Russia में चीन का 10 बिलियन डॉलर वाला प्लांट तबाह, भारत के लिए मौका

पिछले 24 घंटे में रूस के एमूर गैस केमिकल कॉम्प्लेक्स में जो हुआ उसने पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था की नींव हिला दी। यह सिर्फ एक आग नहीं है। यह चीन का वो 8 बिलियन डॉलर का निवेश है जो राख बन चुका है। जो स्वाहा हो चुका है। जिस प्रोजेक्ट को चीन रूस की इकॉनमी का इंजन कह रहा था आज वो इंजन पूरी तरह से सीज हो चुका है।
लेकिन असली कहानी इस आग के पीछे छिपी है। क्या यह सिर्फ एक तकनीकी खराबी थी या चीन का वो मास्टर प्लान फेल हो गया जिसके जरिए वो रूस को अपना गुलाम यानी कि सेटेलाइट स्टेट बनाना चाहता था। दरअसल 7 साल पहले जब रूस और चीन ने इस प्रोजेक्ट की शुरुआत की तो इसे दोस्ती की मिसाल कहा गया।
लेकिन पर्दे के पीछे चीन एक बहुत ही खतरनाक खेल खेल रहा था। रूस के पास कच्चा तेल और गैस तो है ही लेकिन पश्चिमी देशों के प्रतिबंधों की वजह से उसके पास पैसा और आधुनिक तकनीक की कमी थी। इसे भी पढ़ें: अब ईरान पर अटैक नहीं करेगा अमेरिका, मार्को रूबियो ने बता दिया आगे का प्लान चीन ने इसी मौके को लपका।
उसने $8 बिलियन डॉलर का चेक रूस के सामने रख दिया। पहला मकसद था रूस को पूरी तरह निर्भर बनाना। चीन चाहता था कि रूस की गैस पाइपलाइन से लेकर उसके केमिकल एक्सपोर्ट तक हर चीज पर चीन का कंट्रोल हो। दूसरा पॉइंट है सेटाइट स्टेट का निर्माण।
जैसे आज पाकिस्तान की विदेश नीति और इकॉनमी बीजिंग से कंट्रोल होती है वैसे ही चीन चाहता था कि रूस का अस्तित्व चीन के बिना खत्म हो जाए। तीसरा पॉइंट है साल 2030 का टारगेट। चीन का लक्ष्य था कि साल 2030 तक रूस की इकॉनमी का 40% हिस्सा इस अकेले प्रोजेक्ट से कंट्रोल होगा। लेकिन कुदरत को कुछ और ही मंजूर था।
एमूर गैस केमिकल कॉम्प्लेक्स को इस तरह डिजाइन किया गया था कि यह दुनिया की केमिकल इंडस्ट्री को डोमिनेट करें। यह रूस की कमाई को दोगुना करने वाला था। लेकिन जैसे ही इसे ऑपरेशनल मोड में डाला गया एक ऐसा धमाका हुआ जिसने मीलों दूर तक की खिड़कियां तोड़ दी।
इसे भी पढ़ें: अमेरिका-ईरान जंग के बीच Doha की बड़ी पहल, कतर PM Al-Thani तेहरान में करेंगे हाई लेवल मीटिंग अब चीन के लिए एक करारा तमाचा है क्योंकि पहला पॉइंट है इसका 7 साल का वक्त बर्बाद। पैसा तो शायद चीन और कमा ले लेकिन यह 7 साल का वक्त अब वापस नहीं आएगा। दूसरा पॉइंट है सप्लाई चेन का टूटना।
चीन इस प्लांट से निकलने वाले केमिकल्स पर अपनी मैन्युफैक्चरिंग इंडस्ट्री को टिकाने वाला था। अब चीन की अपनी इंडस्ट्री संकट में है। तीसरा पॉइंट है रूस का भरोसा टूटा। रूस के अंदर अब यह आवाज उठने लगी कि क्या चीन की तकनीक और चीन का पैसा वाकई सुरक्षित है। अब यह वही जगह है दोस्तों जहां भारत की एंट्री होती है।
रूस अब एक ऐसे साथी की तलाश में है जो उसे दबाए नहीं बल्कि उसके साथ बराबरी का व्यवहार करे। रूस को समझ में आ गया है कि चीन पर हद से ज्यादा निर्भरता उसे खा जाएगी।
📡 स्रोत: NewsData.io