्यापक असर पड़े। साथ ही उन्होंने भारत सरकार से अपने व्यापारिक और आर्थिक हितों की रक्षा करते हुए दीर्घकालिक ऊर्जा सुरक्षा की दिशा में निवेश बढ़ाने का आग्रह किया।

💡 पृष्ठभूमि (Background)

रूस से तेल-गैस खरीदने वाले देशों पर अमेरिका द्वारा लगाए जाने वाले अतिरिक्त टैरिफ के चलते, जमाअत-ए-इस्लामी हिंद ने यह चेतावनी दी है कि इस भू‑राजनीतिक विवाद का आर्थिक बोझ आम भारतीय नागरिकों पर नहीं पड़ना चाहिए। यह विषय वैश्विक ऊर्जा बाजार में बढ़ती टैरिफ नीतियों और उनके घरेलू असर से संबंधित है। खबर महत्वपूर्ण है क्योंकि यह दर्शाती है कि भारत को ऊर्जा और व्यापार नीति में रणनीतिक स्वायत्तता बनाए रखने की जरूरत है, ताकि विदेशी दबावों से बचा जा सके। यदि टैरिफ बढ़े तो तेल‑गैस की कीमतें बढ़ सकती हैं, जिस

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Maroof Ahmed Khan

Maroof Ahmed Khan वॉयस ऑफ क्रांति के संस्थापक एवं प्रधान संपादक हैं। वे जनसरोकार, निष्पक्ष रिपोर्टिंग और जनता की आवाज़ को प्रमुखता देने के लिए प्रतिबद्ध हैं।